IGNOU MPA 16 Solved Free Hindi Assignment 2022- Helpfirst

MPA 16

विकेन्द्रीकरण और स्थानीय शासन

MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

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MPA 16 Free Assignment In Hindi jan 2022

प्रश्न 1. भारत में लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण के विकास और महत्व की चर्चा कीजिए।

उत्तर-विगत अनेक वर्षों से यह अनुभव किया गया कि विकसित लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण की मूल भावना का अनुपालन सीमित रूप से हो रहा है। 1959 में पंचायती राज की स्थापना से ही योजना प्रक्रिया के मूलभूत अथवा बुनियादी स्तर पर शासन एक बड़ी चिन्ता का विषय रहा है।

भारत में विकेन्द्रीकृत शासन की दिशा में 73वां और 74वां संविधान संशोधन महत्त्वपूर्ण प्रयास रहे हैं। 73वां संविधान संशोधन अधिनियम ग्रामीण स्थानीय संस्थाओं में सुधारों से संबंधित है, जबकि 74वां संविधान संशोधन अधिनियम शहरी स्थानीय संस्थाओं में सुधारों से संबंधित है।

ये संविधान संशोधन ग्रामीण एवं शहरी स्थानीय संस्थाओं की संवैधानिक मान्यता पर आधारित हैं। इन अधिनियमों का प्रमुख उद्देश्य योजना प्रक्रिया में नागरिकों की सहभागिता को जोड़ना है।

ग्रामीण क्षेत्रों में लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण-स्वतंत्रता के पश्चात ग्रामीण विकास कार्यक्रमों का प्रमुख लक्ष्य विकास प्रक्रिया में सक्रिय सहभागिता द्वारा निर्धन वर्ग का जीवन स्तर सुधारना था।

विकास की प्रक्रिया में ग्रामीणों की सहभागिता को बढ़ाने के लिए तथा विकेन्द्रित योजना में उन्हें सम्मिलित करने के लिए भारत सरकार ने 1992 में 73वां संविधान संशोधन किया, जिसके माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुई।MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

73वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान पंचायतों को स्थानीय स्वसशासन की संस्थाओं के रूप में देखता है, जिन्हें राज्य विधानमण्डल की तरफ से अधिकारों और कार्यों द्वारा हस्तांतरण का अधिकार है।

ग्राम पंचायतों को योजना निर्माण की जिम्मेदारी दी गई, जिसे ग्रामीण लोगों द्वारा ग्रामसभा के माध्यम से पूरा किया जाता है। यह संशोधन जिला स्तर और निचले स्तरों तक विकेन्द्रीकृत शासन प्रदान करता है।

इस संशोधन द्वारा जिला, खण्ड और गाँव स्तर पर जनअभिकेन्द्रित संस्थाओं की स्थापना की गई है। इस संशोधन में 11वीं अनुसूची में पंचायती राज संस्थाओं को हस्तारित किए जाने वाले 29 विषयों को सूचीबद्ध किया गया है।

इन संविधान संशोधनों द्वारा राज्य चुनाव आयोग और राज्य वित्त आयोग की भी स्थापना की गई है, जिनसे ग्रामीण क्षेत्रों में लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण की प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण सुधार हुआ है।

शहरी क्षेत्रों में लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण-वर्तमान दशकों में अनेक अन्य विकासशील देशों की तरह भारत में तीव्र गति से प्रगति हुई है। 20वीं शताब्दी में भारत की शहरी जनसंख्या 10 प्रतिशत थी, जो 1990 के दशक में 26 प्रतिशत तक पहुंच गई। अनुमान लगाया जा रहा है कि 2025 तक भारत की आधी जनसंख्या शहरी जनसंख्या होगी। MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

दसवीं पंचवर्षीय योजना के अनुसार 2020 तक शहरी जनसंख्या कुल जनसंख्या के 28 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत तक हो जाएगी। MPA 16 Free Assignment In Hindi

स्थानीय सरकार की संस्थाओं के रूप में नगर संस्थाएं, जैसे-पंचायतें, संरचनात्मक, कार्यात्मक और वित्तीय समस्याओं के कारण सुचारु रूप से कार्य नहीं कर रही हैं।

उन्हें मजबूती प्रदान करने के लिए समय-समय पर अनेक समितियां और आयोग गठित किए गए हैं। शहरी शासन को सशक्त बनाने के लिए भारतीय संसद ने 1992 में 74वें संविधान संशोधन अधिनियम को लागू किया।

