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समाज कार्य का उदगम और विकास

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भाग क

प्रश्न 1. भारत में सामुदायिक कार्य के ऐतिहासिक विकास के बारे में लिखिए तथा समाज कार्य व्यवसाय में सामुदायिक कार्य के स्थान की भी चर्चा कीजिए।

उत्तर भारत में 1950 के दशक से पूर्व सामुदायिक कार्य के सम्बन्ध में इतनी गंभीरता नहीं थी। 1950 के दशक में ही भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में एक सामुदायिक विकास कार्यक्रम प्रारंभ किया गया।

भारत में सामुदायिक कार्य के विकास के पर्याप्त अवसर विद्यमान थी। भारत में सामुदायिक कार्य को एक ऐसी प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है जो शिक्षा, स्वास्थ्य तथा कृषि विकास क्षेत्रों में सामंजस्यता बनाये रखती है।

इसके अन्तर्गत मुख्य जोर इस बात पर दिया जाता है कि जन सामान्य की आवश्यकताओं की आपूर्ति को सुनिश्चित किया जा सके। भारत में सामुदायिक विकास को एक ऐसे आन्दोलन के रूप में परिभाषित किया गया है जो समुदाय की सक्रिय सहभागिता पर आधारित है।

मुखर्जी ने सामुदायिक विकास को एक ऐसी प्रक्रिया के रूप व्यक्त किया है, जिसमें लोगों के प्रयास शासकीय प्राधिकरणों से संयोजित होते हैं। MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

जिससे समुदाय की सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक परिस्थितियों में सुधार आता है और इन सुधारों के कारण लोगों का जीवन स्तर ऊपर उठ सके, ताकि वे भी देश के विकास में अपना योगदान दे सके।

भारत में सामुदायिक संगठन की स्थापना कुछ उद्देश्यों को लेकर की गयी थी। इसका पहला उद्देश्य था समाज के सभी वर्गों की देखभाल करना, विशेषकर गरीबों एवं उपेक्षित लोगों की।

इसका दूसरा उद्देश्य था लोगों को उद्देश्यपूर्ण कार्यों के लिए संगठित करना। सामुदायिक संगठन का सबसे महत्त्वपूर्ण उद्देश्य था उस वर्ग की सहायता जो साधनविहीन हैं, जिसके पास इतने संसाधन भी नहीं हैं, जो उसके गुजारे के लिए आवश्यक हो।

भारत में सामुदायिक संगठन का चौथा उद्देश्य है विकास की सम्पूर्ण प्रक्रिया की देखभाल करना।

भारत में सामुदायिक कार्य शुरू करने का यही उद्देश्य था कि ग्रामीण लोगों को अपनी आवश्यकताओं की वस्तुएँ अपने आस-पास ही उपलब्ध हो जायें तथा उनकी समस्याओं का समाधान भी उनके समीपस्थ क्षेत्र में हो।

भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में समाज कार्य की प्रक्रिया में सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ-साथ अन्य वर्गों के व्यक्तियों को भी शामिल किया जाता है। MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

इसमें सभी वर्गों के लोग शामिल थे, जैसे शिक्षक, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, कृषक, वैज्ञानिक, क्षेत्रीय कार्यकर्ता। भारत में सामुदायिक कार्य का मुख्य जोर ग्रामों पर ही रहा है।

निर्धन वर्ग को राहत प्रदान करने के लिए समाज कार्यकर्ताओं द्वारा शहर की मलिन बस्तियों में अपना कार्य आरंभ कर दिया गया।

बड़ी संख्या में गैर-शासकीय संस्थाओं को कुछ महत्त्वपूर्ण समस्याओं ने अपनी और आकर्षित किया। जैसे साक्षरता, मूलभूत सुविधाओं का अभाव, महिलाओं की समस्या तथा बाल शोषण इत्यादि।

वर्तमान में भारत में विभिन्न संस्थानों में काफी बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता कार्य कर रहे हैं। वास्तव में भारत में सामुदायिक कार्य का स्वरूप मुख्यत: कल्याण उन्मुख रहा है।

सामुदायिक संगठन की विभिन्न विद्वानों ने भिन्न-भिन्न परिभाषा देने का प्रयास किया है। विद्वान एम.जी. रौस के अनुसार सामुदायिक संगठन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक समुदाय अपनी अनिवार्य आवश्यकताओं को चिह्नित करता है। अपनी आवश्यकताओं तथा उद्देश्यों का निर्धारण करता है।

आत्मविश्वास को विकसित करता है तथा सहयोगात्मक मनोवृत्ति का विकास तथा विस्तार करता है। गंगराड़े ने सामुदायिक संगठन की परिभाषा इस प्रकार दी है।

उन्होंने सामुदायिक संगठन को एक ऐसी प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया है, जो व्यक्ति को एकीकरण तथा अनुकूलन प्रदान करती है। MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

वास्तव में सामुदायिक संगठन से तात्पर्य ऐसी प्रक्रिया से है जो समुदाय के कल्याण के लिए कार्य करती है तथा समुदाय के लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित करती

समाज कार्य व्यवसाय में सामुदायिक कार्य का स्थान समाज कार्य के अन्तर्गत सामुदायिक कार्य का इतिहास बहुत पुराना है।

वर्तमान में सामुदायिक कार्य किसी विशेष समुदाय की देखभाल तक ही सीमित नहीं रह गया है बल्कि इसमें कई और भी कार्यों को शामिल किया गया है।

समुदाय-आधारित समाज कार्य की प्रक्रिया अब भी जारी है एवं यह बच्चों, परिवारों, युवाओं तथा बूढ़ों की समस्याओं पर अपना ध्यान केन्द्रित कर रहा है।

समाज कार्य की दिशा निर्धारित करने में सामुदायिक कार्य की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका है, परन्तु यह केवल सामुदायिक कार्य तक ही सीमित नहीं रह गया है। वर्तमान में यह गृह निर्माण तथा आयोजन जैसे विषयों को भी अपने में सम्मिलित कर रहा है।

इस सन्दर्भ में एक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि विभिन्न समुदायों के अन्तर्गत सामुदायिक कार्यों का निष्पादन अवैतनिक तथा सक्रिय कार्यकर्ताओं द्वारा किया जाता है और यह प्रक्रिया आज तक जारी है।

