IGNOU MSO 03 Free Assignment In Hindi 2021-22- Helpfirst

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MSO 03 Free Assignment In Hindi

MSO 03 Free Assignment In Hindi july 2021 & jan 2022

प्रश्न 2. आधुनिकीकरण के ऐतिहासिक अवस्था परिप्रेक्ष्य का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।

उत्तर-(ख) ऐतिहासिक अवस्था का परिप्रेक्ष्य – विकास और अल्पविकास के मध्य अन्तर को ज्ञात करने के साथ-साथ यह परिप्रेक्ष्य के मध्य की अवस्थाओं और उनके लक्षणों को सुनिश्चित करता है। यह परिप्रेक्ष्य मुख्य रूप से रोस्टो और 1960 मे उसके द्वारा विकसित आर्थिक प्रतिरूप से सम्बद्ध है।

वाल्ट रोस्टो नामक आर्थिक इतिहासकार ने अमरीकी सरकार के सलाहकार के रूप में अपनी सेवायें दी। उनकी पुस्तक ‘द स्टेजिस ऑफ इकोनोमिक ग्रोथः ए नॉन कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो’ (1960) की प्रकृति पूर्व पूँजीवादी तथा नव विकासवादी थी।

इस प्रकार के लिखने के लिये पूर्ववर्ती विकासवादी सिद्धान्त के इस विचार से प्रेरणा प्राप्त हुई थी कि परिवर्तन और विकास क्रमिक घटनाओं में एक समुच्चय के अनुसार होते हैं।

रोस्टो के प्रमुख विचार निम्न प्रकार हैं

(i) परिवर्तन की प्रक्रियाएँ साधारण एवं स्वपोषित होती हैं।
(ii) आर्थिक वृद्धि (विकास) को निम्नलिखित विकास प्रतिरूप की पाँच अवस्थाओं के अनुपालन से प्राप्त किया जा सकता है।
(iii) समस्त समाजों को पाँच श्रेणियों में से किसी एक अथवा आर्थिक विकास की अवस्थाओं में से किसी एक में रखा जा सकता है।

  1. प्रथम अवस्था-परम्परागत समाज – इस समाज में विज्ञान और तकनीक तक पहुँच | नहीं होती। परिणामतः स्थिति निम्न प्रकार की होती है MSO 03 Free Assignment In Hindi

(i) उत्पादन सीमित होता है। (ii) मूल्य प्रायः घातक होते हैं। (ii) राजनीतिक शक्ति केन्द्रित नहीं होती। (iv) अधिकांश लोग कृषि में लगे होते हैं। (v) उत्पादन कम होता है। (vi) समाज में सामाजिक संगठनों में परिवार और वंश समूहीकरण पर बल दिया जाता है।

(2) द्वितीय अवस्था-प्रारम्भ की पूर्व शर्ते – विकास की दूसरी अवस्था संक्रमण की अवस्था है। वस्तुतः पारम्परिक समाज प्रत्यक्षतः ही औद्योगिकीकरण की प्रक्रिया की ओर नहीं चला जाता। इससे पूर्व कुछ निश्चित प्रारम्भिक क्रियाएँ पूरी की जाती हैं। इस अवस्था की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं

(i) आर्थिक उन्नति के समर्थन में विचारों की प्रचुरता होती है।

(ii) शिक्षा और उद्यम के नये स्तर तथा पूँजी लगाने वाली संस्थाएँ जैसे बैंक इत्यादि अपरिहार्य होती हैं।

(iii) निवेश बढ़ता है। विशेष रूप से परिवहन, संचार तथा कच्चे माल में निवेश बढ़ जाता है। यह वाणिज्यिक विस्तार की ओर ले जाता है।

(iv) तथापि रोस्टो के अनुसार परम्परागत सामाजिक ढाँचा और उत्पादन की तकनीक में परिवर्तन नहीं आता। इस अवस्था में दो प्रकार का समाज दृष्टिगोचर होता है। तृतीय अवस्थाः प्रारम्भ -इस अवस्था में अन्ततः परानी और पारम्परिक व्यवस्था तथा प्रतिरोध पर |

नियंत्रण स्थापित कर लिया जाता है :

(i) आर्थिक विकास को प्रारम्भ करने वाली शक्तियाँ फैलती हैं।

(ii) समाज में प्रमुखता प्राप्त कर लेती है।

(iii) कृषि का व्यापारीकरण होता है।

(iv) उत्पादन में वृद्धि होती है। कारण यह है कि विस्तार पाते हुए शहरी केन्द्रों से उत्पन्न होने वाली माँग की आपूर्ति हेतु यह आवश्यक हो जाता है।

(v) नवीन आर्थिक समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले नवीन राजनीतिक दल औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नवीन ऊँचाइयों पर ले जाते हैं। MSO 03 Free Assignment In Hindi

(vi) वस्तुतः प्रौद्योगिकी ही ब्रिटेन, कनाडा और संयुक्त राज्य अमरीका में प्रारम्भ के लिए आवश्यक प्रोत्साहन था।

भिन्न-भिन्न देशों में यह अवस्था भिन्न-भिन्न समय पर आई। उदाहरणार्थ,

(a) ब्रिटेन में प्रारम्भ का काल 1783 के बाद प्रारम्भ हुआ था।
(b) फ्रांस और अमरीका में 1840 के लगभग प्रारम्भ हुआ था।

(c) रूस में 1890 के लगभग प्रारम्भ हुआ था।
(d) भारत और चीन आदि देशों में 1950 में यह काल प्रारम्भ हुआ था।

चौथी अवस्था-परिपक्वता की ओर – इस अवस्था की प्रमुख विशेषतायें निम्न प्रकार हैं

(i) विकासशील अर्थव्यवस्था आधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनी सभी आर्थिक गतिविधियों में विस्तृत करने का प्रयास करती है।
(ii) सकल घरेलू उत्पाद के 10 प्रतिशत से 20 प्रतिशत के मध्य का निवेश किया जाता है।

(iii) अर्थव्यवस्था विश्व की व्यवस्था में अपना स्थान बनाती है।
(iv) प्रौद्योगिकी अधिक जटिल और परिष्कृत हो जाती है।

(v) प्रौद्योगिकी भारी उद्योग से भिन्न दिशा पकड़ती है।
(vi) उत्पादन सामाजिक आवश्यकता के परिणामस्वरूप नहीं होता।

