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MPA 18

आपदा प्रबंधन

MPA 18 Free Assignment In Hindi

MPA 18 Free Assignment In Hindi jan 2022

भाग-1

प्रश्न 1. आपदा को परिभाषित कीजिए तथा भारत में प्राकृतिक आपदाओं का अवलोकन कीजिए।

उत्तर-संयुक्त राष्ट्र की आपदा न्यूनीकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय कार्यनीति के संकटा को इस प्रकार परिभाषित किया है. सावित खप स. एसी नुकसानदायक भौतिका घटना, परिघटना अथवा मनुष्य की गतिविधि, जिससे जीवन को नुकसान पहुंचता है,

सम्पत्ति का नुकसान होता है, सामाजिक और आर्थिक नुकसान होता है अथवा पर्यावरण का हास हो सकता है।” खतरे प्राकृतिक हाइड्रो मेट्रोलॉजिकल और जैविक अथवा मानवीय गतिविधियों से प्रेरित हो सकते हैं। खतरे एकल अथवा संयुक्त हो सकते हैं।

आपदा प्राकृतिक अथवा मानव-निर्मित कारणों का परिणाम है, जो जान और माल की गंभीर हानि करके अचानक सामान्य जीवन को उस सीमा तक अस्त-व्यस्त करती है,

जिसका सामना करने के लिए उपलब्ध सामाजिक तथा आर्थिक संरक्षण कार्यविधियां अपर्याप्त होती हैं। इसलिए शुरुआत में ही खतरा और आपदा के मध्य वैचारिक अंतर स्पष्ट करना जरूरी है।

आपदाएं आंतरिक और बाहरी कारकों के कारण पैदा होती हैं, जो सामूहिक रूप से घटना को भारी नुकसानदायक घटना के रूप में प्रस्तुत करती हैं।

आपदाओं का वर्गीकरण आपदाएं उद्भव के आधार पर प्राकृतिक एवं मानव निर्मित आपदाओं में विभाजित की गई हैं। MPA 18 Free Assignment In Hindi

अगस्त, 1999 में जे.सी. पंत की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकारिक समिति की स्थापना की गई थी। इस समिति ने राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन के लिए विस्तृत प्रारूप योजनाएं बनाने का प्रस्ताव किया था।

भारत में समस्त आपदाओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करने का यह प्रथम प्रयास था। उच्चाधिकारिक समिति द्वारा लगभग 30 आपदाओं का निर्धारण किया गया, जिन्हें आमतौर पर 5 भागों में विभाजित किया गया है

1). जल और जलवायु

(i) बाढ़ (ii) सूखा

(iii) लू और शीत लहर (iv) समुद्री अपरदन

(v) बादल फटना (vi) हिमपात

(vii) ओलावृष्टि (viii) बादल गर्जन और बिजली
(ix) चक्रवात

2) भूवैज्ञानिक

(i) भूकम्प
(ii) सुरंग अग्निकाण्ड
(ii) भू-स्ख लन और पंक प्रवाह
(iv) बांध विफलता और बांध विस्फोट

3). जैविक

(i) पशु महामारी
(ii) विनाशकारी कीटों का आक्रमण

4). रसायनिक, औद्योगिक आर आणविक

(i) रासायनिक और औद्योगिक आपदाएं
(ii) आणविक आपदाएं

5). दुर्घटनाएं

(i) गांव की आग (ii) खान में बाढ़

(iii) क्रमिक बम विस्फोट (iv) तेल छलकना ,

(v) नौकाओं का उलटना (vi) बड़ी इमारतों का गिर जाना

(vii) त्योहार से संबंधित आपदाएं (viii) विद्युत संबंधी आपदाएं और आग

(ix) हवाई, सड़क और रेल दुर्घटनाएं (x) जंगली आग

भारत में प्राकृतिक आपदाओं की समीक्षा :–

दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002-07) में वर्णित भारत की प्रमुख संवेदनशीलताएं निम्नलिखित हैं

1). चार करोड़ हेक्टेयर भूमि बाढ़ों के प्रति संवेदनशील है।MPA 18 Free Assignment In Hindi

2). कुल बुआई क्षेत्र का 68 प्रतिशत सूखे के प्रति संवेदनशील है।

3). तटीय राज्य, विषेषकर पूर्व तटीय राज्य और गुजरात, चक्रवातों के प्रति संवेदनशील हैं।

4). कुल क्षेत्र का 55 प्रतिशत भूकम्पीय क्षेत्र 3.4 में है, इसलिए भूकम्पों के प्रति संवेदनशील है।

5). उप-हिमालय क्षेत्र और पश्चिमी घाट भू-स्खलनों के प्रति संवेदनशील है।

(क) बाढ़ – मानसून के चार महीनों में लगभग 75 प्रतिशत वर्षा होती है, जिसके परिणामस्वरूप सभी नदियों में जल-स्तर काफी उच्च हो जाता है। अवसाद निक्षेपण, जल निकास संकुलन और नदी की बाढ़ों की समस्याएं तटीय क्षेत्रों में समुद्र की ज्वारीय लहरों के साथ बाद के संकट को बढ़ा देती हैं।

गंगा और ब्रह्मपुत्र घाटी सबसे ज्यादा बाढ़ग्रस्त क्षेत्र हैं। उत्तर-पश्चिम के क्षेत्र में पश्चिम की ओर बहने वाली प्रमुख नदियां नर्मदा और ताप्ती एवं दक्षिण क्षेत्र में पूर्व की ओर बहने वाली प्रमुख नदियां महानदी, कृष्णा और कावेरी हैं।

हालांकि बाढ़ से 4 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित होता है, लेकिन वर्ष में बाढ़ से प्रभावित होने वाला क्षेत्र लगभग 80 लाख हेक्टेयर है।

(ख) सूखा – भारत में ज्यादातर सिंचाई मानूसन पर निर्भर है। विगत 100 वर्षों के मूल्यांकन से पता चलता है कि शुष्क, अर्ध-शुष्क और उपार्द्र क्षेत्रों में सामान्य से कम बर्षा होने की आवृत्ति वि-57 प्रतिशत है।

शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में भयंकर और असामान्य सूखा प्रत्येक 8-9 वर्षों में होता है। लगभग 50 प्रतिशत तक भयंकर सूखे शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों में हो सकता है, जिसमें आमतौर पर लगभग-प्रतिशत क्षेत्र सम्मिलित हो MPA 18 Free Assignment In Hindi

(ग) चक्रवात – भारत की तटरेखा काफी लम्बी है, यहां दो अलग-अलग चक्रवात मौसम हैं-मई-जून और अक्तूबर-नवम्बर। इन चक्रवातों का प्रभाव तटीय क्षेत्रों तक सीमित रहता है। सबसे ज्यादा भयकर घटनाएं ज्वारीय लहरी, तफानी लहरों तथा भारी वर्षा और तटीय बाढ़ों के कारण होती हैं।

(घ) भूकम्प – विगत 53 वर्षों में रेक्टर पैमाने पर 8 से ज्यादा तीव्रता के चार भूकम्प इस क्षेत्र में आए हैं। भारत के प्रायद्वीपीय भाग में स्थिर महाद्वीपीय क्षेत्र समाहित हैं।

इन क्षेत्रों को भूकम्पीय दृष्टि से सबसे कम सक्रिय माना जाता था, लेकिन रेक्टर पैमाने पर 6.4 गति वाले 30 सितम्बर, 1993 को लातूर में आए भूकम्प से जन-जीवन की भारी क्षति के साथ-साथ मूलभूत संरचना की हानि हुई।

(ङ) भूस्खलन और हिमपात – हिमालय, उत्तर-पूर्वी पर्वत श्रेणियों और पश्चिमी घाटों में अलग-अलग तीव्रताओं वाले काफी भूस्खलन होते रहते हैं।

नदियों का रिसाव भूकम्पीय हलचल और भारी वर्षा से समुचित गतिविधि पैदा होती है। आमतौर पर चक्रवातीय विक्षोभों के साथ भारी वर्षा से पश्चिमी घाटों के ढलानों पर भूस्खलन की घटनाएं ज्यादा होती हैं।