ये कार्यकर्ता समुदाय के लोगों के कल्याण के लिए कार्य करते हैं। विद्वानों के बीच इस बात को लेकर काफी वाद-विवाद हुआ है कि समाज कार्य को क्या केवल व्यावसायिक गतिविधि के रूप में परिभाषित किया जाये अथवा नहीं बाछ विद्वानों ने इसे व्यावसायिक गतिविधि के रूप में परिभाषित किया है,

जबकि कुछ ने इसकी आलोचना की है। वास्तव में समाज कार्य व्यवसाय में सामुदायिक कार्य का महत्त्वपूर्ण स्थान है, परन्तु वर्तमान में सामुदायिक कार्य केवल समाज कार्य व्यवसाय तक ही सीमित नहीं रहा है

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प्रश्न 2. सामान्यवादी अभ्यास की व्याख्या करें। कारण दीजिए कि यह भारत में क्यों प्रासंगिक है

उत्तर कोई भी निकाय एक ऐसा तंत्र होता है जिसमें सभी प्रकार की अर्जाओं का आदान-प्रदाना होता है और ऊर्जाओं का यह आदान-प्रदान तंत्र की सीमाओं के भीतर ही होता है।

समाज कार्य में एक निकाय-या हो सकता है। यह प्रश्न महत्त्वपूर्ण है। समाज कार्य में एक परिवार तथा एक लघु समूह निकाय हो सकता है। एक अवधारणा बन्द निकाय की है।

यदि नहीं पारिवारिक नियम अधिक सख्त हों तथा व्यक्ति अपने पड़ोसियों या समुदायों से भी अन्त:क्रिया न कर सके तो इससे ऊर्जाओं का आदान-प्रदान नहीं हो पायेगा तथा यह एक बन्द निकाय कहलायेगा।

यदि कोई परिवार अपने सदस्यों को मित्रों एवं समुदायों के सदस्यों के साथ अन्तःक्रिया के लिए समर्थन देता है तो ऐसे में सीमा पार से भी ऊर्जाओं का संचरण हो सकता है।MSW 1 Free Assignment In Hindi

जब एक व्यक्ति किसी समुदाय के सदस्य के साथ पास्परिक सम्बन्ध स्थापित कर उससे सहायता प्राप्त कर उसका उपयोग करता है तथा इसके बदले में उन्हें भी अपनी सेवाएं प्रदान करता है तो यह प्रक्रिया परिवार निकाय को स्थायित्व प्रदान करती है तथा विभिन्न समुदायों के बीच वे सम्बन्धों को भी मजबूत करती हैं।

कोई निकाय खुले प्रकार का है या बन्द प्रकार का, इसका निर्णय ऊर्जा संचरण की मात्रा करती है। यदि किसी ऊर्जा को, जो ज्ञान के रूप में हो सकती है, MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

किसी निकाय में इनपुट की तरह प्रविष्ट कराया जाये तो निकाय में इस ऊर्जा का पूर्णत: उपयोग होता है तथा वह वातावरण में अपना प्रभाव छोड़ते हुए आउटपुट के रूप में बाहर निकल जाती है।

यह प्रक्रिया काफी महत्त्वपूर्ण होती है। एक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि खुले | प्रकार के निकाय अन्य प्रकार के निकायों से महत्त्वपूर्ण जानकारी एकत्रित करते रहते हैं।

एक निकाय जब स्वयं को गतिमान बनाये रखने के लिए स्वयं की ऊर्जा का उपयोग करता है तब इस प्रक्रिया को ‘इंटरापी’ कहा जाता है।

एक निकाय छोटे-छोटे घटकों में सम्पन होने वाले परिवर्तनों से प्रभावित नहीं होता है, बल्कि एक निकाय हमेशा स्थैतिक प्रवृत्ति बनाये रखने का प्रयास करता है।

सामान्यकारी निकाय सिद्धान्त हमेशा यह मानता है कि एक सम्पूर्ण निकाय अपने छोटे-छोटे घटकों के योग से हमेशा ही अधिक होता है तथा अधिक महत्त्वपूर्ण भी। सामान्यकारी निकाय सिद्धान्त का एक महत्त्वपूर्ण कार्य है, सामाजिक कार्यकर्ताओं को सतर्क करना।MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

इसका कारण यह है कि सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु अनेक वैकल्पिक मार्गों पर विचार करें तथा किसी व्यक्ति विशेष में परिवर्तन करने के बजाय वातावरण में परिवर्तन करने को समाज कार्य व्यवसाय का लक्ष्य निश्चित करें।

सामान्यकारी निकाय सिद्धान्त व्यावहारिक कारण, प्रभाव एवं सामाजिक सिद्धान्तों को कोई महत्त्व नहीं देता, क्योंकि विभिन्न प्रकार के कारक विभिन्न निकायों को प्रभावित कर सकते हैं।

पिनकस एवं मिनहन (1973) ने इस सम्बन्ध में अपने विचार प्रस्तुत किये हैं। उनके अनुसार सामान्यकारी निकाय सिद्धान्त एक समेकित पक्ष को प्रदर्शित करने का प्रयास करता है।

इस सन्दर्भ में यह महत्त्वपूर्ण है कि एक सामाजिक कार्यकर्ता हमेशा उन कार्य विधि का चयन करता है जो सर्वाधिक उपयुक्त तथा अनुकूल हो तथा वह किसी भी पक्ष के प्रति पक्षपातपूर्ण न हो।

एक सामाजिक कार्यकर्ता हमेशा सामाजिक संघर्ष तथा सामाजिक नीतियों में शामिल होता है। एक सामाजिक कार्यकर्ता को सामान्यकारी निकाय सिद्धान्त में निपुण होना पड़ता है।

सामान्यकारी निकाय सिद्धान्त, घटनाएँ क्यों घटित होती हैं तथा इनमें पारस्परिक सम्बन्धों को समझाने में असफल सिद्ध हुआ है।MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

भारत में समाज कार्य के अन्तर्गत जो पाठ्यक्रम पढाया जा रहा है, उसमें सभी विषयों का समावेश किया गया है। इसमें उन सभी महत्त्वपूर्ण बातों का उल्लेख किया गया है जो एक विद्यार्थी को विभिन्न परिस्थितियों में, विविध प्रकार की भूमिकाएं निभाने हेतु सक्षम बना सके तथा इस योग्य बना सके कि वह समाज कार्य की समुचित विधि का चयन कर सके तथा उसके प्रबंधन करने योग्य बन सके।