(vii) उत्पादन प्रतिद्वन्द्वी पूँजीवादी बाजार में बने रहने हेतु लाभ अर्जित करने हेतु होता है।

पांचवी अवस्था-अधिक खपत – यह अन्तिम अवस्था है। इस अवस्था की प्रमुख विशेषतायें निम्न प्रकार हैं

(i) बड़े आर्थिक क्षेत्र टिकाऊ उपभोक्ता सामान और सेवाओं में विशेषज्ञता प्राप्त कर लेते हैं।
(ii) आर्थिक विकास यह सुनिश्चित करता है कि मूल आवश्यकताएँ पूरी हो रही हैं।

(iii) लोक कल्याण तथा सामाजिक सुरक्षा हेतु अधिक संसाधन आवंटित किये जाते हैं।
(iv) कल्याणकारी राज्य का उदय होता है। MSO 03 Free Assignment In Hindi

(v) टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं का बड़ी संख्या में प्रयास किया जाता है।

रोस्टो ने अपने सिद्धान्त और विचारधारा को गतिशील माना है। उसके अनुसार यह आर्थिक तत्त्वों से ही सम्बन्धित न रहकर सामाजिक निर्णयों और सरकारी फैसलों से भी सम्बन्धित थी।

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प्रश्न 4. विकास के उदारवादी परिप्रेक्ष्य का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।

उत्तर-विचारधारा के रूप में उदारवाद – उदारवाद ने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास के लिए एक विशेष परिप्रेक्ष्य प्रदान किया है। इसने एक ऐसी विचारधारा प्रस्तुत की है,

जिसने इतिहास को स्वरूप प्रदान किया है और वर्तमान में मानव के भविष्य को प्रभावित करने के लिए नव-उदारवाद को जन्म दिया।MSO 03 Free Assignment In Hindi

उदारवाद दो शताब्दियों से समाजवादी आदर्श का विरोध कर रहा है। यह हमें समाज, स्वतन्त्रता और आर्थिक उद्यमिता के | क्षेत्र में स्वतंत्र प्रतियोगिता, उत्पादन को नियन्त्रित करने एवं स्वतंत्र नागरिकता को बढ़ावा देने में राज्य की भूमिका के बारे में विशेष दृष्टि प्रदान करता है।

एक राजनीतिक विचारधारा के रूप में उदारवाद ने राजनीतिक निरंकुशता के किसी भी रूप का विरोध किया है, चाहे वह राजतंत्र हो, सैन्यवाद हो या साम्यवाद हो।

उदारवादी विचारधारा की शाखाएँ -आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों में विचारों की उदारवादी शाखा अखंडित नहीं है,

बल्कि इसमें उदारवादी विचारों की भिन्न-भिन्न शाखाएं हैं, जिनमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता बनाम राज्य का उदारवाद को प्रभावित करने वाले प्रमुख सिद्धान्त – उदारवाद विभिन्न सिद्धान्तों का संगम रहा है, जिसमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता और बुनियादी अधिकारों की रक्षा; प्रतिनिधि सरकार; शक्ति पृथक्करण, राज्य की सीमिति भूमिका, तार्किक व्यक्तिवाद और पूँजीवादी बाजार अर्थव्यवस्था शामिल हैं।

कुछ उदारवादी आर्थिक स्वतंत्रता पर अधिक जोर देते हैं और नैतिक जीवन में सरकार के अत्यधिक हस्तक्षेप को स्वीकार करते हैं। कुछ विद्वान जीवन के विभिन्न कार्यों के राज्य के न्यूनतम हस्तक्षेप की विचारधारा में विश्वास रखते हैं।

नोजिक राज्य की भूमिका को केवल नागरिकों की ‘संरक्षक एजेंसी’ तक सीमित करने के पक्ष में थे। हेक (1944, 1982) का मानना था कि सरकार की भूमिका व्यवस्था बनाए रखने और ऐसी जन-सुविधाएँ/सेवाएँ उपलब्ध कराना है, जिसमें शुरू में अधिक पूँजी-निवेश की आवश्यकता हो।

प्रायः उदारवादी मान्यताएँ समाजवाद और संरक्षणवाद की मान्यताओं से मेल नहीं खाती हैं। टॉम पेनी (Tom Paine) का चरम उदारवाद, अर्थव्यवस्था में सरकार के न्यूनतम हस्तक्षेप की विचारधारा पर आधारित था।

उदारवाद, पूँजीवादी विश्व की प्रगति से सम्बद्ध रहा है। इसके समर्थक आर्थिक प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए व्यक्ति की क्षमता को प्रतिबन्ध से मुक्त रखने के पक्षधर हैं।

उदारवादी राज्य का क्रम-विकास – उन्नीसवीं शताब्दी में इग्लैंड में वाणिज्यिक हितों ने राज्य की शक्तियों को सीमित करने और ऐसे प्रतिमान स्थापित करने का प्रयास किया, जिसमें व्यावसायिक गतिविधियाँ अबाध्य रहें।

उदारवादी राज्य इस अवस्था में अहस्तक्षेप राज्य नहीं था, बल्कि ऐसा राज्य था, जिसमें व्यक्तिगत रूप से सम्पत्ति एकत्र करने के लिए परिस्थितियों का सृजन करने और उन्हें बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप की आवश्यकता थी।

पूँजीवाद के विस्तार ने राज्य की आर्थिक गतिविधियों से सम्बन्धित पहले से चली आ रही वाणिज्यवादी संकल्पना और व्यापार पर राजनीतिक नियंत्रण को कम करने का प्रयास किया।

इसके स्थान पर आर्थिक मामलों पर जनता के कार्यों में मुख्यतः कानूनी, वित्तीय, और मौद्रिक कामों के साथ-साथ, पूँजी और श्रम बाजार द्वारा निर्मित आवंटन-कार्यनीति के स्वायत्त स्वनिगमित संचालन के लिए वित्तीय ढांचागत कार्य शामिल थे। MSO 03 Free Assignment In Hindi

इस प्रकार उदारवादी राज्य ने अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन दोनों में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की। उन्नीसवीं शताब्दी के दौरान औपचारिक उदारवादी अधिकारों के विस्तार ने गहरी होती सामाजिक असमानताओं के सहयोजन के साथ समानता के प्रश्न पर चर्चा को अधिक बल दिया।