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प्रश्न 2. आपदा चक्र की विभिन्न अवस्थाओं की संक्षिप्त में चची कीजिए।

उत्तर-आपदा चक्र-आपदा प्रबंधन की अलग-अलग तीन अवस्थाएं होती हैं :

आपदा घटना – इसका अभिप्राय है किसी खतरे का वास्तविक रूप से घटित होना और खतरे की संभावना वाले तत्त्वों को प्रभावित करने वाली घटना। आपदाओं का भौगोलिक परिदृश्यों पर ज्यादा असर होता है। भूकम्प से कुछ ही मिनटों में संपूर्ण क्षेत्र मलबे के ढेर में परिवर्तित हो जाता है।

इसके प्रभाव से प्रभावित क्षेत्रों में जान-माल का नुकसान होता है, यह नुकसान प्रत्यक्ष रूप से भौतिक और सामाजिक-आर्थिक गतिशीलता से जुड़ा होता है।MPA 18 Free Assignment In Hindi

समाज के कमजोर वर्ग, जैसे-महिलाएँ, बच्चे, वृद्ध, विकलांग, मानसिक रूप से बीमार आदि को ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

गरीबों को आपदा के परिणामस्वरूप संकट से उबरने में भी कठिनाई होती है। इससे आपदाओं के प्रति बहुपक्षीय अनुक्रिया करने की जरूरत होती है, जिसमें सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक सभी पक्ष सम्मिलित होते हैं।

आपदा अनुक्रिया – आपदा प्रलयकारी घटना है, जिसका भयंकर परिवर्तनकारी परिणाम होता है। इसके परिणाम भौतिक और मानवीय दोनों प्रकार के होते हैं।

संचार अस्त-व्यस्त हो जाता है, मूलभूत सुविधाएं प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो जाती हैं. अनेक इमारतें नष्ट हो जाती हैं, रोजगारों का नुकसान होता है, सामाजिक ताना-बाना भी विघटित होता है, विकास कार्यों में भयंकर नुकसान होता है, कानून और व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है।

आपदा अनुक्रिया में इन समस्त संकटों का सामना करना जरूरी है। आपदा अनुक्रिया से सहज ही महत्त्वपूर्ण शिक्षा प्राप्त होती है, जिसे सीखना जरूरी है।

आपदा के बाद का समय प्रशासनिक व्यवस्था के लिए विश्लेषण का समय होता है. क्योंकि आपदा अनुक्रिया व्यवस्था की गलतियों को उजागर करती है। MPA 18 Free Assignment In Hindi

मजबूत बुनियादी संरचना और सेवा सहायता आधार बुनियादी और सबसे ज्यादा जरूरी है, जिसकी कमी तृतीय विश्व के गरीब देशों में देखने को मिलती है।

इस प्रकार का विस्तृत विश्लेषण तथा चयनित कार्यविधि के माध्यम से लोगों की ओर से नाराजगी दिखाई देना भी तृतीय विश्व के दिशों में प्रभावकारी नहीं है।

आपदा घटना व्यवस्था की ऐसी अंतर्भूत असफलताए सामने लाती है, इसलिए बाह्य सहायता पर आश्रितता स्पष्ट हो जाती है।

विकासशील देशों में आपदा की जोखिम की जानकारी कम है, अतः इस विषय में नीति के लिए ज्यादा दबाव उचित नहीं है,

इसलिए सरकार की ओर से प्रशासनिक सुधार के संबंध में विकासशील देशों में विकास कार्यों को संरक्षित करने के लिए आगामी योजना बनाना और नीति अंत:क्षेप के रूप में महाविनाश, प्राकृतिक अथवा मानव-निर्मित उत्पन्न आपदा संभावना कम करके निम्नलिखित सुनिश्चित करना जरूरी है

3. अच्छी संस्थागत तैयारी।MPA 18 Free Assignment In Hindi

4. कानूनी प्रावधानों को मजबूत करके तथा ईमानदारीपूर्वक उनके कार्यान्वयन से संरचनात्मक और असंरचनात्मक गतिशीलताओं का सामना करने के लिए लम्बी न्यूनीकरण नीति।

5. आपसी मतभेदों के कारण सामाजिक संबद्धता का अभाव, जैसे-प्रतिकूल दबावों का विरोध करना, जो स्वसहायता और सामुदायिकता के रूप में महत्त्वपूर्ण तरीके से अनुक्रिया में बाधा उत्पन्न करते हैं।

अनुक्रिया का महत्त्व – अनुक्रिया के परिणामस्वरूप तात्कालिक न्यूनीकरण होता है। सरकार और नागरिक समाज द्वारा महत्त्वपूर्ण अनुक्रिया करके आपदा की हानियां बहुत सीमा तक कम की जा सकती हैं। विश्व स्तर पर कुल आपदा प्रभावित लोगों में 80 प्रतिशत प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित होते हैं।

विश्व आपदा रिपोर्ट, 2003 इस बात पर बल देती है कि मानवतावादी अभिकरण और सरकार आपदा प्रभावित समुदायों की पुनस्थापना करने,

उन्हें ज्यादा सशक्त और उन्नतशील बनाने में कैसे मदद करते हैं। संसार के सबसे ज्यादा गतिशील लाखों लोग मानवीय मदद और संरक्षण से काफी दूर रहते हैं। MPA 18 Free Assignment In Hindi

लोगों की जान बचाने के लिए उच्च स्तरीय मदद कार्यों पर ज्यादा आश्रितता की आलोचना भी की जाती है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर आपदा न्यूनीकरण में दीर्घकालिक निवेश कहीं ज्यादा प्रभावकारी सिद्ध हुआ है।

1996 में 4 करोड़ आपदा प्रभावित लोग मानवीय मदद पर निर्भर थे, यह संख्या 1980 के दशक में 2.5 करोड़ के औसत आंकड़ों में 60 प्रतिशत की वृद्धि है।

आपदा अनुक्रिया में शामिल मुद्दे – आपदा अनुक्रिया में महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि इसमें सम्मिलित समस्त कर्ताओं सहित सरकार और नागरिक समाज के मध्य समन्वय होमहवपूर्ण मानाय के लिए स्थानीय सरकार की बुनियादी संरचनाएं सुदृढ़ होनी चाहिए,

क्योंकि अनुक्रिया प्रयास स्थानीय स्तर पर संचालित किए जाते हैं। नागरिक समाज आपदा प्रबंधन चक्र के समस्त मुद्दों में प्रमुख सहयोग कार रहा है। राज्य और अनेक मुद्दों में बाजार की असफलता की स्थिति में नागरिक समाजानई विख व्यवस्था की नई आशा है।

नागरिक समाज नए गठजोड़ों में केवल तब तक चुप रह सकता है, जब तक वैकल्पिक संरक्षण कार्यविधि उपलब्ध नहीं होती। नागरिक समाज इस संदर्भ में नई आशा प्रदान करता है।

क्योंकि इसने संसार भर में मानव हितों के लिए सफलतापूर्वक संघर्ष किया है। भारतीय आपदा रिपीट, 2005 के अनुसार आपदा के समय अव्यवस्था और गड़बड़ी से बचने के लिए ऐसे विशेष क्षेत्र निर्धारित किए जाने चाहिए, जहां नागरिक समाज का सहयोग आवश्यक है। MPA 18 Free Assignment In Hindi

पुनरुत्थान – आपदा के बाद स्थायी पुनर्विकास को बढ़ावा देने के लिए कार्यवाहियों के कार्यान्वयन में पुनरुत्थान सम्मिलित है।

पुनरुत्थान वह कार्य है जो बुनियादी संरचना प्रणाली को प्रचालन के न्यूनतम मानक पर वापस लाता है और आपदा के बाद सामान्य जीवन बहाल करने के लिए तैयार किए गए दीर्घकालिक प्रयासों का मार्गदर्शन करता है।

कभी-कभी पुनरुत्थान का प्रयोग उन कार्यों का वर्णन करने के लिए किया जाता है, जिनमें आपदा राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण की तीन परस्पर व्यापी अवस्थाएं सम्मिलित होती हैं।