यह सब पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष में पढ़ाया जाता है। पाठ्यक्रम के द्वितीय वर्ष में विषय के चयन की सुविधा दी जाती है, परन्तु इन सबके बावजूद भी एक सामाजिक कार्यकर्ता को कार्य करने में समस्यायें आ सकती हैं। इन्हीं समस्याओं के समाधान हेतु सामान्यकारी समाज कार्य बेहद लाभकारी सिद्ध हुआ है।

चूँकि भारत धर्म, जाति, सांस्कृतिक विविधता, भौगोलिक विविधता की दृष्टि से एक समूह देश है इसलिए यहाँ किसी एक विधि से देश के सभी राज्यों एवं क्षेत्रों में कार्य करना बहुत मुश्किल है इसलिए यह आवश्यक है कि देश में सामान्यकारी फाउण्डेशन की स्थापना की जाये, जो सामाजिक कार्यकर्ता के साथ मिलकर कार्य कर सके।

सामाजिक कार्यन्तिों इस फाउण्डेशन की विशेषज्ञ तकनीकों का उपयोग कर सके। एक सामाजिक कार्यकर्ता सामान्यकारी सिद्धान्तों के आधार पर उन विधियों, कौशलों तथा मूल्यों का समुचित प्रयोग करता है जो परिस्थितियों के अनुसार हों,MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

उसके अनुकूल हो। उदाहरण के लिए विवाह सम्बन्धी परामर्श में एक सामाजिक कार्यकर्ता पति और एनी दोनों को साफ रखकर कभी-कभी अलग रखकर भी जरूरत के अनुसार) कार्य करता है।

इसी प्रकार सामाजिक कार्यकर्ता शोषण की शिकार महिला के साथ चिकित्सकीय परामर्श में उचित कौशल एवं तकनीकों का प्रयोग करता है।

एक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी सामाजिक कार्यकर्ता के लिए एक विधि से दूसरी विधि में जाना बहुत मुश्किल होता है।

एक सामान्यकारी सामाजिक कार्यकर्ता विभिन्न संस्कृतियों के प्रति काफी संवेदनशील होता है, वह विभिनका विकिमाकोशलों तथा तकनीक का प्रयोग करने में पूर्णतया सक्षम होता है।

वह सामाजिक बुराइयों से संघर्ष करने में भी नहीं हिचकता बल्कि इन्हें समाप्त करने का प्रयास करता है। सामान्यकारी समाज कार्य अभ्यास में खुले आम विरोध के तरीकों को स्वीकार नहीं किया गया है।

समाज कार्य के विद्यार्थियों के पास इतना ज्ञान, अनुभव एवं क्षमता होनी चाहिए कि वे किसी भी परिस्थिति में व्यक्तियों के साथ सहजता के साथ कार्य कर सकें। ग्रामीण तथा शहरी परिवेश में कार्य करने के लिए अलग-अलग कौशलों की आवश्यकता पड़ती है। MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

एक सामाजिक कार्यकर्ता को ग्रामीण परिवेश में कार्य करते समय ज्यादा खुलापन नहीं दिखाना चाहिए। हालांकि एक सामाजिक कार्यकर्ता ग्रामीण परिवेश में बेहतरीन कार्य कर सकता है।

सामाजिक कार्यकर्ता को ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सोच को लोगों पर लादने से बचना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता को चाहिए कि वह ग्रामीण लोगों को स्वयं ही अपनी प्राथमिकताएँ तय करने में मदद करे।

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प्रश्न 3. निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों का उत्तर दीजिए

(क) समाज कार्य व्यवसाय में वैयक्तिक कार्य के स्थान की विवेचना कीजिए।

उत्तर समाज कार्य व्यवसाय में वैयक्तिक समाज कार्य का महत्त्वपूर्ण स्थान है। समाज की मूल इकाई व्यक्ति होता है। समाज में यदि एक व्यक्ति अपने जीवन से सन्तुष्ट है, तो वह एक शान्तिपूर्ण समाज बनाने की दिशा में आगे बढ़ता है। जिस प्रकार अन्य प्रकार के व्यवसायों का विकास हुआ है,

उसी प्रकार समाज कार्य व्यवसाय का विकास भी एक संरचना के रूप में हुआ है। इसमें सम्मिलित हैं उसकी विधियाँ तथा उसके उपकरण इत्यादि। समाज की उनति ही समाज कार्य व्यवसाय का प्रमुख उद्देश्य है। जिसके अन्तर्गत समाज की उन्नति के प्रयास शामिल हैं।

समाज कार्य के सिद्धान्तों में कई प्रकार के उद्देश्य जुड़े हैं, जिनमें एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य हैं-आत्म अनुभूति का उद्देश्य, जो समाज कार्य के सिद्धान्तों से जुड़ा है। समाज कार्य के अन्तर्गत वैयक्तिक समाज कार्य का महत्त्वपूर्ण उद्देश्य व्यक्ति की समस्याओं का निराकरण करना है,

जिससे व्यक्ति अपने कर्तव्यों का बेहतर ढंग से पालन कर सके तथा समाज के प्रति अपने दायित्वों को निभा सके। इसके अतिरिक्त वह अपनी योग्यताओं में भी वृद्धि कर सके।

समाज कार्य के अन्तर्गत वैयक्तिक कार्य दोहरे अनुस्थापन की मांग करता है। पहला अनुस्थापन मानव मनोविज्ञान के प्रति तथा दूसरा सांस्कृतिक शक्ति के ज्ञान का अनुस्थापन।

ये दोनों अनुस्थापन बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। सामान्य जन की क्या आवश्यकतायें होती हैं, एक समुदाय की क्या आवश्यकतायें होती हैं MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

तथा एक व्यक्ति की क्या आवश्यकतायें होती हैं इत्यादि के सन्दर्भ में समाज कार्य द्वारा महत्त्वपूर्ण विधियों को चिह्नित किया गया है। इन्हीं आवश्यकताओं पर वैयक्तिक समाज कार्य द्वारा ध्यान दिया जाता है।