सामाजिक असमानता का समाधान – उदारवादी विचारक यह स्वीकार नहीं करते थे कि असमानता समाज में अंतर्निहित होती है बल्कि वे इसे समाज द्वारा निर्मित मानते थे।

व्यक्ति स्वतन्त्र और समान रूप से जन्म लेता है, इसलिए राज्य को उनकी सहमति से चलाया जाना चाहिये जिनके अधिकार से राज्य बनता है। उदारवादी समाजवादी समानतावाद के प्रति अरुचि रखते हैं।

ल्याणकारी राज्य – उदारवादी अर्थव्यवस्था में राज्य की भूमिका ने अंग्रेजी अर्थशास्त्री जॉन मेनार्ड केन्स की प्रभावी रचनाओं के बाद नया रूप ग्रहण किया। केन्स ने तर्क दिया कि समाज इस व्यापक मांग और राज्य के सक्रिय हस्तक्षेप से पूर्ण रोजगार की अवस्था को प्राप्त कर सकता है।

केन्सवादी अर्थव्यवस्था ने राज्य को मांग का प्रबन्ध करने और बड़े पैमाने पर उपयोग सुनिश्चित करने का महत्त्वपूर्ण कार्य सौंपा। इस ‘नई संकल्पना’ को नये कल्याणकारी राज्यों ने व्यवहार में अपनाया।

नव उदारवाद का उद्गम – प्रतिष्ठित नव-उदारवादी, उदारवादी थे और व्यक्ति के ऐसे अधिकारों के प्रबल समर्थक थे जो कभी-कभी कठोर राज्य का विरोध करते थे। इसके प्रमुख संरक्षकों में मिल्टन, फ्रायडमैन, फ्रेडरिक हायक और रॉबर्ट नोजिक शामिल हैं।MSO 03 Free Assignment In Hindi

समाजविज्ञानी विकास के नव-उदारवादी चरण के प्रतिकूल प्रभावों के प्रति चिंतित हैं। कैसेल का तर्क है कि पूँजीवादी वृद्धि के नये युग में ध्यान औद्योगिकीकरण से सूचना और ज्ञान के नेटवर्क की तरफ चला जाएगा।

नव-उदारवादी विकास की समालोचना को आगे बढ़ाते हुए किचिंग ने कहा कि “विकास एक डरावनी प्रक्रिया है।” कोबेन और शेंटन के लिए विकास का अर्थ है “प्रगति की अव्यवस्थित कमियों में सुधार करना।” __

दारवादी संदर्भ की समालोचना – उदारवादी उपागम ने श्रम-नियंत्रण की व्यापक व्यवस्था की, जिसमें थोड़ा-बहुत दमनकारी अभ्यास, सह-विकल्प और सहयोग शामिल हैं, जिन सबको न केवल कार्य-स्थल पर बल्कि पूरे समाज में भी संगठित होना होगा।

आधुनिक उदारवादी राज्य के कार्य की समालोचना में मिखाइल फॉकल्ट ने तर्क दिया है कि शासन करने का अर्थ अब ऐसी विभिन्न प्रक्रियाओं के माध्यम से उत्पादन करना, सहायता देना और काम करना है जिसे इसे प्रभुत्वशाली व्यवस्था में सरकार की संस्थाओं के बाहर देखा जा सकता है।

फॉकल्ट के अनुसार उदारवाद को अतिवादी सरकार की समालोचना के रूप में समझा जा सकता है। लेकिन, इसे न केवल पूर्ववर्ती सरकार की समालोचना के रूप में अर्थात् पुलिस और राज्य के कार्यकरण के रूप में देखा जा सकता है,

बल्कि बायो-राजनीतिक सरकार के विद्यमान और सम्भावित रूप में भी देखा जा सकता है। इस प्रकार उदारवाद सरकार के ऐसे अन्य सम्भावित रूपों की आलोचना करता है जिन्हें जीवन प्रक्रिया में अपनाया जा सकता है।

फॉकल्ट के अनुसार उदारवाद सुरक्षा की आवश्यकता को महसूस करता था और इसने सुरक्षा की व्यवस्था को उचित स्थान दिया, जिसका कार्य प्राकृतिक घटनाओं, आर्थिक प्रक्रियाओं, आबादी की अंतर्निहित समस्याओं से सुरक्षा प्रदान करना सरकार का आदर्श उद्देश्य है।MSO 03 Free Assignment In Hindi

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भाग – II

प्रश्न 5. भारत में डिजिटल विभाजन के विस्तार का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।

उत्तर-सूचना एवं विचारों के मुक्त प्रवाह ने सूचना युग में ज्ञान और उसके असंख्य नवीन प्रयोगों की एक आकल्पिक वृद्धि का सृजन किया है।

मानव विकास के क्रान्तिकारी दौर के केन्द्र में सूचना उसकी सुलभता, प्रसार एवं नियंत्रण में है। इसके परिणामस्वरूप आर्थिक एवं सामाजिक प्राधार एवं सम्बन्ध मानव विकास के इस वर्तमान दौर में कायान्तरित हो रहे हैं।

असमानता -तथापि विश्व के अधिकांश व्यक्ति सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों में इस क्रान्तिकारी विकास कार्यों तथा ज्ञान में आकस्मिक वृद्धि से अप्रभावित है। निःसन्देह सूचना युग और ज्ञान समाज विकासशील तथा अवस्थान्तर देशों के लिए अनेक सम्भावित लाभ प्रस्तुत करते हैं।

तथापि इस बात को विस्मृत नहीं किया जा सकता कि सूचना एवं उन्नत संचार प्रौद्योगिकियों पर बढ़ता भरोसा, साथ ही राष्ट्रों के मध्य व उसके भीतर एक बढ़ते अंकीय विभाजन/ दरार का वास्तविक खतरा भी लेकर आता है।

अर्थ –अंकीय एवं ज्ञान विभाजन का अर्थ है। सम्पूर्ण विश्व में प्रौद्योगिकी समर्थ तथा प्रौद्योगिक बहिष्कृत समुदायों के मध्य दरार तथा इसके अतिरिक्त इन समुदायों के भीतर व उनके मध्य सूचना हस्तान्तरणों का अभाव विकासशील दुनिया एवं अवस्थांतर अर्थव्यवस्थाएं अंकीय एवं ज्ञान विभाजनों का वृहत्तम भाग रखती है।