(क) आपात राहत – आपात-राहत का अभिप्राय आपदा के तुरन्त बाद के समय से है, जब आश्रय, पानी, भोजन और चिकित्सीय देखभाल के संबंध में जीवित लोगों की जरूरतें पूरी करने के लिए उपाय किए जाते हैं।

आपदा के समय और तुरन्त बाद प्रारंभ किए गए कार्यों में शीघ्र सहायता, बचाव, हानि और आवश्यकता आकलन तथा मलबे की सफाई सम्मिलित हैं। MPA 18 Free Assignment In Hindi

(ख) पुनर्वास – पुनवास का अर्थ उन कार्यकलापों से हैं, जो आपदा पीड़ितों को सामान्य स्थिति में आने और नियमित सामुदायिक कार्यों में पुनः जुड़े होने में मदद करने के लिए शुरू किए जाते हैं।

इसके अंतर्गत अस्थायी आवास तथा सार्वजनिक सुविधाओं की व्यवस्था सम्मिलित हो सकती है, ताकि स्थायी आवास और बुनियादी संरचना के माध्यम से दीर्घकालिक पुनरुत्थान कार्यों में मदद हो सके।

पुनर्वास कार्यक्रमों में आजीविका पुनर्स्थापन और मदद कार्य तथा उन लोगों के लिए वैकल्पिक रोजगार के विकल्प तलाश कर आर्थिक पुनर्वास भी सम्मिलित है,

जो अपूरणीय क्षति के कारण अपने मूल व्यवसायों को नहीं कर सकते। पुनर्वास में मनो-सामाजिक पुनर्वास भी सम्मिलित है। यह आपदा से प्रभावितों की मनो-सामाजिक परामर्श की जरूरत को पूरा करता है।

(ग) पुनर्निर्माण – पुनर्निर्माण समुदायों को आपदा से पहले अच्छी कार्य स्थिति में वापस लाने का प्रयास करता है। इसके अंतर्गत भवनों, बुनियादी संरचनाओं और जीवनरक्षा सुविधाओं, जैसे-सड़कें, पुल और संचार संपर्कों की प्रतिस्थापना सम्मिलित है ताकि पूर्व स्थितियों के पुनर्निर्माण के बजाय क्षेत्र अथवा समुदाय को पूर्व गतिशील बनाकर दीर्घकालिक विकास संभावनाएं बढ़ाई जा सकें।

उत्तर-आधुनिक चिन्तन शहरी योजना को बहुत ज्यादा प्रभावित कर रहा है। आधुनिकतावादी एकरूपता पर बल देने के बजाय अनेकता की वांछित सद्गुण के रूप में प्रशंसा की जाती है।

भूकम्प, बाढ़ और चक्रवात गतिशील क्षेत्रों में बुनियादी संरचनाएं निर्मित करने के लिए आधुनिक अभियांत्रिकी तकनीकी में देशीय ज्ञान समाविष्ट किया जा रहा है। MPA 18 Free Assignment In Hindi

इसलिए नई इमारतों को आपदा प्रतिरोधी तकनीक से बनाने कि अतिरिक्त पुरानी इमारतों को भी आपदा प्रतिरोधी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

विकास – आपदा चक्र में एक अवस्था के रूप में विकास को समाविष्ट करने का अर्थ यह तय करना है कि प्राकृतिक आपदा के बाद समाज समग्र उन्नति के हित में अपनी विकास नीतियों और योजनाओं में खतरे से बचाव और गतिशीलता के विचारों का ध्यान रखते हैं।

आपदा प्रबंधन चक्र अभिव्यक्ति के पीछे यह तर्क दिया जाता है कि आपदा और उसका प्रबंधन अंत:संबद्ध कार्यों का अटूट क्रम है। इसे कभी-कभी आपदा विकास चक्र भी कहा जाता है।

केस अध्ययन द्वारा आपदा चक्र का स्पष्टीकरण – आपदा चक्र में शामिल प्रक्रियाओं को 26 जनवरी, 2001 के गुजरात भूकम्प के मामले में स्पॉट किया जा सकता है।

इस विनाशकारी भूकम्प में हजारों लोग मारे गए और लाखों मकान तथा अन्य इमारतें नष्ट हो गई। राज्य सरकार तथा राष्ट्रीय सरकार ने भी शीघ्र विस्तृत स्तर पर राहत कार्य शुरू किए।

सशस्त्र बलों की सेवाएं भी ली गई। देश के अन्य भागों तथा विश्व के अनेक देशों से भी सैकड़ों गैर-सरकारी संगठन राहत कार्यों में मदद के लिए राहत सामग्री तथा कार्मिकों के साथ गुजरात आए।

सहायता शिविर स्थापित किए गए, भोजन वितरित किया गया, चलते-फिरते अस्पतालों ने हताहतों की मदद करने के लिए दिन-रात कार्य किया। MPA 18 Free Assignment In Hindi

वस्त्र बिस्तर तम्बू और अन्य सामग्री प्रभावित लोगों को वितरित किए गए। मकानों के पुनर्निर्माण कार्यक्रम प्रारंभ किए गए, सामुदायिक इमारतों का पुनर्निर्माण किया गया और क्षतिग्रस्त बुनियादी संरचनाओं की मरम्मत और पुनर्निर्माण किया गया।

प्रभावित लोगों के आर्थिक पुनर्वास के लिए आजीविका कार्यक्रम प्रारंभ किए गए। यह केस अध्ययन दर्शाता है कि भूकम्प के दौरान आपदा घटना कैसी थी,

उसके तुरन्त बाद अनुक्रिया और राहत कार्य कैसा था, इसके बाद पुनर्वास और रिट्रोफिटिंग सहित पुनरुत्थान कैसा था और अंत में विकास प्रक्रिया कैसी थी।

विकास अवस्था में न्यूनीकरण गतिविधियाँ और भावी आपदाओं का सामना करने के लिए अंततः तैयारी कार्यवाही सम्मिलित थी।

जोखिम अल्पीकरण : न्यूनीकरण और तैयारी – जोखिम अल्पीकरण परिप्रेक्ष्य का पूर्वगामी समग्र आपदा जोखिम प्रबंधन दृष्टिकोण है। संपूर्ण आपदा जोखिम प्रबंधन परिप्रेक्ष्य जोखिम अल्पीकरण रूपरेखा का निकटतम अग्रगामी है, MPA 18 Free Assignment In Hindi

जिस पर आजकल बल दिया जा रहा है। संबंधित संगठनों के मध्य निकटतम सहयोग स्थापित करके इन आपदाओं को रोका जा सकता है।

प्रश्न 5. समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन पर एक टिप्पणी लिखिए।

उत्तर-समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन ने 1980 के दशक में विकास के क्षेत्र में ध्यान केन्द्रित किया। हालांकि समुदाय-आधारित आपदा प्रबंधन विगत अनेक वर्षों से लोक प्रचलित शब्द रहा है,

लेकिन बहुत कम विषयों में यह वास्तविक रूप से सरकारी नीति में शामिल हुआ है। आमतौर पर यह माना जाता है कि समुदाय आधारित प्रबंधन आधारिक संगठनों, गैर-सरकारी संगठनों का उत्तरदायित्व है। इस संबंध में दो प्रमुख मुद्दे हैं

1). समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन प्रयास कार्यों की बेहतर प्रणालियां स्थानीय प्रयास बने रहते हैं और उचित तरीके से उनका प्रचार नहीं किया जाता।

2). राष्ट्रीय स्तर पर समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन पहल कार्यों की स्वीकृति की कमी के कारण इन कार्यों को प्रायः सीमित संसाधन दिए जाते हैं। MPA 18 Free Assignment In Hindi

इस प्रकार ज्यादातर क्षेत्रों में समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन कार्यों से अलग जाना जाता है।

इसे राष्ट्रीय विकास नीतियों में भी सम्मिलित नहीं किया जाता है।

इसलिए समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन का आधार समझने की अत्यधिक जरूरत है और स्थायित्व पर विशेष ध्यान देने वाले राष्ट्रीय नीति विषयों में समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन को सम्मिलित करने के लिए रूपरेखा तैयार करने का प्रयास किया जाना चाहिए।