यह अधिनियम न केवल शहरी स्थानीय संस्थाओं को संवैधानिक स्थिति प्रदान करता है, अपितु उनकी लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली, संसाधनों और अधिकारों को सशक्त बनाने के लिए अनेक उपाय सम्मिलित करता है।

इस अधिनियम का प्रमुख लक्ष्य विकेन्द्रीकरण पर अधिक ध्यान देना और शहरी क्षेत्रों में लोकतांत्रिक संरचना स्थापित करना है।

जनजातीय और अनुसूचित क्षेत्रों में लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण-पाँचवीं और छठी अनुसूची के माध्यम से संविधान में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के हितों, उनकी स्वायत्तता और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

पाँचवीं अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय अधिकार वाले क्षेत्रों की और राज्य स्तर पर सलाहकार परिषद के गठन की अधिसूचना जारी करती है।

छठी अनुसूची स्वायत्त जिला परिषद और स्वायत्त क्षेत्रों की स्थापना करती है, जिन्हें वैधानिक, न्यायिक, कार्यकारिणी और वित्तीय अधिकार प्रदान किए गए हैं। MPA 16 Free Assignment In Hindi

जनजातीय और अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायती राज संस्थाओं की तरह संरचनाएं बनाने के लिए व्यापक विवरण तैयार करने के लिए भारत सरकार ने दिलीप सिंह भूरिया की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया। इस समिति ने निम्नलिखित अनुशंसाएं प्रस्तुत की गई हैं

ग्राम सभा-73वें संशोधन की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता प्रत्यक्ष लोकतन्त्र की संस्था ग्राम सभा को मान्यता प्रदान करना है। गाँवों के समूह के अन्दर के सभी वयस्क निवासी ग्राम सभा के सदस्य होते हैं और इस कारण देश में प्रत्यक्ष लोकतंत्र की यह एकमात्र संस्था है।

ग्राम पंचायत-देश में पंचायती राज का निचला स्तर ग्राम स्तरीय पंचायत होता है। पंचायत के रूप में यह अधिकांश राज्यों में जाना जाता है। MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

ग्राम पंचायत की सदस्य संख्या का निर्धारण गाँव की जनसंख्या के आधार पर किया जाता है। इसी कारण प्रत्येक गाँव की पंचायतों की सदस्य संख्या भिन्न-भिन्न होती है।

चुनाव एकल सदस्य चुनाव क्षेत्र के आधार पर करवाए जाते हैं। कुल सीटों की संख्या का एक-तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित होता है और कुछ अनुसूचित जातियों और जनजातियों की महिलाओं के लिए आरक्षित होता है।

खण्ड/ताल्लुक स्तर की संस्था-यह समिति द्वारा प्रस्तावित अगली उच्चस्तरीय संस्था है। समिति ने जिला स्तर पर स्वायत्त जिला परिषद की चुनी हुई संस्था का भी सुझाव दिया है, जिसे छठी अनुसूची के अंतर्गत शामिल जनजातीय क्षेत्रों के लिए वैधानिक, कार्यकारी और न्यायिक अधिकार प्राप्त होंगे।

भूरिया समिति ने सामान्य संदर्भ में सुझाव दिया कि अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्रों को बढ़ती ऋणग्रस्तता, भूमि हस्तांतरण, वन कटाई, पारिस्थितिकीय विकार, औद्योगिकीकरण और आधुनिकीकरण के कारण होने वाले विस्थापन, आबकारी नीति, मद्य एवं नशीले द्रव्य व्यसन, जल संग्रह आदि समस्याओं के समाधान के लिए पर्याप्त अधिकार प्रदान किए जाने चाहिए। MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण का महत्त्व MPA 16 Free Assignment In Hindi

विकेन्द्रीकरण एक ऐसी व्यवस्था होती है, जिसमें आदेश देने का अंतिम अधिकार और परिणामों की अंतिम जिम्मेदारी देश के विभिन्न भागों में स्थित घटकों की होती है।

आज प्रशासन में तेजी से विकास और सामाजिक-आर्थिक बदलाव हो रहे हैं, इसलिए विकासशील देशों में अब इस बात को लेकर चिंता है कि विकास के क्या नए तरीके अपनाए जाएँ, विकेन्द्रीकरण इस दिशा उमें आशान्वित करता है।

विकेन्द्रीकरण में प्रशासन को नागरिकों के स्तर तक लाना और उपभोक्ता वर्ग तथा प्रशासन के बीच प्रत्यक्ष संबंधों की स्थापना करना इसके महत्त्व को दर्शाता है।