सामाजिक नियोजन तथा सामाजिक क्रिया के लिए वैयक्तिक समाज कार्य आधार का काम करता है तथा यह अनिवार्य भी है। मैरी रिचमण्ड कहती हैं कि वैयक्तिक समाज कार्य को मान्यता प्राप्त है।

इसका कारण वे यह बताती हैं कि वैयक्तिक समाज कार्य का सम्बन्ध सामाजिक उन्नति से है। इसलिए यह समाज में मान्यता प्राप्त है। वैयक्तिक कार्य को व्यक्तियों की क्षमताओं में वृद्धि करने वाला बताया गया है।

वैयक्तिक कार्य लोगों पर ध्यान केन्द्रित करता है। कुछ विद्वानों ने वैयक्तिक कार्य की तुलना खुदरा व्यापार से की है। वैयक्तिक कार्यकर्ताओं के ज्ञान का मूल्यांकन करना काफी सरल है।

वैयक्तिक समाज कार्य की परिस्थितियों में एक के बाद एक शैक्षिक प्रक्रिया के सन्धिस्थल पाये जाते हैं। जिस प्रकार व्यक्ति अपने परिवार का अभिन्न अंग होता है उसी प्रकार एक परिवार भी समुदाय का अंग होता है।

वास्तव में वैयक्तिक समाज कार्य किसी बच्चे की देखरेख करने में, मुसीबत में पड़े किसी व्यक्ति की सहायता करने में तथा अपमानित की गयी किसी गृहिणी में रुचि लेने की कोई स्वीकारोक्त नहीं करता,

बल्कि वैयक्तिक यह प्रसारित करने का प्रयास करता है कि प्रतिकृति को परिवर्तित करने के लिए मतभेदों तथा भिन्नताओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

समाज को सम्पूर्णता के आधार पर तथा व्यक्ति के आधार पर देखने में अक्सर अन्तर्विरोध रहता है। इसलिए यह समझना कि एक व्यक्ति सभी प्रकार की सामाजिक समस्याओं का समाधान वैयक्तिक कार्य पद्धति के द्वारा कर सकता है भ्रामक है। MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

इसलिए व्यक्तिगत समस्याओं तथा सामाजिक समस्याओं को हल करने के लिए किसी सर्वमान्य विचारधारा की आवश्यकता होती है

वैयक्तिक कार्यप्रणाली स्वयं को व्यक्तिगत समाधान तथा हल की ओर अग्रसर करती है। सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं के प्रति विभेदक दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है।

वर्तमान में वैयक्तिक कार्यकर्ता ऐसे लोगों का भी उपचार करने का प्रयास करते हैं, जिनकी सामाजिक समस्याओं का उनकी वित्तीय स्थिति से कोई सरोकार नहीं होता

(ग) समाज कल्याण प्रशासन में शामिल विभिन मान्यताओं के बारे में लिखें।

उत्तर समाज कल्याण प्रशासन समाज कार्य का एक अभिन्न अंग है। शासन के एक अंग के रूप में प्रशासन प्राचीनकाल से ही महत्त्वपूर्ण बना हुआ है।

समाज कल्याण प्रशासन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए व्यावसायिक क्षमताओं का प्रयोग सामाजिक प्रक्रिया के रूप में किया जाता है।

इसमें विशेष प्रकार के ज्ञान एवं कौशलों का प्रयोग किया जाता है। समाज कल्याण प्रशासन को समझने के लिए न्याय, समानता एवं ज्ञान के साथ-साथ सभी आवश्यक शासकीय तंत्रों, विधियों, पद्धतियों आदि कि जानकारी भी आवश्यक है।MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

माज कल्याण प्रशासन से जुड़ी अवधारणाएँ निम्नलिखित हैं

(1) सामाजिक संस्थाओं का प्रशासन वह प्रक्रिया है जिसमें मानव एवं वित्तीय संसाधनों को सुरक्षित करते हुए उन्हें समुदाय की सेवाओं के लिए परिवर्तित किया जाता है।

इस प्रक्रिया में कई योगदान करते हैं जैसे परिषदों के व्यक्ति, कार्यकारिणी में शामिल व्यक्ति, कर्मचारी, स्वयंसेवक इत्यादि।

(2) समाज कार्य में प्रशासन का एक प्रमुख हिस्सा अपने लिए उद्यम का निर्धारण करता है। वह कई कार्यों को सम्पन्न करता है, जिनमें लक्ष्य निर्धारण भी शामिल है। MSW 1 Free Assignment In Hindi

प्रशासन अपनी मन्जिल तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारण करता है तथा इसका नियंत्रण इसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।

(3) समाज कार्य में प्रशासन जिन महत्त्वपूर्ण तथ्यों से जुड़ा होता है, वह है सेवाओं के लिए प्रावधान एवं निर्माण। इसके अतिरिक्त इसके अन्तर्गत किसी विशिष्ट संस्था के लिए गतिविधियों को तय करना भी शामिल है।

(4) एक कार्यकारी व्यक्ति कभी भी तटस्थ व्यक्ति नहीं हो सकता। उससे यह अपेक्षा की जाती है कि वह एजेंसी के कार्यों में क्रियात्मक नेतृत्व करें।

(5) किसी कार्यकारी के कार्यों में निम्न का समावेश आवश्यक है उद्यम संचालन का कार्य, नीतियों का निर्धारण, व्यक्तियों के कार्यों पर नियंत्रण रखना, कर्मचारियों को जरूरत के कार्य सौंपना, समुदाय, परिषद् एवं कर्मचारियों को कार्यकारी प्रदान करना।

(6) प्रशासन में कई महत्त्वपूर्ण चीजों को शामिल किया जाता है-परिषद, कर्मचारियों एवं स्वयंसेवकों, जैसे मानव संसाधनों का उपयोग इत्यादि।MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

(7) यह माना जाता है कि उद्यम के विभिन्न अंग अन्तः क्रिया की स्थिति में रहते हैं। इसके अतिरिक्त इस बात को महत्त्व दिया जाता है कि एक संस्था में विभिन्न प्रकार की भूमिकाओं को कार्यकारी ही तय करें, जिससे सभी व्यक्तियों को सम्बन्धों, नियमों एवं शर्तों से इस तरह बांधा जा सके कि उससे अधिक से अधिक अच्छा प्रभाव पड़े तथा बुरा प्रभाव पड़ने की संभावनाएं कम-से-कम हों।

प्रश्न 4. निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों का उत्तर दीजिए