वर्ष 1995 में जापान के कोबे शहर तथा योगी प्रान्त के अन्य भागों में आए ग्रेट हशिन ऐवाजी भूकम्प से जान और माल का भारी नुकसान हुआ।

भूकम्प के तुरंत बाद पड़ोसियों और नाते रिश्तेदारों ने मलबे से बहुत-से लोगों को निकालकर बचाया। सर्वेक्षणों के अध्ययन से पता चलता है कि लगभग 85 प्रतिशत लोगों ने बचाव कार्य किया।

ऐसी घटना आपदा के समय समुदाय और पड़ोस के महत्त्व को प्रदर्शित करती है। सिद्धान्त, कार्यनीतियाँ और चुनौतियाँ क्षेत्र के अनेक उदाहरण महत्त्वपूर्ण संकल्पनाओं की ओर इशारा करते हैं,

जिन्हें समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन के कुछ मूलभूत सिद्धान्त प्राप्त करने के लिए प्रयोग किया जा सकता है जिन मूलभूत सिद्धांतों पर समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन स्थित है वे निम्नलिखित हैं

1). समुदाय विकल्पों पर विचार करके निर्णय लेता है। MPA 18 Free Assignment In Hindi

2). आपदा तैयारी विकास के परिप्रेक्ष्य से की जाती है ।

3). विशेष संवेदनशील समूहों पर ध्यान केन्द्रित करता है।

4). स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों, क्षमताओं और सहभागिता से हस्तक्षेप शुरू होते हैं।

  1. स्थानीय श्रेष्ठ लोगों के प्रतिनिधित्व से समुदाय द्वारा नियोजन, कार्यान्वयन और प्रबंधन।

बुनियादी स्तर पर अपेक्षित क्षमता विकसित करने के लिए इन सिद्धान्तों को कार्यान्वयन कार्यनीतियों में बदला जाता है। प्रत्येक स्थिति योगदान के संयोजन से विशेष समाधान देने योग्य बनाती है। विशेष तौर पर प्रयोग होने वाली कार्यनीतियां और कार्यवाहियां निम्नलिखित हैं

1). जन जागरूकता – जन जागरूकता समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन की संकल्पना का प्रचार-प्रसार करने और स्थानीय रूप से आपदा रोकथाम उपायों के लिए मांग पैदा करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण प्रयास है।

इसे अपने लक्ष्य को व्यक्त करने और समुदायों को अपने पहलुओं को सामने लाने के लिए सशक्तिकरण रूप में समझा जा सकता है।

सार्वजनिक जागरूकता गैर-सरकारी संगठनों द्वारा आयोजित सामुदायिक बैठकें, आयोजन, जनसंचार कार्यक्रमों को आयोजित करके तथा सरकार की ओर से जागरूकता हस्तक्षेप पर आधारित गतिविधि द्वारा पैदा की जाती है। MPA 18 Free Assignment In Hindi

आलमंड और वर्बा (1963) ने राजनीतिक संचार कार्य के लिए राजनीतिक विशेष समूह को जिम्मेदार ठहराया है।

इसका तात्पर्य व्यक्तियों को उनके लाभ के लिए निर्मित सरकारी नीतियों और सरकार द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों के संदर्भ में जानकारी देना, उनको उपलब्ध कराने के लिए समर्थ बनाना है,

क्योंकि ज्यादातर कार्यक्रम इसलिए असफल हो जाते हैं क्योंकि इनके संबंध में व्यक्तियों को जानकारी और सही संसाधन केन्द्रों तक उनकी पहुंच नहीं होती।

सूचना का अधिकार सार्वजनिक जागरूकता का एक महत्त्वपूर्ण भाग है। हालांकि केन्द्र तथा राज्यों में सूचना आयोग स्थापित किए गए हैं, लेकिन इसका सफल कार्यान्वयन इस संबंध में नागरिक समाज की सक्रियता और जनसंचार माध्यमों द्वारा बरती गई सावधानी पर निर्भर करेगा।

2). अनुसंधान और प्रलेखन – समुदाय-आधारित आपदा प्रबंधन के अनुकूल आकार के लिए अधिगम प्रक्रियाएं निर्णायक हैं। प्रत्येक स्थिति के लिए संवेदनशीलता के अनुसार विशिष्ट दखल की जरूरत होती है,

जिनका समयानुसार अध्ययन किया जाना चाहिए, इसलिए निरंतर सामाजिक गतिविधियाँ जाति आधारित समूह संबद्धता और संजातीय पहचान के अन्य रूपों जैसा दस्तावेज तैयार और उन्हें आपदा अनुक्रिया में विगत अनुभवों के आधार पर इच्छानुसार सामाजिक संयोजन के लिए हस्तक्षेप की उचित कार्यनीति बनाना प्रभावी है।

जैसे हाल ही की सूनामी की घटना में पाया गया कि वंचित समूहों तक सहायता नहीं पहुंची, क्योंकि समूह संबद्धता के कारण जाति विचारों पर आधारित नकारात्मक सामाजिक पूँजी दिखाई पड़ी।

आमतौर पर सामाजिक पूर्वाग्रहों व पक्षपातों के कारण महिलाएं और बच्चे सहायता से वंचित रहे। निहित बुनियादी संरचना की भौतिक संवेदनशीलता में समयानुसार सुधार और व्यवस्था की जानी चाहिए।

बीच-बीच में समुदाय आधारित देखरेख और विश्लेषण प्रक्रियाएं और मानचित्रण सर्वेक्षण करते रहना चाहिए। भागीदारी आकलन सबसे ज्यादा उपयोगी होते हैं और इस उद्देश्य के लिए वे आवश्यक भी हैं।

3). क्षमता निर्माण – क्षमता निर्माण का तात्पर्य समुदायों की संरक्षण क्षमता को बढ़ाना है, जो उन्हें आपदाओं से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है। MPA 18 Free Assignment In Hindi

स्थानीय क्षमता निर्माण यह निर्धारित करने का माध्यम है कि बाह्य मदद पर आश्रितता स्थायी नहीं होगी और समुदाय को धीरे-धीरे अपनी दैनिक आवश्यकताओं का ध्यान स्वयं ही रखना होगा।

क्षमता निर्माण न केवल सर्वश्रेष्ठ आपातकालीन अनुक्रिया है, बल्कि वह विकास कार्यवाहियां करने के लिए भी बेहतर है, जिससे भावी आपदाओं का प्रभाव कम होता है।

विश्व आपदा रिपोर्ट (2004), के अनुसार लोग आपदाओं में कैसे जीवित रहते हैं. इससे संबंधित मूल्यांकन कम किया गया है और ऐसे कार्यक्रम भी कम हैं,

जो मुकाबला करने की उनकी कार्यनीतियों पर आधारित हैं, आपदाओं के क्षेत्र में सबसे ज्यादा बल समुदायों में उपलब्ध शक्ति, योग्यताओं और संसाधनों के मूल्यांकन की कीमत पर जरूरतों, जोखिमों और संवेदनशीलताओं के आकलन पर रहा है।

केवल राहत की वस्तुएं वितरित करने की अपेक्षा आपदा के बाद राहत में वैकल्पिक कार्यनीति के रूप में सूक्ष्म वित्त अथवा लघु वित्त, नकद सहायता और आय विकसित करने वाली परियोजनाओं का पता लगाया जा रहा है।

4). नेटवर्किंग – सामाजिक पूँजी का प्रमुख आधार सामाजिक नेटवर्कों का निर्धारण मूल्य होता है, जिसे लागत लाभ मूल्यांकन अथवा नीति कार्यान्वयन और मूल्यांकन में शून्य माना जा सकता है। नेटवर्किंग साझेदारी स्थापित करने की दिशा में प्रथम प्रयास है। MPA 18 Free Assignment In Hindi

यह भागीदारियों को नए मार्ग प्रदान करती है, लागत घटाती है और लाभों में वृद्धि करती है। सामाजिक पूँजी में समस्त गठबंधन अलग-अलग रूपों में, सम्मिलित होते हैं, जैसे कि लोगों के मध्य, संस्थाओं, सरकार और नागरिक समाज के मध्य प्रांत और देशों के बीच आदि।