भूमण्डलीय दूर घनत्व सुधर के संकेत देता है। इंटरनेट सुलभ और इंटरनेट दुर्लभ लोगों के मध्य दरार में वृद्धि होती जा रही है। MSO 03 Free Assignment In Hindi

अंकीय विभाजन ने सूचना सम्पन्न व सूचना विपन्न लोगों के मध्य एक ज्ञान भेद उत्पन्न कर दिया है। इसमें निरक्षता के एक नये रूप को प्रोत्साहन देने की सम्भावना है।

अंकीय विभाजन सूचना एवं ज्ञान दरिद्रता को प्रोत्साहित करता है और आर्थिक विकास एवं धन सम्पति, विवरण हेतु अवसर सीमित करता है।

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियां व्यक्तियों और समुदायों के आर्थिक एवं सामाजिक तानेबाने को बुने जाने को प्रोत्साहित करती है।

इन तानो-बानों अर्थात नेटवर्को की शक्ति उन्हें सूचना एवं ज्ञान की सुलभता एवं विनिमय प्रदान कर विविध समूहों को जोड़ने की क्षमता ही उनके सामाजिक आर्थिक विकास के लिये अत्यावश्यक है।

व्यापारी एवं उद्यमी जन अपने व्यापार को राष्ट्रीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक रूप से प्रोत्साहित कर उत्पन्न किए अवसरों के माध्यम से सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाते हैं।

इसके अतिरिक्त, सूचना एवं प्रसार प्रौद्योगिकी आधारभूत स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाएँ अधिक कुशलतापूर्वक प्रदान करने की सम्भावनाएँ प्रदान करती हैं।

इसका कारण यह है कि लोग उन तक अपने स्वयं के समुदायों से पहुँच सकते हैं। तथापि इस सम्बन्ध में सबसे बड़ा दोष यह है कि वृहत्तर जनसमूह तक सूचना एवं प्रौद्योगिकि की सुलभता सीमित है।

इस प्रकार इन प्रोद्योगिकीय विकासकार्यों का लाभ उठाने से सम्बन्धित उनके अवसर लोगों के मध्य एक विभाजन को जन्म देते हुए सीमित हैं।MSO 03 Free Assignment In Hindi

सूचना एवं ज्ञान के संचारण एवं परस्पर आदान-प्रदान के लिए हमारी बढ़ी क्षमता विश्व को समस्त निवासियों के लिए एक अधिक शन्तिमय एवं समृद्ध भविष्य हेतु सम्भावना में वृद्धि कर देती है।

सभी के लिए सुलभता विश्व के अधिकांश व्यक्ति उस समय तक इस सूचना क्रान्ति से लाभ नहीं उठा सकते जब तक वे उभरते ज्ञान आधारित समाज में पूर्णतया सहभागिता निभाने योग्य नहीं होंगे।

एक सार्वभिक ज्ञान समाज में जानकारी और सूचना सभी व्यक्तियों के लिए सुलभ हो जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले और अपंग जन भी सम्मिलित हैं। निम्नलिखित व्यक्तियों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिये।

(i) अपान्तिक, (ii) बेरोजगार, (iii) अल्प लाभान्वित, (iv) मताधिकार वंचित जन, (v) बच्चे, (vi) बुजुर्ग, (vii) अपंग, (viii) देशज जन, (ix) विशेष जरूरतों वाले,

निम्न सार्वभौमिक मानव मूल्य ही सच्चे अन्तर्भूत विश्व सूचना समाज के आधार हैं

(i) समानता एवं न्याय, (ii) लोकतंत्रीय भाईचारा, (iii) परस्पर सहिष्णुता, (iv) मानव गरिमा, (v) आर्थिक प्रगति, (vi) पर्यावरण रक्षा, (vii) विविधता का सम्मान।

विभिन्न देशों में अंकीय विभाजन डिजिटल डिवाइड अंकीय विभाजन समस्त देशों में उनके भीतर धनी व निर्धन के मध्य पूर्व विद्यमान दरार को और चौड़ा करने का खतरा उत्पन्न करता है।

जब तक विश्व के अधिकांश लोग इस क्रान्ति से लाभान्वित नहीं होगें तब तक वे उभरते ज्ञान आधारित सूचना समाज में पूरी सहभागिता में समर्थ नहीं होंगे।MSO 03 Free Assignment In Hindi

आन्तरिक विभाजन अंकीय रूप से निम्न के मध्य है

(i) सशक्त अमीर व अशक्त गरीब लोगों के मध्य (ii) भाषायी सांस्कृतिक विभाजन आंग्ल सैक्सन व अन्य विश्व संस्कृतियों के मध्य, …(iii) प्रौद्योगिकी सलभता विभाजन अमीर व गरीब देशों के मध्य

(iv) एक अन्य विभजन सूचना संचार प्रौद्योगिकी प्रेरित संपन्न अभिजात वर्ग के मूल्यों और परम्परागत अधिकार एवं क्रय परम्पराओं के मध्या प्रति व्यक्ति आय और जीवन स्तरों में असमानता सम्पूर्ण समाजों अथवा समाज के भागों के उपान्तीकरण में परिवर्तित हो सकती है।

इसके अतिरिक्त देशों के भीतर प्रौद्योगिकीय परिवर्तन का प्रायः अर्थ होता है कि वे समूह जो पहले से ही अलाभान्वित एवं बहिष्कृत थे, अधिक पीछे छूट जाते हैं, यथा

(i) निम्न आय परिवार, (ii) ग्रामीण जनता, (iii) महिलाएं (iv) अल्पसंख्यक (v) वयोवृद्ध जन

इंग्लैण्ड में दरिद्रतम आय पंचमांश में केवल 4 प्रतिशत घर ही इंटरनेट से जुड़े हैं-शीर्ष पंचमांश में 43 प्रतिशत। यह अन्तर हर वर्ष बढ़ता ही जा रहा है।

अमेरिका में इंटरनेट से जुड़े अफ्रीकी-अमेरिकन परिवारों का अनुपात श्वेत परिवारों की तुलना में आधा है। सन् 2001 की अर्न्तराष्ट्रीय श्रम संगठन रिपोर्ट आर्थिक सहयोग विकास संगठन देशों सहित विश्व के अनेक भागों में एक अंकीय लिंग भेद दरार को प्रकट करती है।