(क) एशियाई देशों में से किसी एक में समाज कार्य के उद्भव पर टिप्पणी कीजिए

उत्तर श्रीलंका श्रीलंका (सिलोन) एक ब्रिटिश उपनिवेश था जो 1948 में स्वतंत्र हुआ। श्रीलंका में 74% सिंहली, 13% श्रीलंकाई तमिल तथा दक्षिण भारतीय तमिल 6% हैं।

श्रीलंका में नवजात जन्मदर 18.9 है। जीवन प्रत्याशा 74 वर्ष तथा साक्षरता दर 9% है। श्रीलंका की प्रतिव्यक्ति आय कम है। श्रीलंका में समाज कार्यों की गति धीमी है।

इसके तीन कारण हैं पहला कारण राजनीतिक दर्शन है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद श्रीलंका को एक कल्याण राज्य घोषित किया गया था, जिसके कारण इसने सार्वभौमिक कल्याण सेवायें देना प्रारंभ किया।

1978 में बाजार आर्थिकी की नीति अपनायी गयी। शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर व्यय को कम नहीं किया गया जिसके कारण समाज कार्य का विकास प्रभावित हुआ।

दूसरा कारण यह है कि श्रीलंका में विभिन्न धार्मिक समूह विद्यमान हैं, जैसे बुद्धिस्ट, हिन्दू तथा मुसलमान। इनके अपने रीति-रिवाज तथा परम्परायें है।MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

इन धर्मों में निर्धन को दान देना तथा उनकी सहायता करना एक सदाचार माना जाता है इसलिए लोग समाज कार्य को एक पृथक् वृत्ति के रूप में समाज में विकसित करने पर अधिक ध्यान नहीं देते। तीसरा कारण समाजमूलक है।

पारिवारिक सदस्यों के दृढ बंधन की प्रवृत्ति के कारण पृथक सामाजिक सेवा कार्यक्रमों को विकसित करने में राज्य बहुत सुस्त था।

श्रीलंका में तीन प्रमुख विभाग समाज सेवा विभाग, ग्रामीण विकास विभाग तथा परिवीक्षा विभाग जनता की समाज कल्याण आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जिम्मेदार हैं

1952 में ‘सिलोन समाज कार्य संस्थान की स्थापना हुई। श्रीलंका में समाज कार्य की यह प्रथम पहल थी। 1964 में सिलोन स्कूल ऑफ सोशल वर्क’ के रूप में इसका पुनर्नामकरण हुआ।

इसने 1978 में समाज कार्य में द्विवर्षीय डिप्लोमा प्रारंभ किया। एक अधिनियम द्वारा यह ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल डेवलपमेंट’ के रूप में स्थापित हुआ। MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

अब संस्थान समाज कार्य में स्नातक उपाधि, डिप्लोमा पाठ्यक्रम तथा प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम संचालित करता है।

(ख) ‘स्वैछिक क्रिया की पाँच विशेषताएं क्या है?

उत्तर ऐच्छिक कार्य शोषितों के प्रति प्रेम तथा प्रतिबद्धता मनुष्य को चित लोगों की सहायता करने की अपेक्षा करता है। इसके अतिरिक्त लोगों के प्रेम, स्वावलम्बन, आदर, पहचान तथा आध्यात्मिक विकास की भी आवश्यकता है।

स्वार्थ त्यागकर मानव की सेवा करना एक समर्पण है। अक्सर ये कार्य मोक्ष की प्राप्ति के लिए किये जाते हैं। न कि किसी प्रकार के लाभ के लिए ऐच्छिक कार्य अपनी इच्छा से किये जाते हैं। दूसरे शब्दों में यह चित एवं गरीब लोगों की सहायता एवं सेवा है।

ऐच्छिक कार्य के कुछ लक्षण इस प्रकार हैं सभी संभव तरीकों से लोगों की सहायता करना, बिना स्वार्थ के सेवा करना, लोगों की सहायता की वास्तविक इच्छा, मानवता की सेवा में अटूट विश्वास तथा कर्त्तव्य को प्राथमिकता देना।

वर्तमान समय में व्यक्तिवाद तथा स्वार्थपरता बढ़ती जा रही है। जिसने ऐच्छिक कार्यों पर विपरीत प्रभाव डाला है परन्तु फिर भी लोग दूसरों की सेवा कर रहे हैं।MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

ऐसे में ऐच्छिक कार्य को पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता है। ऐच्छिक कार्यों को बढ़ाने के कुछ स्रोत होते हैं, जैसे नैतिक-धार्मिक उपदेश, लोकहित के कुछ श्रेष्ठ उदाहरण, कोई ऐसी घटना जिससे नाशवान संसार का अहसास हो, त्याग के उदाहरण तथा अनमोल वचन लोगों को भलाई के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

(ग) समाज कार्य अनुसंधान करते समय नैतिक सुरक्षा उपाय क्या हैं जिनका विचार करने की आवश्यकता है?

उत्तर आचार एवं सामाजिक शोध कार्य सामाजिक कार्य की अन्य विधियों की भाँति शोध आचारों की भी आवश्यकता होती है।

शोधकर्ताओं का इस बात पर विशेष ध्यान रहा है कि आचार संहिता से सम्बन्धित सभी पहलुओं का ध्यान रखा जाये।

इस दिशा में पहला प्रयास ‘ह्यूमन सब्जेक्ट्स ऑफ बायोमिडिकल एवं बिहेवियरल रिसर्च’ 1979 द्वारा हुआ। यह आचार सम्बन्धी सिद्धान्तों पर आधारित था। इस सम्बन्ध मे जो आचार बिन्दुओं पर विचारण किया गया, वे इस प्रकार हैं

(अ) विश्वसनीयता शोधकर्ता का यह कर्तव्य होता है कि वह शोध भागीदारों के नाम को सार्वजनिक न करे। कभी-कभी शोध अध्येता नाम बदलकर अपनी पहचान छिपा भी लेते हैं।

(ब) ज्ञात सहमति शोध प्रारंभ करने से पहले सभी भागीदारों की सहमति आवश्यक है। सहमति में निम्न बातें होनी चाहिए शोध का उद्देश्य, शोधकर्ता की योजनायें, शोध अध्येता की अपेक्षायें, विश्वसनीयता का वचन, अध्ययन से सम्बन्धित लाभ इत्यादि।MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