सामाजिक पूँजी का मूल्यांकन करने के लिए प्रयोग किए जाने वाला स्तर चुने गए अध्ययन से विस्तृत रूप से अलग-अलग होता है।

अनुसंधान बताता है कि सामाजिक पूँजी में ज्यादा मात्रा वाले दो समुदाय अपने आपको ज्यादा दक्षता से व्यवस्थित करने में तीसरे की बजाय सफल रहे, जिसके पास सामाजिक पूँजी का भंडार कम था, विश्व बैंक के तत्वावधान में किए गए सर्वेक्षण में सामाजिक पूँजी निम्नलिखित तीन सूचकों को प्रदर्शित करता है

1). विश्वास -इस सूचक के दो अवयव हैं-दूसरों में विश्वास और संस्थाओं में विश्वास।

2). नागरिक विनियोजन -नागरिक विनियोजन सामाजिक और राजनीतिक विषयों में लोगों की साझेदारी का मापदंड है। इसमें लोगों की ओर से भार ग्रहण करना और सामाजिक तथा राजनीतिक विजयों में उसके लिए व्यवस्थाएं करना है। MPA 18 Free Assignment In Hindi

3). सततता (स्थायित्व) -कार्यक्रम की सफलता का अंतिम निर्धारक उसका स्थायित्व है, जो निवेश और मदद की समय सीमा के पश्चात भी कार्यक्रम जारी रखता है। निरंतरता लोक नीति द्वारा जोखिम न्यूनीकरण को प्रमुख धारा में लाने और निवारक वातावरण पैदा करने के संबंध में देखा जाता है।

स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों को तैयार करना – आपदाओं के तुरंत बाद स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका न्यूनीकरण और तैयारी दोनों में उतनी ही महत्त्वपूर्ण होती है, जितनी कि आम समय के दौरान रोकथाम में होती है।

प्राथमिक स्वास्थ्य निगरानी केन्द्र में समुचित सुविधाएं नहीं होती और जो होती भी हैं, वे बहुत कम तथा आपात स्थितियों से निपटने में अक्षम होती हैं।

इस संदर्भ में गैर-सरकारी संगठनों का योगदान स्थानीय स्तर पर आपदा तैयारी के इस महत्त्वपूर्ण मुद्दे में प्रदर्शित किया जा सकता है। प्रशिक्षित स्वयंसेवकों को इस कार्य में लगाया जा सकता है।

खाद्य सुरक्षा और पोषण की व्यवस्था – भारत में हरित क्रान्ति के बावजूद भी अनेक भागों से कुपोषण के कारण हुई मौतों की सूचनाएं प्राप्त होती हैं।

गरीबों को समुचित कीमतों पर खाद्यान्न और अन्य जरूरी वस्तुएं उपलब्ध करने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली प्रारंभ की गई, थी। MPA 18 Free Assignment In Hindi

लेकिन भ्रष्टाचार के कारण यह कार्यप्रणाली विकृत हो गई सार्वजनिक वितरण प्रणाली से कम दरों पर खाद्य सामग्री, मिट्टी का तेल एवं अन्य दैनिक प्रयोग में काम आने वाली वस्तुएं खरीदकर खुले बाजार में कुँचे दामों पर बेचने जैसी सूचनाएँ मिली हैं। इसलिए दसवीं पंचवर्षीय योजना में आधुनिक चुनौतियों

1). शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष भर उपयुक्त मूल्य पर सब्जियों की उपलब्धता में सुधार लाना।

2). बढ़ती हुई आवादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए खाद्यान्न उत्पादन में सुधार जारी रखना।

3). दालों का उत्पादन बढ़ाना और खपत बढ़ाने के लिए उन्हें उचित मूल्य पर उपलब्ध करना।

4). कम लागत पर गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए मोटे खाद्यान्न का उत्पादन बढ़ाना।

इस प्रकार दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002-07) निम्नलिखित से प्रतिमान में बदलाव की घोषणा की :-

1). राज्य स्तर पर खाद्य सुरक्षा से व्यक्तिगत स्तर पर पोषण सुरक्षा।

2). समस्त पोषण संबंधी जरूरतों की पूर्ति करने के लिए जरूरी खाद्य पदार्थ प्रदान करने के लिए ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने हेतु खाद्यान्नों में आत्मनिर्भरता।

3). केवल उत्पादन से ही फसल के बाद की हानियां कम करना और उचित प्रक्रियाओं से मूल्य संवर्धन।

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भाग-II

प्रश्न 8. आपातकालीन प्रचालन केन्द्रों (EOC) पर एक टिप्पणी लिखिए।

उत्तर-आपात प्रचालन केन्द्र हमेशा भूकम्प जैसी भयंकर आपदाओं के आने पर शीघ्र क्रियाशील एवं कार्य करने के लिए तत्पर अवस्था में रखा जाता है। MPA 18 Free Assignment In Hindi

चेतावनी अथवा प्रथम सूचना रिपोर्ट प्राप्त होते ही आपात प्रचालन केन्द्र पूर्णतः कार्य करना शुरू कर देता है। आपदाओं के दौरान आपात प्रचालन केन्द्र रात-दिन कार्यरत रहता है।

आपात प्रचालन केन्द्र आपदा प्रबंधन अभिकरण के अध्यक्ष के स्पष्ट निर्देश के अंतर्गत कार्य करता है।

राष्ट्रीय आपात प्रचालन केन्द्र देश में आपदा अनुक्रिया से संबंधित समस्त कार्यकलापों का केन्द्र होगा। संसाधनों, आपदा आपूर्तियों और अन्य अनुक्रिया कार्यकलापों के महत्त्वपूर्ण प्रबंधन के लिए नोडल बिन्दु और केन्द्र स्थापित करने होंगे।

इन बिन्दुओं का एक सुव्यवस्थित नेटवर्क होना चाहिए, जो केन्द्र से शुरू होकर राज्य तक और आपदा स्थल तक व्याप्त होना चाहिए।

आपात प्रचालन केन्द्र में प्रचालन संबंधी कार्य को पूर्ण करने की निम्नलिखित विशेषताएँ है

(1. आपातकालीन स्थितियों की जरूरतें पूर्ण करने के लिए कार्यों की योजना बनाने और प्रचालनात्मक स्थान के अनुकूल बनाने की जरूरत होती है।

(2. यह दीर्घावधि के कार्यों की मदद करने योग्य होना चाहिए जैसे यह समयावधि आपात स्थितियों में निर्वाध रूप से हो सकती है। MPA 18 Free Assignment In Hindi

(3. संभावित खतरों से इसकी रक्षा की जानी चाहिए और इसके प्रचालनों की संवेदनशील सूचना का अप्राधिकृत रूप से पता नहीं चलने देना चाहिए। संभावित खतरों से सुविधाओं, उसके अधिवासियों, संचार उपकरणों और प्रणालियों को बचाने के लिए समुचित सुरक्षा और ढांचागत अखण्डता होनी चाहिए।

(4. इसे अनुभवी खतरों के प्रभावों से बचने के लिए सक्षम होना चाहिए और आपात प्रचालन केन्द्र से संचालनों को जारी रखना चाहिए।

(5. उन्हें अन्य आपात प्रचालन केन्द्रों के साथ सामान्य संचालन सिद्धान्तों का आदान-प्रदान करने और उनके साथ दैनिक और समय-सूचना का आदान-प्रदान करने योग्य होना चाहिए।

इसलिए संचार संपर्क प्रणालियाँ जैसे-रेडियो कोड, वेव कनेक्टिविटी पर मुख्य रूप से विचार होना चाहि आपात प्रचालन केन्द्र का उद्देश्य-राष्ट्रीय स्तर पर आपात प्रचालन केन्द्र का लक्ष्य निम्नलिखित कार्यों में से किसी भी अथवा सभी के संबंध में केन्द्रीकृत निर्देश और नियंत्रण प्रदान करता है ।

(1. संचार और चेतावनी।

(2. आपदा के समय आपदा प्रभावित क्षेत्र के समीपवर्ती क्षेत्रों से अतिरिक्त संसाधनों के लिए अनुरोध करना।