यद्यपि कछ अर्थ व्यवस्थाएं इटरनेट प्रयोग में प्राय समानता रखती हैं। जैसे

(i) ताइवान, चीन वहाँ 45 प्रतिशत महिला प्रयोगकर्ता हैं। (ii) कोरिया, वहाँ यह 43 प्रतिशत है।

विश्व स्तर पर यह ज्ञान के प्रयोजन, अनूकूलन, उत्पादन तथा प्रसारण के लिये अपनी अपनी क्षमता के अनुसार औद्योगिक एवं विकासशील देशों के मध्य विभाजन उत्पन्न करती है। कोरिया में वर्ष 2000 में इंटरनेट से जूड़े घरों की संख्या लगभग 30 में लाख तक बढ़कर दोगुनी हो गयी।

इसके विपरीत जापान में केवल 4,50,000 घर ही इंटरनेट से जुड़े हैं। उच्च आय एवं निम्न आय देशों के मध्य प्रौद्योगिकीय अन्तर प्रति 1000 निवासियों के पास निजी कम्प्यूटरों की संख्या में प्रकट किया जाता है। यह निम्न प्रकार है MSO 03 Free Assignment In Hindi

(i) बुर्किना फासों में एक से भी कम, (ii) दक्षिण अफ्रीका में 27, (iii) चिली में 38, (iv) सिंगापुर में 172, (v) स्विट्जरलैंड में 348।

उप-सहाराई अफ्रीकी देशों में कुल मिलाकर प्रति 5000 जनसंख्या इंटरनेट प्रयोगकर्ता ही हैं। यूरोप और उत्तर अमेरिका में यह अनुपात प्रति 6 निवासी प्रयोगकर्ता हैं।

विकासशील देशों में अंकीय विभाजन प्रौद्योगिकीय रूप से अधिक देशों को कम उन्नत देशों से पृथक करता है। छोटी जनसंख्या वाले कुछ देशों में अब तक एक भी इंटरनेट आश्रित नहीं दिखाई दिया।

सिंगापुर में 98 प्रतिशत घरों में इंटरनेट का प्रयोग होता है। उपसहाराई अफ्रीका में प्रति 1000 जनसंख्या इंटरनेट अश्रितों की संख्या बुर्किनाफासो में 0.001 से लेकर दक्षिण अफ्रीका में 3.82 तक है।

विभिन्न देशों के मध्य सूचना संचार प्रौद्योगिकि सुलभता से साम्य विषयक अधिकांश रिपोर्ट इस समस्या को आर्थिक मानदण्डों के अनुसार देखती है, जैसे

(i) भौगोलिक अवस्थिति, (ii) शिक्षा, (iii) आयु, (iv) लिंग, (v) अशक्तता,

प्रश्न 7. भूमंडलीकरण की मुख्य विशेषताओं की व्याख्या कीजिए।

उत्तर-द्वितीय विश्व युद्ध से ही विभिन्न देशों के दृष्टिकोण में निम्न प्रकार का परिवर्तन दृष्टिगोचर हो रहा है

(1. आर्थिक बाजारोन्मुखी दृष्टिकोण अपनाया जाना। 2. आर्थिक गतिविधियों का बढा अन्तर्राष्ट्रीयकरण।

उपरोक्त प्रवृत्ति अस्सी के दशक के आरम्भ में महत्त्वपूर्ण रूप से उस समय बढ़ गई जब अमेरिका और इंग्लैण्ड आदि उद्योगीकृत देशों ने आर्थिक क्रियाकलापों के अधिक बाजार समन्वयन की ओर रूख कर लिया।

समाजवादी देशों ने अपना अवस्थान्तर गमन अवस्थान्तर गमन पूँजीवाद की ओर करते हुए इस प्रवृत्ति को नब्बे के दशक के आरम्भ में अपनाया। MSO 03 Free Assignment In Hindi

इस अवधि में सम्पूर्ण विश्व में विकास के एक अनुकूल मार्ग के रूप में निर्यातोन्मुखी विकास रणनीति और व्यापार उदारीकरण का विश्वव्यापी अंगीकरण देखा गया।

यह निम्न प्रकार हुआ :-

(1. स्वेच्छा से, 2. विश्व बैंक व अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी अन्तर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं द्वारा बाध्य किए जाने से (पायकज एवं फोरे 2002)।

इससे भूमंडलीकरण की गति में तीव्रता आई।

परिणामतः गत कुछ दशकों में विश्व उत्पादन में तीव्र वृद्धि हुई है। विश्व व्यापार विश्व उत्पादन की अपेक्षा अधिक तेजी से बढ़ा है तथा राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाएं अधिक उदार और अधिक गहन रूप से समेकित हो गई हैं।

अन्तर्राष्ट्रीय पूँजी प्रवाह अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की अपेक्षा अधिक तेजी से बढ़ा है। निम्नलिखित का आदान-प्रदान अपेक्षाकृत अधिक तेजी से हो रहा है

(1. विचारों का 2. प्रौद्योगिकियों का 3. सांस्कृतिक सहज गुणों का।

सामयिक भूमंडलीकरण ने माल व सेवाओं के आदान-प्रदान में पूर्व की अपेक्षा अधिक मात्रा में वृद्धि की है। इसने पहले से अधिक प्रकार की चीजों के विनिमय की ओर प्रवृत्त किया है।

पहले अनेक वस्तुएं एवं सेवाएं व्यापार के क्षेत्र में नहीं आती थीं। अब वे विश्व व्यापार में नियमित प्रवेश पाती हैं। उदाहरण के लिये

(1. एक जापानी वास्तुकार फ्रांस में भवन निर्माण की अभिकल्पना कर सकता है। 2. सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों की उन्नति ने भौगोलिक दूरी में कमी कर दी है।

इंटरनेट और मोबाइल फोन जैसी प्रौद्योगिकियों ने लोगों के लिये तत्काल विश्व के किसी भी कोने में वार्ता करना सम्भव कर दिया है। इसने ज्ञान समाज की समृद्धि और विकास की गति में तीव्रता ला दी है।

विश्वव्यापी रूप से लोगों के कारण काम की तलाश में प्रवसन या देशान्तरण की घटनाओं में वृद्धि हुई है। भूमंडलीकरण विश्व संगठनों की आपेक्षिक शक्ति में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन निम्न प्रकार आया है-