(स) शोध के प्रभाव का नियोजन शोधकर्ता का पहला दायित्व प्रतिपक्षी की सुरक्षा का रहता है। ये दायित्व कई तरह के होते हैं।

(द) शोध के निर्णय में भागीदारी प्रतिभागियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु शोधकर्ता को सहभागिता दी जानी चाहिए। कुछ शोधकर्ता अध्ययन की रूपरेखा के समय ही प्रतिभागी की भूमिका निश्चित कर लेते हैं।

(इ) शोधकर्ताओं का चुनाव अध्ययन की रिपोर्ट एक महत्त्वपूर्ण पहलू है। गलत जानकारियों के प्रस्तुतीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। सामान्य तौर पर ऐसा तब होता है जब किसी बाहरी शोधकर्ता की सेवायें ली जाती हैं।

भविष्य के दिशा निर्देश सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में शोध होते रहे हैं, परन्तु शोध विधियों का प्रयोग नहीं हुआ है। रामचन्द्रन ने भारत में नौ समस्याओं को बताया है, जो शोध कार्यों के दौरान आती हैं

(1) धन का अभाव
(2) शोध सुविधाओं काअ भाव

(3) शोधकर्ताओं की कमी
(4) अध्यापकों पर शिक्षण का अधिक भार

(6) शोध ट्रेनिंग की कमी
(7) शोध उपयोगिता में बाधाए

(8) शोध की योजना में आवश्यक चीजों का अभाव
(9) शोध में लगे युवा।

पिछले दो दशकों में सामाजिक कार्य एवं उसका दस्तावेजीकरण अधिक मात्रा में हुआ है। शोध स्तर को बनाये रखने के लिए सख्ती से नियमों का पालन किया गया है। MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

ज्यादातर संस्थाओं में शोध विधियाँ स्नातक व स्नात्कोत्तर स्तर पर सिखाई जा रही हैं। शोध वर्तमान में एक व्यवसाय का रूप ले चुका है।

शोध व्यावहारिक कार्य में सहायता करता है। इससे स्वदेशी साहित्य का सृजन होता है। सामाजिक कार्य के लिए शोध निरन्तर होते रहने चाहिए।

(छ) अपने शब्दों में समझाएं कि आपके लिए सामाजिक कार्य का क्या अर्थ है।

उत्तर समाज कार्य की अवधारणा महत्त्वपूर्ण है। वर्तमान में समाज कार्य को एक नया व्यवसाय माना गया है क्योंकि इसके परिणाम कम ही दृष्टिगत होते हैं।

वर्तमान में समाज कार्य व्यवसाय के कार्य अदृष्टिगत पक्ष पर ही ज्यादातर किये जाते हैं। समाज कार्य की अवधारणा को सभी देशों में समान रूप से महत्त्व मिलने लगा है।

पिछले कुछ समय से समाज कार्य व्यवसाय में प्रयोग की जाने वाली शब्दावली काफी भ्रामक है, परन्तु समाज कार्य के अन्तर्गत कुछ महत्त्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं, जो काफी महत्त्वपूर्ण हैं। समाज कार्य सामाजिक व्यवस्था में परिवर्तन को दर्शाता है।MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

प्रस्तुत अध्याय समाज कार्य की अवधारणा पर प्रकाश डालता है।

धर्मार्थ दान, ऐच्छिक क्रिया व श्रमदान, सामाजिक आन्दोलन एवं सामाजिक सुधार, सामाजिक ताना-बाना, सामाजिक सेवा, सामाजिक सुरक्षा तथा सामाजिक कल्याण जैसे पहलुओं का विश्लेषण किया गया है।

इसके अतिरिक्त सामाजिक नीति, सामाजिक न्याय, समाज कार्य तथा सामाजिक क्रिया जैसे पहलुओं पर भी विचार करने की कोशिश की गयी है।

समाज कार्य के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं

(1) विशेषज्ञतापूर्ण कार्य समाज कार्य का एक महत्त्वपूर्ण लक्षण यह है कि यह एक विशेषज्ञतापूर्ण कार्य है। समाज कार्यों को करने के लिए प्रशिक्षित एवं विशेषज्ञ कार्यकर्ताओं की आवश्यकता पड़ती है।

(2) कार्य प्रशिक्षित लोगों द्वारा समाज कार्य का एक लक्षण यह है कि यह प्रशिक्षित लोगों द्वारा किया जाता है, जिन्हें समाज कार्यों में दक्षता प्राप्त हो।

(3) विशेषज्ञता से परिपूर्ण समाज कार्य का एक महत्त्वपूर्ण लक्षण यह है कि समाज कार्य की शिक्षा व ज्ञान तकनीकी कौशल की विशेषज्ञता से पूर्ण होता है।MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

(4) लोकतान्त्रिक मूल्यों पर आधारित-समाज कार्य लोकतान्त्रिक तथा मानवीय मूल्यों पर आधारित होता है। यह समाज कार्य का एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण लक्षण है।

(5) मूल कारणों पर निर्भर समाज कार्य योजना समस्याओं की प्रकृति व उसके मूल कारणों पर निर्भर करती है।

(6) मानवीय तथा सामाजिक विकास-समाज कार्य का एक लक्षण यह है कि इसमें मानवीय तथा सामाजिक विकास पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है। इसके अतिरिक्त समाज कार्यों में सामाजिक दायित्वों का अनुपालन भी किया जाता है।

(7) भुगतान स्वीकार करना-समाज कार्य का एक प्रमुख लक्षण यह है कि इसके कार्यकर्ता भुगतान स्वीकार करते हैं, परन्तु विभिन्न परोपकारी कार्यों में वे बिना किसी भुगतान के कार्य करते हैं।

(8) कार्य लोगों की भलाई के लिए समाज कार्य में लोगों की भलाई के लिए कार्य किया जाता है।

प्रश्न 5. निम्नलिखित में से किन्हीं पांच पर संक्षिप्त टिप्पणियां (लगभग 100 शब्दों में) लिखिए

(क) NASW आचार संहिता के कोई तीन उद्देश्य MSW 1 Free Assignment In Hindi

उत्तर NASW की नीति विषयक संहिता के उद्देश्य निम्नलिखित हैं

(1) मूल गुणों को सत्यापित करना NASW की नीति विषयक संहिता का एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य मूल गुणों को सत्यापित करा है। इन्हीं मूल गुणों पर सामाजिक कार्य का लक्ष्य आधारित होता है।