(3. आपात संचालन।

(4. केन्द्रीय और राज्य अभिकरणों संबंधी विशेष आपात सूचना और अनुदेश जारी करना, नुकसान आकलन आंकड़ों को समेकित करना, उनका मूल्यांकन करना और प्रचार करना।

(5. अंतर्राष्ट्रीय सहायता और योगदान में समन्वय स्थापित करना।

आपात प्रचालन केन्द्र का स्थान निर्धारण – आपात प्रचालन केन्द्र को सुनिश्चित विन्यास के अनुसार संपूर्ण बुनियादी संरचना वाले उपयुक्त स्थान पर स्थापित किया जाता है MPA 18 Free Assignment In Hindi

(1. आपात प्रचालन केन्द्र का सक्रियण खतरे की संभावना के तुरंत बाद शुरू होना चाहिए।

(2. जो व्यक्ति आपातकाल की घोषणा करता है, वही आपात प्रचालन केन्द्र के स्थान की भी घोषणा करता है।

(3. केन्द्रीय अथवा राज्य सरकार अथवा उसके द्वारा नामित व्यक्ति आपात प्रचालन केन्द्र की आपात सेवाओं को कार्यान्वित करने के लिए पहल करता है।

(4. आपात प्रचालन केन्द्र की सुरक्षा प्रदान का दायित्व पुलिस द्वारा नामित अधिकारियों पर होता है।

(5. आपात प्रचालन केन्द्र में कार्यरत स्टाफ पर रेडियो, टेलीफोन आदि के माध्यम से अपने-अपने संबंधित विभागों से संचार संपर्क स्थापित करने का दायित्व होता है।

आपात प्रचालन केन्द्र में निम्नलिखित व्यक्ति होते हैं

(**). आपात प्रचालन केन्द्र प्रभारी ::- आपात प्रचालन केन्द्र में प्रभारी की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है और वही संगठन, संग्रह में संपूर्ण समन्वय और निर्णयन के लिए जिम्मेदार होता है। वह आपात प्रचालन केन्द्र प्रचालनों और आपदा स्थिति की रिपोर्ट केन्द्र और राज्य अभिकरणों को देता है।

(**). प्रचालन अनुभाग-प्रचालन अनुभाग आपात प्रचालन केन्द्र की सुचारु और योजनाबद्ध प्रक्रिया को निर्धारित करता है।

यह निम्नलिखित कार्य को पूरा करेगा

(1. आपात प्रचालन केन्द्र के प्रकार्यों के लिए वित्त की व्यवस्था करता है।

(2. आपात प्रचालन केन्द्र के प्रबंधन के लिए जिम्मेदारी और कार्य निर्दिष्ट करता है।

(3. संसाधन वस्तु तालिकाओं, आबंटन और उपलब्धता का प्रलेखन करता है।

(4. आने वाले उपकरणों के भण्डारण, संचालन और कार्यकर्ताओं की व्यवस्था करता है।

(**). संबद्ध मंत्रालयों के प्रतिनिधि :;- आमतौर पर निम्नलिखित संबद्ध मंत्रालयों के प्रतिनिधियों को कार्यों में भाग लेने तथा आपात प्रचालन केन्द्र अदिश एवं उनके मूल संगठनों के बीच शीघ्र समन्वय को प्रोत्साहित करने के लिए आपात प्रचालन केन्द्र पर मौजूद रहना चाहिए, MPA 18 Free Assignment In Hindi

ताकि आपदा अनुक्रिया के लिए शनि सूचका पता चारार्थ जसको प्रस्तावित आपात प्रचालन केन्द्र स्टॉफ-आपात प्रचालन केन्द्र में शामिल विभागीय प्रतिनिधियों के अलावा आपात प्रचालन केन्द्र में मूलभूत कार्यों का संचालन करने के लिए का विशेष स्टॉफ की जरूरत होती है। ये निम्नलिखित हैं.

(1. संचार और चेतावनी अधिकारी,
(2. मुख्य कार्यपालक

(3. जन सूचना अधिकारी
(4. सम्पर्क अधिकारी

(5. टेलीफोन प्रचालक
(6. रेडियो प्रचालक

(7. संदेशवाहक
(8. सुरक्षा अधिकारी

(9. आश्रय प्रचालन संपर्क अधिकारी
(10. आपदा आकलन अधिकारी

(11. पुलिस संपर्क अधिकारी
(12. आपातकालीन प्रबंधन निदेशक

(13. अग्निशमन संपर्क अधिकारी
(14. अस्पताल संपर्क अधिकारी।

आपात प्रचालन केन्द्र का अभिविन्यास और डिजाइन-संपूर्ण रूपरेखा वाले आपात प्रचालन केन्द्र के आपात अनुक्रिया प्रयासों में सामंजस्य के लिए सुविधा के रूप में कार्य करना चाहिए, जो महत्त्वपूर्ण और सक्षम हो।

आपात प्रचालन केन्द्र का ऐसा स्वरूप होना चाहिए जो किसी भी गंभीर आपदा घटित होने पर बुलाए गए अत्यधिक प्रतिनिधियों का संचालन कर सके।

आपात प्रचालन केन्द्र के पास उपयोक्ता अनुकूल अभिविन्यास और आपदा प्रतिरोधी भवन में निम्नलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए MPA 18 Free Assignment In Hindi

(1. प्रचालन कक्ष
(2. मनोरंजन कक्ष और कैण्टीन

(3. संचार और विद्युत आपदा उपयोग नियंत्रण कक्ष
(4. भण्डार कक्ष

(5. प्रोजेक्शन प्रणालियाँ
(6. शयनागार
(7. शौचालय।

आवश्यक उपकरण-आपात प्रचालन केन्द्र के लिए चौवीसी घट कार्य करना होगा और आपदा के प्रभाव के कारण प्रतिकूल स्थितियों में हो सकता है। इसे उसकी दक्ष प्रक्रिया प्रणाली के लिए निम्नलिखित सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर होना जरूरी है

(1. संचार उपकरण वाला मोबाइल निर्देश वाहन

(2. संबद्ध मंत्रालयों के समस्त प्रतिनिधियों के लिए कार्य स्टेशन और संचार लाइनें।

(3. वीडियो कांफ्रेसिंग सुविधा

(4. आपातकालीन विद्युत सहायता।

(5. तनावपूर्ण स्थितियों में दीर्घकालीन समय तक तैनात कर्मचारियों के लिए अपेक्षित सुविधाएँ।

(6. चैनलों पर चलने वाले ऐसे रेडियो और टेलीविजन सेट, जिन पर अनेक समाचार प्रसारित होते हों।

(7. शीघ्र पुनः प्राप्ति और मूल्यांकन के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली के प्लेटफॉर्म पर जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर में संसाधनों की वस्तु तालिकाओं और मानचित्रों तथा योजनाओं का डाटाबैंक।

संसाधन वस्तु तालिकाएँ :- संसाधन वस्तु तालिका आपात प्रचालन केन्द्र के कार्यों के लिए अनिवार्य घटक हैं। ऐसी वस्तु तालिकाओं को राष्ट्रीय और राज्य स्तरों पर नियमित रूप से अद्यतन करके तैयार करना चाहिए। वस्तु तालिकाओं में निम्नलिखित मूल घटक और अन्य स्थानीय रूप से प्रासंगिक सूचना सम्मिलित होती है

1). राहत सामग्री की विशेष विवरणों की सूची और दर अनुसूचियाँ जो स्थानीय मदद अभिकरणों और बाजारों से लिए जा सकते हैं।

2). उन समस्त उपकरणों की विशेष विवरणों की सूची और उपलब्धता प्रक्रिया जो आपात की अनुक्रिया करने के लिए उपयोगी हो सकते हैं। MPA 18 Free Assignment In Hindi

3). आपात प्रबंधन से संबंधित समस्त कार्यकर्ताओं और संस्थाओं के संपर्क विवरण।

क्षेत्र समन्वय प्रणाली :- आपात प्रचालन केन्द्र को क्षेत्र में अपना क्षेत्र दल को भेजना और उनके माध्यम से क्षेत्र समन्वय प्रणाली स्थापित करनी पड़ती है। प्रणाली में निम्नलिखित शामिल होंगे