(1. एक ओर अन्तर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान अधिक शक्तिशाली हो गए हैं, जैसे

(i) अन्तराष्ट्रीय मुद्रा कोष,(ii) विश्व बैंक, (iii) विश्व व्यापार संगठन (WTO)

(2. दूसरी ओर, विश्व सस्थाएं जिन्होंने अधिक मानव केन्द्रित हितों पर ध्यान केन्द्रित किया है, पृष्ठभूमि में चली गई हैं और कमजोर । हो गई हैं, जैसे MSO 03 Free Assignment In Hindi

(1. संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) 2. अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO)

उपरोक्त परिवर्तन विश्व स्तरीय परिवर्तन के कारण हुआ। शक्तिशाली संस्थाओं ने अर्थव्यवस्था में बाजारों के बढ़े प्रयोग व कम सरकारी | हस्तक्षेप की ओर अग्रसर किया है, जैसे

(1). IME (2). WTO, 3. World Bank

उद्देश्य यह है कि वृद्धि के शब्द राष्ट्रीय सरकारों का निरीक्षण कम किया जाये ताकि व्यापार एवं पूँजी निवेश का मुक्त प्रवाह हो। विश्व संस्थाओं की शक्ति में यह परिवर्तन मानव जीवन के हर पक्ष में प्रकट होता है।

भूमंडलीकरण की वर्तमान प्रक्रिया का प्रभाव राष्ट्रीय नीतियों के वैश्वीकरण तथा राष्ट्रीय सरकारों की नीति निर्माण कार्ययोजनाओं में भी दृष्टिगोचर होता है। पहले निम्नलिखित क्षेत्रों की राष्ट्रीय नीतियां किसी देश राज्यों एवं लोगों के अधिकार क्षेत्र में ही होती थीं

(1. आर्थिक क्षेत्र, 2. सामाजिक क्षेत्र, 3. सांस्कृति क्षेत्र, 4. प्रौद्योगिकीय क्षेत्र,

वे अब अन्तर्राष्ट्रीय अभिकरणों एवं बड़े निजी निगमों के प्रभाव में आती जा रही हैं। इन अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों के बढ़ते दबाव के कारण राष्ट्रीय सरकारें निम्न प्रकार अपनी अर्थव्यवस्थाएं पुनर्गठित करने हेतु बाध्य हो गयी हैं

(1. मुक्त व्यापार में अधिक भारी प्रयास।
(2. सामाजिक क्षेत्र में कम व्यय की अपेक्षा।

(3. करों में वृद्धि करना। MSO 03 Free Assignment In Hindi
(4. निम्न मदों पर व्यय घटाकर सरकारी व्यय को कम करना

(i) शिक्षा (ii) स्वास्थ्य (iii) सफाई व्यवस्था (iv) आवासीय परिदान (v) ईंधन (vi) सार्वजनिक वितरण प्रणालियां
(vii) परिवहन (viii) सामाजिक क्षेत्र

(5. राष्ट्रीय सरकारों को जन उपभोग की अनिवार्य वस्तुओं पर प्रयोज्य लागू मूल्य प्रणाली को समाप्त करना पड़ा।।
(6. भूमंडलीकरण से जुड़ी बहिरंगताओं का भी पर्यावरण पर एक विश्वव्यापी प्रभाव पड़ा।
(7. विश्व बुराइयों की एक नवीन श्रृंखला ने जन्म लिया है।

उदाहरण 1. भूतायन 2. ओजोन परत का अवक्षय आदि।

भारत में भूमंडलीकरण की प्रक्रिया को अतिरिक्त प्रेरणा उस समय मिली, जब उसने अपनी अर्थव्यवस्था को एक बड़े संकट के अन्तर्गत नब्बे के दशकारंभ में खोल दिया।

यह संकट विदेशी मुद्रा सम्बन्धी निर्णायक घटना के कारण उत्पन्न हुआ था। इस संकट ने भारतीय अर्थव्यवस्था को अन्तर्राष्ट्रीय वित्तीय

संस्थाओं को देय ऋणों को न चुका पाने के कगार पर खड़ा कर दिया था।

भारत ने एक नवीन आर्थिक नीति अपनाई। इसमें भूमंडलीकरण, उदारीकरण और निजीकरण सम्बन्धी मूल सिद्धान्त सम्मिलित थे। भारत सरकार द्वारा अपनाई गई इन नवोदारवादी नीतियों के दो मुख्य घटक रहे हैं

(1. भारत के निजी क्षेत्र का उदारीकरण,
(2. सार्वजनिक क्षेत्र का सुझाव।

भूमंडलीकरण ने निम्नलिखित कारकों के द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व अर्थव्यवस्था से जोड़ दिया

(1. आयात शुल्क एवं निर्यात प्रतिबन्धों में कमी लाकर।
(2. विदेशी निवेशों को बढ़ावा देकर। MSO 03 Free Assignment In Hindi
(3. विदेशी प्रौद्योगिकी एवं कौशलों के मुक्त प्रवाह की अनुमति देकर।

प्रमुख परिणाम निम्न प्रकार से निकले हैं

(1. बाह्य व्यापार से प्रतिबन्धों को हटाने के परिणामस्वरूप वस्तुओं के संचलन पर कुछ आन्तरिक प्रतिबन्ध भी हट गए हैं।
(2. वर्तमान सरकारी लाइसेसिंग प्रणाली में काफी ढील मिली है।

(3. निजी प्रतिष्ठानों के साथ-साथ अनेक उत्पादों से प्रतिबन्ध हटा लिया गया है।
(4. लाइसेंस परमिट राज अब अतीत की बात हो गई है।

(5. विदेशी व्यापार महानिदेशक की भूमिका प्रायः समाप्त हो गयी है।
(6. विदेशी माल व सेवाओं के मुक्त प्रवाह को अनुमति मिल गयी है।

(7. उर्वरक एवं कृषि को दिए जाने वाले परिदान अत्यन्त कम अथवा समाप्त कर देने पड़े हैं।
(8. गरीबी उन्मूलन योजनाओं एवं स्वास्थ्य व शिक्षा हेतु आवंटन में गिरावट देखी गई।

विश्वव्यापी रूप से उत्पादन के समेकन के साथ-साथ आन्तरिक रूप से देश के भीतर भी ऐसा हुआ है।