(2) नैतिक सिद्धान्तों को संक्षिप्त रूप से प्रस्तुत करना NASW की नीति संहिता का एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य नैतिक सिद्धान्तों को संक्षिप्त रूप से प्रस्तुत करना है।

ये नैतिक सिद्धान्त व्यवसाय के मूल गुणों को प्रतिवेदित करते हैं। इन नैतिक सिद्धान्तों का प्रयोग समाज कार्य के दिशा निर्देशन में किया जाता है।

(3) कार्यकर्ताओं की जरूरतों को समझना NASW की नीति विषयक संहिता का एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य सामाजिक कार्यकर्ताओं की जरूरतों को समझना है।

नैतिक संहिता का निर्धारण इस प्रकार किया गया है कि यदि कर्त्तव्य के निर्वहन में विरोधाभास उत्पन हो जाए तो नैतिक संहिता उसका समाधान करे।

(4) नैतिक मानदण्ड प्रस्तुत करना NASW की नीति विषयक संहिता का उद्देश्य ऐसे मानदण्ड प्रस्तुत करना है, जिससे साधारण लोग भी समाज कार्यों के व्यवसाय के उत्तरदायित्व का भार वहन करने में सक्षम हो सकें तथा उस पर नियंत्रण भी रख सकें।MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

(5) व्यवसायियों को जागरूक करना NASW की नीति विषयक संहिता का एक उद्देश्य है, नये व्यवसायियों को समाज कार्य के सन्दर्भ में जागरूक करना।

नये व्यवसायी समाज कार्य के लक्ष्य, महत्त्व तथा उपयोगिता के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त कर सकें। इसके लिए उन्हें NASW जागरूक करता

(6) मानदण्डों के बारे में स्पष्ट बतलाना NASW की नीति विषयक संहिता मानदण्डों के बारे में स्पष्ट रूप से बतलाती है, ताकि समाज कार्य व्यवसायी स्वयं इनका मूल्यांकन कर सकें तथा यह जानकारी भी प्राप्त कर सकें कि सामाजिक कार्यकर्ता अनैतिक कार्यों से जुड़ा है अथवा नहीं।

(ग) निगमनात्मक अनुसंधान

उत्तर निगमनात्मक शोध यह भी शोध की एक अन्य विधि है, जो काफी महत्त्वपूर्ण है। निगमनात्मक शोध में किसी पूर्व निर्धारित सिद्धान्त के आधार पर नये विचार को अवधारित किया जाता है।

आंकड़ों को एकत्र करने के पश्चात् उनका विश्लेषण किया जाता है। आंकड़ों का विश्लेषण करने के पश्चात् यह देखा जाता है कि डाटा विषय के अनुकूल है, या नहीं। MSW 1 Free Assignment In Hindi

यदि डाटा विषय के अनुकूल होते हैं तो शोध की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी होती है, जबकि डाटा के विषय के अनुकूल नहीं होने के कारण शोध की सफलता बाधित होती है।

निगमनात्मक शोध एक विस्तृत अध्ययन की विधि है। इसकी पहुँच समाज के सभी वर्गों तक होती है। निगमनात्मक विधि में निष्कर्षों का छोटे समूहों से बड़े समूह में सामान्यीकरण किया जाता है,

परन्तु इन निष्कर्षों को निकालने में अत्यन्त सावधानी की आवश्यकता होती है।

(ङ) वैयक्तिक कार्य का महत्व

उत्तर वैयक्तिक समाज कार्य का महत्त्व निम्नलिखित शीर्षकों द्वारा स्पष्ट किया गया है

(1) व्यक्ति की समस्या का निराकरण वैयक्तिक समाज कार्य का महत्त्व इस तथ्य में निहित है कि वह व्यक्ति की समस्या का निराकरण करता है।MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

व्यक्ति के सामने कई प्रकार की समस्यायें होती हैं, जैसे निर्धनता, बेरोजगारी इत्यादि। वैयक्तिक कार्य इन समस्याओं के समाधान के लिए सहायता प्रदान करता है।

(2) सुधार करने का प्रयास वैयक्तिक समाज कार्य पद्धति का महत्त्व इसलिए भी है कि यह सुधार करने के प्रयास पर अपना ध्यान केन्द्रित करती

(3) सामाजिक भूमिकाओं को समर्थ बनाना वैयक्तिक समाज कार्य सामाजिक भूमिकाओं को समर्थ बनाता है।

(4) व्यक्तित्व का विकास वैयक्तिक समाज कार्य पद्धति व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास सामाजिक परिवेश द्वारा करती है।

(5) सहायता प्रदान करना वैयक्तिक समाज कार्य का महत्त्व इसलिए भी है कि यह लोगों को सहायता प्रदान करता है। निर्धन, उपेक्षित तथा निराश्रित व्यक्तियों को सहायता प्रदान करना ही वैयक्तिक समाज कार्य का महत्त्वपूर्ण उद्देश्य है।

(6) कार्य-कौशल सम्बन्धों को बढ़ाना वैयक्तिक समाज कार्य कार्य कौशल सम्बन्धों को बढ़ाने का प्रयास करता है। ..MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

(7) सामाजिक समानता को बढ़ावा देना वैयक्तिक समाज कार्य का महत्त्व इसलिए भी है कि यह सामाजिक समानता को बढ़ावा देता है तथा भेदभावों को कम करता है।

(8) पर्यावरणीय विषयों पर भी सहायता वैयक्तिक स जि कार्य का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि यह वैयक्तिक के साथ-साथ बाहरी तथा पर्यावरणीय विषयों पर भी सहायता करता है।

(9) व्यक्ति तथा समाज के बीच सम्बन्ध स्थापित करना वैयक्तिक समाज कार्य व्यक्ति तथा समाज के बीच महत्त्वपूर्ण सम्बन्ध स्थापित करने मं सहायक है।

(छ) समूह कार्य के लाभों की सूची बनाएं

उत्तर समूह कार्य के लाभ निम्नलिखित हैं

(1) व्यक्तियों के मध्य परस्पर मेलजोल को बढ़ावा देना समूह कार्य से व्यक्तियों के बीच परस्पर मेलजोल को बढ़ावा मिलता है। समूह के सदस्य एक-दूसरे को सहयोग देते हुए कार्य सम्पन्न करते हैं, जिससे उनके बीच संवाद को भी बढ़ावा मिलता है।