1). क्षेत्र सूचना संग्रह।

2). क्षेत्र स्तर पर अंत:अभिकरण समन्वय।

3). क्षेत्र निर्देश।

4). क्षेत्र प्रचालनों, योजना, संभारतंत्र, वित्त और प्रशासन का प्रबंधन।

5). स्वरित आकलन दल और शीघ्र अनुक्रिया दल।

ज्यादातर मामलों में आपात प्रचालन केन्द्र ने बेहतर भूमिका निभाई है। यहां तक कि जिन मामलों में आपात प्रचालन केन्द्र ने आपदा योजना के लिए कोई योजना नहीं बनाई है,

तब भी कार्यकलाप के केन्द्रीय स्थल के रूप में आपात स्थिति के दौरान सहजता से आगे आने की संभावना रहती है। लगभग 180 स्थानीय आपदाओं का सर्वेक्षण किया गया, जिससे बाद में आपात प्रचालन केन्द्रों की सफलता की उच्च दर उभरकर सामने आई है, फिर भी कुछ समस्याएं आती हैं। जैसे

1). आपात प्रचालन केन्द्रों की संख्या-विभिन्न क्षेत्रों में अनेक आपात प्रचालन केन्द्र विकसित हो सकते हैं, जो आपदा की स्थिति को अव्यवस्थित बना सकते हैं।

बाहरी अभिकरणों को ज्ञात नहीं होता है कि किससे, कहाँ और कब संपर्क करना है। ऐसी स्थिति में संगठनात्मक समन्वय में भयंकर समस्या हो सकती है। MPA 18 Free Assignment In Hindi

2). वैकल्पिक आपात प्रचालन केन्द्र स्थल-यदि मूल सुविधाएं प्रयोग न की जाए, तो वैकिल्पक स्थान की व्यवस्था की जाती है। यह अनुमान लगाया गया है कि ज्यादा-से-ज्यादा आपदाओं के साँचा भाग के लिए आपदा केन्द्र को हटाना समस्या वाचाया है।

3. आपात प्रचालन केन्द्र स्थान निर्धारण के संबंध में जानकारी-कार्यकलापों से पता चला है कि महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों और संगठनों को आपात प्रचालन केन्द्र के संबंध में जानकारी नहीं होती क्योंकि इनका आपदा प्रबंधन योजनाओं में वर्णन नहीं होता है,

क्योंकि यह आपदा प्रबंधन अभ्यासों तक में भी इन्हें प्रमुख रूप से प्रस्तुत नहीं किया जाता।

4). आपात प्रचालन केन्द्र प्रबंधन के उत्तरदायित्व-प्रबंधन के उत्तरदायित्व के संबंध में आपदा योजना में विशिष्टतापूर्वक वर्णन किया जाना चाहिए कि किस संगठन को कौन-सा स्थान आबंटित किया जाए।

5). निर्णय करने वाले प्राधिकरण के साथ उनकी उपस्थिति-आपात प्रचालन केन्द्रों में तैनात जनसमूह आमतौर पर संबंधित संगठनों के मध्य स्तर के व्यक्ति होते हैं।

इन कार्मिकों को ऐसा नेतृत्व, नवीनता और सृजनशीलता प्रदर्शित करने के बदले अपने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों का पालन सख्ती के साथ कराया जाता है। इसलिए यह माना जाता है कि संबंधित संगठनों से उच्च स्तर के कार्मिक सम्मिलित किए जाने चाहिए। MPA 18 Free Assignment In Hindi

6 ). आपात प्रचालन केन्द्र में प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन-निजी क्षेत्र के रेडक्रॉस और निजी उपयोगिता कम्पनियों को कुछ प्रमुख संगठनों आपात प्रचालन केन्द्रों से अलग रखा जाता है।

अस्पताल एक अन्य महत्त्वपूर्ण केन्द्र है, जिसे आपात प्रचालन केन्द्र में शामिल नहीं किया जाता।

प्रश्न 10. आपदाओं और विकास के बीच संबंध का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर-निवारण तभी संभव है, जब विकास योजना प्रक्रिया में न्यूनीकरण मुद्दों का समावेश किया जाए। प्राकृतिक जोखिमों से होने वाली आपदाएँ, जैसे-बाढ़, चक्रवात, सूखा, भूकम्प, आग और ज्यादातर अन्य खतरे विभिन्न प्रकार से विकास को प्रभावित करती हैं।

आपदाएँ बुनियादी संरचनाओं और जीवनदायी एवं प्रमुख सुविधाओं को नुकसान पहुंचाती हैं, जिसके फलस्वरूप मानवीय, आर्थिक और पर्यावरणीय हानियां होती हैं। आपदा निवारण के कुछ उद्धरण जो अनेक स्रोतों लिए गए हैं, इस प्रकार है

1 ). चीन में 40 वर्षों के दौरान बाढ़ रोकथाम के उपायों में किए गए 3.15 बिलियन अमरीकी डॉलर के निवेश से माना जाता है कि 12 बिलियन अमरीकी डॉलर का संभावित नुकसान रोका जा सका।

2 ). ऑक्सफैम के अनुसार 1998 की बाढ़ के दौरान बंगलादेश में 4 एकड़ के क्षेत्र में बने बाढ़ आश्रय में बचाए गए पशुओं का मूल्य कम-से-कम 150,000 डॉलर था, जबकि आश्रय निर्माण पर 8.650 डॉलर का खर्च आया।

3 ). वियतनाम में रेडक्रॉस द्वारा 12 हजार हैक्टेयर भूमि में कच्छ वनस्पति लगाने से 110 किमी. समुद्री बाँध की रक्षा की जा सकी। MPA 18 Free Assignment In Hindi

जबकि वनस्पति लगाने और उसकी सुरक्षा पर खर्च लगभग 11 लाख अमरीकी डॉलर हुआ, लेकिन बाँध की देखरेख पर खर्च में प्रतिवर्ष लगभग 73 लाख अमरीकी डॉलर की कमी आई और कच्छ वनस्पति ने बाँध के पीछे रहने वाले 7,750 परिवारों की रक्षा की है।

आपदा और विकास के बीच संबंधों पर विचार करने के बाद इस संबंध में अलग-अलग चार आयामों की पहचान कर सकते हैं

आपदाएँ विकास में रुकावट डाल सकती है :– आपदाएँ दशकों के आर्थिक और सामाजिक विकास को समाप्त कर सकती हैं, जो बहुत समय के बाद मिल पाते हैं। वर्ष 1982 में झंझावत आइजैक ने टोगान द्वीपसमूह (आर्किपेलागो) में 22 प्रतिशत घरों को नज़्ट कर दिया।

वर्ष 2000 में मोजाम्बिक के जल प्लानन से जिल और सफाई ऊजा, दूरसंचार सड़की और रेलवे की बुनियादी संरचना भी हुए नुकसान में सुधार करने की विनिर्माण लागत 16.53 करोड़ अमरीकी डॉलर आई थी।

वियतनाम में सामान्य वर्षों में आप्लावन औसतन 3,00,000 टन खाद्य पदार्थ नष्ट कर देता है।

इसके अलावा आपदा पुनरुत्थान के लिए अनियोजित बजट आवंटन विकास हस्तक्षेपों को बाधित कर सकता है और परिणामतः विकास लक्ष्य पूरे नहीं होते हैं। इसलिए आपदाएं विकास संसाधन आवंटन की प्रभावशीलता में बाधा डालती हैं। MPA 18 Free Assignment In Hindi

आपदाओं द्वारा आमतौर पर प्रभावित देशों को मानव पूंजी की कमी के कारण पैदा हुई परेशानियों का मुकाबला करना पड़ता है, क्योंकि भारी मात्रा में लोग प्रभावित होते हैं और नेमी कार्यों को निर्वहन नहीं कर पाते।

आपदाएँ नए निवेश की उपलब्धता घटाती हैं, इससे क्षेत्र का विकास और संकुचित हो जाता है। आपदाएं सामाजिक विकास को सीमित कर सकती हैं, जो आबादी प्राकृतिक आपदा द्वारा कमजोर और कम कर दी गई है,