सार्वजनिक रूप से स्वत्वप्राप्त कम्पनियों का, राज्य व समुदाय नियन्त्रित संसाधनों का, अब तक आरक्षित रहे क्षेत्रों, जैसे-बैकिंग, बीमा आदि का तेजी से निजीकरण हो रहा है।

(9. श्रम संरक्षण का विनिमय हुआ है। इसने संविदा श्रमिकों की व्यापक संख्या में वृद्धि एवं उप-अनुबंधन की ओर प्रवृत्त किया है।

प्रश्न 8. व्यापार उदारीकरण के संबंध में विकासशील देशों के मुद्दों का परीक्षण कीजिए।

उत्तर-विद्वानों के एक वर्ग की यह धारणा है कि सेवा में व्यापार उदारीकरण निम्नलिखित में परिवर्तित हो सकता है(i) बढ़ी प्रतिस्पर्धा, (ii) कम दाम (ii) अधिक नये उपाय, (iv) प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, (v) रोजगार जनन, (vi) व्यापार व निवेश प्रवाहों में अधिक पारदर्शिता, (vii) पूर्वानुमान।

व्यापार उदारीकरण को निम्नलिखित विषयों के कार्यान्वयन हेतु प्रेरक के रूप में भी देखा जा रहा है

(i) सामाजिक, (ii) विकासात्मक एवं (iii) समग्रवादी।

कॉपेनहेगन में हुए सामाजिक विकास सम्मेलन 1995 में इस बात पर बल दिया गया कि सामाजिक विकास को आर्थिक परिवेश से पृथक न किया जाये। MSO 03 Free Assignment In Hindi

विद्वान के एक विशिष्ट वर्ग के अनुसार गैट्स बाजार शक्तियों और सामाजिक एवं नैतिक न्याय आदि मुद्दों से जुड़ी सरकारी नीतियों के मध्य संतुलन स्थापित करेगा।

तथापि प्रश्न है कि क्या स्पर्धा के उभरते परिवेश में उनके राष्ट्रीय सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिये निम्न के प्रति समुचित अवधान एवं व्यवहार रखा जाए

(i) नैतिक न्याय,
(ii) सार्वजनिक वितरण,

(iii) उपेक्षित लोगों का मानव विकास,
(iv) राज्यों की सम्प्रभुता।

प्रायः यह मत व्यक्त किया जाता है कि

(i) स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्रों में बाजार की विफलता पहचान ली गयी है।
(ii) राज्य अनेक क्षेत्रों में ऐसी सेवाओं को प्रदान करने वाले के रूप में ही सम्बद्ध हैं।

(iii) बाजार शक्तियों द्वारा सामाजिक सेवाओं में वचनबद्धताओं का अभाव केवल ऐसे विषयों के कार्यक्षेत्र में वृद्धि ही करेगा।

(1. विश्व व्यापार संगठन ने कतिपय मानकों, नियमों एवं प्रक्रियाओं की एकरूपता पर बल दिया है। इनका अनुपालन एक निर्दिष्ट समय के भीतर समस्त सदस्य सरकारों द्वारा किया जाना है।विकासशील और अल्पविकसित देशों को विकसित देशों की अपेक्षा अधिक समय दिया जाता है।

इसके पीछे सिद्धान्त यह है कि वे विश्व एकरूपता की वांछनीयता के अनुसार मानदण्ड, नियम एवं आर्थिक नीतियां बना सकें। निःसन्देह इस समायोजनकारी प्रवृत्ति से निम्न को गुप्त रूप से क्षति पहुँची है

(i) अर्थव्यवस्था के विविध प्रतिमान
(ii) स्थानीकृत आवश्यकतायें
(iii) मुद्दे MSO 03 Free Assignment In Hindi

कभी-कभी समायोजन की यह प्रक्रिया विकासशील एवं अल्पविकसित देशों की आर्थिक स्वायत्तता और राजनीतिक सम्प्रभुता पर अभिभावी रही है।

गैट्स समझौता व्यापक और सरकारों के सभी स्तरों हेतु प्रयोज्य है

(i) केन्द्रीय,
(ii) राज्यीय,

(iii) प्रान्तीय,
(iv) स्थानीय,
(v) नैगम।

इस सम्बन्ध में यह आशंकायें व्यक्त की गयी हैं कि गैट्स सिद्धान्त

(i) राज्य की सम्प्रभुता को उत्कीर्ण करेगा।
(ii) राष्ट्रीय हितों को यथासम्भव कम करेगा।
(iii) सार्वभौम सेवा दायित्वों की उपेक्षा करेगा।

कतिपय विचारकों के अनुसार निम्नलिखित कार्यों से सरकार की सत्ता को गुप्त रूप से क्षति पहुँचेगी

(i) व्यावसायिक सेवाओं पर संगठन के कार्यकारी दल द्वारा लेखांकन के क्षेत्र में अनुशासन विकसित करने हेतु समझौते।

(ii) स्वास्थ्य जैसी अन्य सेवाओं एवं विधिसंगत क्षेत्रों तक उसका विस्तार।

(iii) उपभोक्ता संरक्षण, नैतिक दृष्टि से सही आचार व्यवहार एवं व्यावसायिक सत्यनिष्ठा को पांबदियों के अनुकूल बनाने।

यह भी आरोप लगाया जाता है कि संगठन पश्चिमी देशों के दीर्घाकृत प्रभाव के अन्तर्गत बनाया गया है। इसका उद्देश्य विकसित देशों विशेषकर उत्तर अमेरिका की बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के हितों की रक्षा करना है।

इसके अतिरिक्त व्यापार समझौतों में विकासशील एवं अल्प विकसित देशों के संप्रभु राज्यों की अपेक्षा इन कम्पनियों की सुनवाई कहीं अधिक है। MSO 03 Free Assignment In Hindi

विकसित देशों में गुटों के दबाव के कारण गैट्स विकासशील एवं अल्प विकसित देशों को इस बात के लिए बाध्य करेगा कि वे अपने सेवा क्षेत्र को बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा घरेलू सेवा क्षेत्र के एक ‘संघबद्ध अधिग्रहण’ की ओर प्रवृत्त करते व्यापार के लिए खोल दे।

इस प्रकार के अधिग्रहण से सरकार की समतावादी सार्वभौम सेवा दायित्वों एवं उपभोक्ता संरक्षण सम्बन्धी प्रतिबद्धता की अवमानना होगी।