(2) अनुभव एवं ज्ञान का लाभ समूह कार्य का एक लाभ यह है कि जब व्यक्ति समूह में कार्य करता है तो व्यक्तियों के बीच परस्पर मेलजोल तथा सहायता के कारण एक सदस्य के ज्ञान एवं अनुभव से दूसरे व्यक्ति को लाभ होता है, MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

क्योंकि जब व्यक्ति मिलकर कार्य करते हैं तो उनके बीच ज्ञान एवं जानकारी का आदान-प्रदान होता है, जिससे सदस्य को लाभ होता है।

(3) विभिन गुणों को सीखना समूह कार्य के द्वारा व्यक्ति कई महत्त्वपूर्ण गुणों को सीखता है, जैसे विचारों का आदान-प्रदान करना, विभिन्न प्रकार की समस्याओं का समाधान सहयोग से करना, नेतृत्व करना तथा एक दूसरे के विचारों का सम्मान करना इत्यादि।MSW 1 Free Assignment In Hindi

(4) परिवर्तनों को लाना समूह कार्य के अन्तर्गत समूह के सदस्यों का ज्ञान कई महत्त्वपूर्ण परिवर्तनों को सामने लाता है। समूह के सदस्य इन परिवर्तनों का प्रयोग समूह के बाहर भी कर सकते हैं।

(5) सामूहिक कार्यवाही को प्रवर्तित करना समूह कार्य के द्वारा सामूहिक कार्यवाही को प्रवर्तित किया जाता है। समूह कार्य ऐसा स्थान है जहाँ पर व्यक्ति योजना बनाना सीखता है तथा सामूहिक कार्यवाही की पहल करता है।

(6) समस्याओं का समाधान जब हम समूह में कार्य करते हैं तो हम एक-दूसरे की समस्याओं को ज्यादा बेहतर तरीके से समझ सकते हैं तथा उसे दूर करने का भी प्रयास कर सकते हैं।

(7) सामाजिक परिवर्तन लाना आमतौर पर एक अकेले व्यक्ति की बजाय एक समूह अधिक सामाजिक परिवर्तनों को ला सकता है तथा समाज कार्यों में भी महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

(8) विभिन भूमिकाओं के लिए तैयार करना समूह लोगों को विभिन्न भूमिकाओं के लिए तैयार करते हैं ताकि सदस्य समाज में अपनी भूमिका को बेहतर ढंग से निभा सके।

(9) सुरक्षा प्रदान करना समूह कार्य लोगों को सुरक्षा प्रदान करता है। जब व्यक्ति समूह में कार्य करता है, तो समूह के सदस्यों से उसका परस्पर मेलजोल बढ़ता है।MSW 1 Free Assignment In Hindi

इस मेलजोल के कारण सदस्यों में विचारों का आदान-प्रदान होता है। सदस्यों की समस्याएँ साझी बन जाती है। व्यक्ति अपने आपको सुरक्षित महसूस करता है।

वह यह सोचकर कम डर का अनुभव करता है कि मेरे जैसी और सदस्यों की भी समस्यायें हैं, जिन्हें मिलजुलकर हल किया जा सकता है।MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

(10) अकेलेपन पर काबू पाने के लिए समूह में कार्य करने का एक लाभ यह है कि व्यक्ति समाज में अलग-थलग पड़ने तथा अकेलेपन का शिकार होने से बच जाता है।

(ज) समाज कार्य अनुसंधान

उत्तर किसी विषय की विशेष तथा सम्पूर्ण जानकारी को शोध कहते हैं। शोध में किसी विषय की सम्पूर्ण जाँच-पड़ताल शामिल है, MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

जिससे विषय अधिक से अधिक स्पष्ट हो सके तथा उसके लाभ-हानि, शक्ति-कमजोरी इत्यादि का पता लग सके। एक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि सामाजिक शोध निश्चित सिद्धान्तों तथा मूल्यों पर आधारित होता है।

इसके अतिरिक्त शोध का उद्देश्य नये सिद्धान्तों की खोज करना है। वास्तव में जिस प्रक्रिया द्वारा हमें विषय की सम्पूर्ण जानकारी प्राक हो उसे शोध कहते ।। शो के मूल्य व सिद्धान्त निम्नलिखित

(1) शोध ऐसी चीज की खोज करता है, जो सही हो तथा जिसका अस्तित्व हो अर्थात् वह पृथ्वी पर विद्यमान होनी चाहिए।

(2) शोध में एक विशिष्ट प्रक्रिया का पालन किया जाता है, जिसमें अनेक चीजें सम्मिलित होती हैं, जैसे सत्यता, निष्पक्षता तथा लोगों का हित इत्यादि।

(3) चूँकि शोध सार्वभौमिक प्रकृति का होता है, इसलिए वह किसी एक व्यक्ति के बजाय सम्पूर्ण समाज से सम्बन्धित होता है। MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

परन्तु इस सन्दर्भ में ध्यान देने योग्य बात यह है कि कभी-कभी शोध का सम्बन्ध समाज के छोटे भाग से भी हो सकता है। शोध का लक्ष्य एक व्यक्ति भी हो सकता है, एक समूह भी हो सकता है तथा एक समुदाय भी हो सकता है।

(4) शोध का स्वरूप इस प्रकार का होना चाहिए कि उसमें सबका हित सम्मिलित हो अर्थात शोध सार्वजनिक हित में होना चाहिए।MSW 1 Solved Hindi Assignment 2022

(5) शोध में पक्षपात को अल्पतम करने की विधि का प्रयोग किया जाना चाहिए।

(6) शोध के पश्चात जो रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है, उससे सही निष्कर्ष निकालना चाहिए।

(7) शोध के लिए ऐसी प्रक्रिया का प्रयोग करना चाहिए जो परिस्थितियों के अनुसार हो तथा लचीली हो। इसके अतिरिक्त प्रक्रिया क्रमानुसार भी होनी चाहिए।

(8) शोध में वैज्ञानिक विधि के सिद्धान्तों का परिपालन होना चाहिए।

MSW 1 SOLVED ASSIGNMENT 2022

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