विशेष रूप से जब एच.आई.वी./एड्स, कुपोषण अथवा सशस्त्र संघर्ष होता है, ऐसे में सिंचाई कार्यों की देखरेख में, जल संचयन के लिए खेतों में पुश्तों के निर्माण आदि के लिए संगठनात्मक शक्ति कम ही होगी। इन सामाजिक परिसम्पत्तियों के बिना समुदाय ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं।

आपदाएँ विभिन्न मैक्रोइकोनॉमिक प्रक्रियाओं के माध्यम से गरीबी कई गुना बढ़ा देती हैं।

इनमें कम समय हानियों, जैसे-परिसम्पत्ति की हानियों के बाद ज्यादा तीव्र दीर्घकालिक प्रभाव, सामाजिक खर्च में कमी और आपदा के बाद की मुद्रा स्फीति से विशेष रूप से बाढ़ अथवा सूखे के बाद खाद्यान्नों की कीमतों पर पड़ते हैं। MPA 18 Free Assignment In Hindi

जिम्बाब्वे में वर्ष 1991-92 के सूखे के कारण 1992 के अंत तक मुद्रा स्फीति बढ़कर 46 प्रतिशत हो गई और खाद्यान्न कीमतों में स्फीति 72 प्रतिशत तक पहुंच गई।

यह विकास में मंदी का कुचक़ शुरू कर देता है, |जिससे आय में कमी होती है, जो गरीबों को अनुपात से ज्यादा प्रभावित करता है।

आपदाएँ विकास के अवसर प्रदान कर सकती हैं – आपदा घटनाएँ सदैव विकास को आपदा के तत्काल बाद बढ़ावा देती हैं। वे घटना के बाद की अवधि में विकास नीति को प्रेरणा प्रदान करती हैं।

आपदा की संभावना के कारण ज्यादातर पुनर्निर्माण और सामाजिक विकास योजनाएं शुरू की जाती हैं, जिन पर ध्यान ही नहीं दिया जाता। पुनरुत्थान स्थिति विकास योजना के लिए प्रमुख अवसर प्रदान करती है।

भारत सरकार के अनुरोध पर एशियाई विकास बैंक, संयुक्त राष्ट्र तथा विश्व बैंक ने साथ मिलकर एक संयुक्त आकलन मिशन स्थापित किया, जिसके तहत अलग-अलग विधाओं और सुसंबद्ध व्यवसायों से विशेषज्ञ लेकर आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल तथा पाण्डिचेरी में सूनामी से हुई हानि का आकलन करने तथा क्षेत्र के सर्वेक्षणों के आधार पर पुनरुत्थान के लिए उचित सिफारिशें करने का अनुरोध किया गया था।

संयुक्त आकलन मिशन ने सिफारिश की कि आपदा के प्रभाव पर विचार करते हुए पुनर्निर्माण में प्रशासनिक परिप्रेक्ष्य सहयोगशील, लोचशील, विकेन्द्रीकृत, साम्यमूलक और पारदर्शी होना चाहिए और इसे आजीविका पुनर्स्थापन के अलावा अच्छे तटीय और जोखिम प्रबंधन के लिए वास्तविक अल्पकालिक और मध्यकालिक लक्ष्यों के माध्यम से सशक्त नीति अपनानी चाहिए। MPA 18 Free Assignment In Hindi

ज्यादातर राहत सहायता पर ज्यादा ध्यान दिए जाने के कारण विकास अवसरों से समझौता करना पड़ता है, जो लोगों की आजादी में रुकावट पैदा करता है और उद्यमशील प्रयासों को रोक देता है।

विकास संवेदनशीलता बढ़ा सकता है – सामाजिक और आर्थिक विकास समुदायों की आपदा जोखिमों के प्रति संवेदशीलता बढ़ा सकता है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं,

जो आर्थिक विकास आपदा जोखिमों को बढ़ाते हैं। बंगलादेश और वियतनाम में झींगा पालन के लिए रक्षात्मक मैंग्रोव के कटाव से आंधी और प्रदूषण के कारण हानि में वृद्धि हुई है।

पहाड़ी ढलानों पर व्यापक निर्वनीकरण ने भूस्खलन की संवेदनशीलता बढ़ाई यह कल्पना करना जटिल कार्य है कि सामाजिक विकास में बढ़ोतरी आपदाओं के खतरों को बढ़ा सकती है।

ऐसी स्थिति जो वास्तविक रूप से सामाजिक विकास को जोखिम के आकस्मिक कारक के रूप में रखती है, वह केवल वहीं संभव हो सकती है।

जहां लोग अपनी जरूरतों और इच्छाओं को पूर्ति के लिए स्वयं को अथवा अन्य को खतरों से अरक्षित रखने के लिए विवश होते है।

प्राकृतिक आपदाओं में और संवेदनशीलता में भयानक वृद्धि से विश्व समुदाय इसका सामना करने के लिए अपने प्रयासों को मजबूत कर रहे हैं। MPA 18 Free Assignment In Hindi

हमेशा शिक्षा और सूचना को सुलभता के अभाव का संवेदनशीलता के लिए ज्यादा विस्तृत प्रभाव होता है, क्योंकि लोगों को संवेदनशीलता अल्पीकरण के लिए उपलब्ध विकल्पों की जानकारी नहीं होती।

विकास संवेदनशीलता को कम कर सकता है – यदि विकास संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए एजेंट के रूप में कार्य कर सकता है तो यह कभी-कभी लोगों की संवेदनशीलता कम भी कर सकता है।

आपदा जोखिम बढ़ाए बिना आर्थिक विकास के लिए विकास योजना के कुछ संभावित परस्पर विरोधी चालकों का निवारण करना जरूरी होता है।

प्रथम, ऐसी सम्पत्ति का उत्पादन जो मानव विकास के मूलभूत स्तर को ऊपर उठा सके और द्वितीय, सम्पत्ति का वितरण जो सबसे ज्यादा गरीब को मानवीय संवेदनशीलता का सामना करने के लिए सक्षम बना सके।

आर्थिक विकास के अतिरिक्त सामाजिक विकास भी विकास कार्यसूची में सुनिश्चित आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए शासन पद्धतियों को सुव्यवस्थित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आपदा जोखिम कम करने के लिए शासन व्यवस्था को उनके प्रति संवेदनशील होना जरूरी है, जो जोखिम में और संपूर्ण उपायों के साथ समय पर मदद सुलभ कर सकते हैं।

सामाजिक विकास में जागरूकता/शिक्षा और स्वास्थ्य भी शामिल होंगे। आपदा घटना के बाद बेहतर पोषित ज्यादा स्वस्थ आबादी, जिसमें बच्चों का टीकाकरण भी सम्मिलित है, घरों, आश्रय और आपदा द्वारा विस्थापितों के लिए स्थापित शिविरों में अच्छे तरीके से कार्य कर सकते हैं। MPA 18 Free Assignment In Hindi

भूमंडलीकरण का प्रभाव – अधिकतर विकासशील देशों में विकास तीव्रता से हुआ है, हालांकि यह प्रमुखतः वैश्वीकरण के कारण माना जाता है, क्योंकि पर्यटन बहुत बढ़ गया है और इसके फलस्वरूप बुनियादी संरचना का विकास हुआ है।

इसके अलावा अधिकतर लोग इतने समृद्ध हैं कि मनोरंजन के लिए यात्राओं पर खर्च करना उनकी शीर्षतम प्राथमिकता है, जो उन्हें अप्रत्याशित महाविनाश के लिए संवेदनशील बनाती है।

इसने भी आकर्षक पर्यटन स्थानों में ज्यादा निर्माण कार्यों को बढ़ावा दिया है।

इसके बावजूद भी यह कहा जा सकता है कि देशों के बीच बढ़ी हुई यात्रा और देशों के बीच मुक्त व्यापार के कारण विकासशील देशों को आर्थिक लाभ हुए हैं, जहां रोजगार के अवसर अर्थव्यवस्था में आई व्यवसायों की वृद्धि के अनुसार बढ़े हैं।

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