(2. विश्व व्यापार संगठन ने असमान साझीदारों के मध्य बाजार प्रेरित प्रतिस्पर्धा उत्पन्न की है

(i) विकासशील और अल्पविकासशील देश अभी अपनी बाजार अधिसूचना निवेशार्थ घरेलू क्षमता आदि को पूरी तरह विकसित नहीं कर पाये हैं। उन्हें समायोजन प्रक्रिया से दो-चार होते समय परिवर्तित हानियां सहन करनी पड़ेंगी।

(ii) यह प्रक्रिया स्पर्धा बाजारों में इन देशों के भावी प्रवेश की सम्भावना में कमी कर देगी।

(iii) श्रम एवं पर्यावरण मानकों पर बढ़ते जोर ने इन देशों पर गम्भीर व्यापार प्रतिबन्ध लगाए हैं।

(iv) इन देशों में स्थानिक बेरोजगारी गरीबी एवं निरक्षरता सम्बन्धी समस्याएं समायोजन प्रक्रिया में भीतर ही भीतर समाप्त की जा रही हैं। |

(v) गैट्स समझौता विकसित देशों के निर्यात हितों को सिद्ध करेगा।

(vi) प्रदत्त स्थिति के अंतर्गत विकसित, विकासशील एवं अल्प विकसित देशों को जहाँ तक कि सेवा में आपूर्ति क्षमता का सम्बन्ध है, असमान रूप से रखा जाता है।

(vii) पूँजी गतिशीलता की दिशा में बाजार सुलभता वचनबद्धता में वर्तमान विषमता और पूर्वाग्रह जो कि श्रमिक गतिशीलता के विरुद्ध है, विकासशील देशों की बजाय विकसित देशों के हित में काम करते हैं।

(viii) यह दोनों पक्षों के मध्य विनिमय विचारों और समर्थनकारी सत्ता में एक आधारभूत असन्तुलन को प्रकट करता है। MSO 03 Free Assignment In Hindi

(ix) गैट्स विकासशील देशों के निर्यात हितों विशेषकर सीमापार श्रमिकों की गतिशीलता दृष्टिगत नहीं रखेगा। …

(x) विदेशी समदृष्टि भागीदारों पर किए जा रहे अधिक उदारमना वायदों के साथ पूँजी गतिशीलता पर वर्तमान वचनबद्धताओं की बजाय श्रमिक गतिशीलता पर वर्तमान प्रतिबद्धताओं में काफी विषमता विद्यमान है।

मोड व्यापी प्रतिबद्धताओं में इस प्रकार की विषमता के कारण अनेक देश गैट्स को श्रम आधारित सेवाओं में अपनी निर्यात सम्भावना बढ़ाने में सहायता कर्ता के रूप में नहीं देखते हैं तथा गैट्स को केवल विकसित देशों के हित में मानते हैं।

(3. परिवहन, भौतिक एवं दूसंचार, पर्यटन आदि परम्पारागत साहसकार्यों के अतिरिक्त सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों जैसे उभरते क्षेत्रों में और पर्यावरण एवं शैक्षणिक सेवाओं समेत अर्थव्यवस्था का सेवाक्षेत्र सम्पूर्ण विश्व में एक आश्चर्यजनक विस्तार की प्रक्रिया से गुजर रहा है

(i) इंग्लैंड और अमेरिका आदि विकसित देशों में यह 72 प्रतिशत से भी अधिक है।
(ii) भारत जैसे विकासशील देशों में यह सकल घरेलू उत्पाद का 52 प्रतिशत है।

यह क्षेत्र इन देशों के श्रमिक बल को रोजगार का एक इसी प्रकार का अनुपात प्रदान करता है। सेवाक्षेत्र एवं निवेश प्रवाहों में यथेष्ट विस्तार दृष्टिगोचर होता है।

विश्व व्यापार संगठन वार्षिक रिपोर्ट 1999-2001 के अनुसार सेवा क्षेत्र विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के विश्वव्यापी वार्षिक भण्डार के 40 प्रतिशत और विश्वव्यापी वार्षिक विदेशी प्रत्यक्ष निवेश प्रवाहों के 40 प्रतिशत तक योगदान देता है।

यद्यपि विकसित देशों का विकासशील देशों और अल्पविकसित देशों की तुलना में सेवा क्षेत्र में निरप्रवाह रूप से अधिक विदेशी सीधा निवेश का अंश है।

उरूग्वे दौर के माध्यम से प्रारम्भ किया गया सेवाओं में व्यापार उदारीकरण अधिकांश रूप में विकसित देशों में सेवा क्षेत्र समर्थन गुट की ओर से पड़ते दबाव के कारण है।

ऐसा प्रतीत होता है कि आपूर्ति के तरीकों में एक व्यापारिक विद्यमानता होने के कारण गैट्स विकसित देशों में व्यापारिक हित की पूर्ति हेतु एक साधन होगा। MSO 03 Free Assignment In Hindi

इसका आशय होगा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के माध्यम से सेवा, बैंकिंग एवं दूरसंचार आदि क्षेत्रों में विकासशील देश सेवा बाजारों तक पहुँचना।

विशेषज्ञों के अनुसार उभरते विश्व परिदृश्य में निर्माण एवं अभियांत्रिकी, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं आदि सेवा क्षेत्र विकासशील देशों में कुशल एवं प्रचुर श्रमिकों की तत्कालीन उपलब्धि होने के कारण भारी सम्भावनाएं हैं।

+भारत पहले ही सॉफ्टवेयर सेवाओं के अग्रणी निर्यातक और प्रशिक्षित मानव संसाधन के रूप में भी उभर चुका है।

(4. सूचना संचार प्रौद्योगिकियों में गैट्स के अन्तर्गत सम्मिलित होने वाली सेवाओं की श्रृंखला सत्ता प्रयोग में दी गयी सेवाएं समझौते से बाहर रखी गयी हैं। अनेक महत्त्वपूर्ण सेवाओं में निजी एवं सरकारी आपूर्तिकर्ताओं का सह-अस्तित्व होने के कारण विविध व्याख्याओं के प्रति उत्तरदायी है।

(5. गैट्स ने रियायत, सरकारी, प्रापण आदि नीति के मुद्दों पर प्रतिबंध लगाए हैं। यह प्रतिबंध ‘सेवाओं की लागत उपलब्धता एवं समान | वितरण पर’ प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।

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