विकेन्द्रीकरण को आज महत्त्व दिए जाने के कई कारण हैं-पहला , इसे प्रशासन के स्थानीय एककों से जल्दी-से-जल्दी खाद्य, आवास, पानी जैसी बुनियादी सार्वजनिक सेवाओं की आपूर्ति की आवश्यकता के कारण। दूसरा, विकासशील देशों की अधिकांश जनता का गाँवों में निवास है।

ये ग्रामीण क्षेत्र प्रायः शहरों से कटे रहते हैं, इसलिए इन्हें शहरों से जोड़ने के लिए विकेन्द्रीकरण महत्त्वपूर्ण उपाय है। देश में क्षेत्रीय समस्याओं के जवाब में प्रशासन को विकेन्द्रीकृत करने की जरूरत है।

प्रशासन के क्षेत्रों और स्थानीय बस्तियों में से निकल आने से क्षेत्रीय और स्थानीय संसाधनों का प्रयोग होगा। इस प्रकार विकेन्द्रीकरण से विकास सुविधाजनक बनता है।

राजनीतिक संदर्भ में स्थानीय भागीदारी से योजना बनाने का काम आसान हो जाता है। इसके माध्यम से स्थानीय लोग अपनी आवाज बुलंद कर सकते हैं।MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

प्रशासन की दृष्टि से विकेन्द्रीकरण का महत्त्व इस बात से साबित होता है कि स्थानीय क्षेत्रों को अधिशासित करने की स्थानीय क्षमता स्थानीय मुद्दों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में लगातार भागीदारी के जरिए और भी बढ़ जाती है।

अतः यह कहा जा सकता है कि विकेन्द्रीकरण से यह आशा की जाती है कि वह स्थानीय लोगों की भागीदारी और उनके समर्थन को विकास की गतिविधियों में लगाएगा।

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प्रश्न 3. विकेन्दीकरण के राजनीतिक प्रशासनिक घटकों को वर्णन कीजिए तथा उन्हें सदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक उपाय सुझाइए।

उत्तर-विकेन्द्रीकरण का राजनीतिक प्रशासनिक घटक-विकेन्द्रित विकास को सफल बनाने के लिए राज्य सरकारों के लिए यह जरूरी है कि संविधान संशोधन के 73वें और 74वें अधिनियमों के प्रावधानों को लागू किया जाए।

इन अधिनियमों में गावों और शहरों के संपूर्ण विकास के लिए पंचायती राज संस्थाओं तथा शहरी निकायों पर महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

स्थानीय संस्थाओं के संबंध में जनता के मन में विश्वास उत्पन्न करने के लिए उत्तरदायित्व एक प्रमुख तत्त्व है। पंचायती राज संस्थाओं तथा शहरी स्थानीय निकायों में सफलता प्राप्त करने के लिए उत्तरदायित्व पर बल देना होगा, क्योंकि जनता अपने प्रतिनिधियों से यह आशा करती है कि वे उनकी इच्छाओं और जरूरतों के प्रति जिम्मेदार हों।

उत्तरदायित्व के सिद्धान्त को ध्यान में रखकर अनेक राज्यों ने वित्तीय लेखा परीक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। जहां तक कार्यप्रणाली का प्रश्न है तो यह प्रमुख रूप से ग्राम सभा द्वारा निर्धारित की गई है, जहां पंचायती राज संस्थाओं के सदस्यों से यह आशा की जाती है कि वे जनता की समस्याओं का समाधान करेंगे।

स्थानीय निकायों में विधानसभा सदस्यों तथा संसद सदस्यों का प्रतिनिधित्व-जहां तक स्थानीय निकायों तथा पंचायती राज संस्थाओं में विधानसभा सदस्यों एवं संसद सदस्यों के प्रतिनिधित्व का सवाल है,

सर्वेक्षणों के अध्ययनों से पता चलता है कि अधिकतर राज्यों में विधानसभा के सदस्य तथा संसद सदस्य ब्लॉक पंचायतों तथा जिला परिषदों के सदस्य भी रहे हैं एवं उनको पंचायतों की बैठकों में मतदान का अधिकार है।

मध्य प्रदेश एवं हिमाचल प्रदेश में उन्हें पंचायत तथा जिला परिषदों में अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष के चुनाव में एवं उनको हटाने में मतदान का अधिकार नहीं है।

केरल, महाराष्ट्र तथा राजस्थान जैसे राज्यों में ब्लॉक एवं जिला पंचायतों में विधानसभा के सदस्यों तथा संसद सदस्यों को प्रतिनिधित्व का प्रावधान नहीं है,

इसके विपरीत तमिलनाडु में केवल जिला पंचायतों में प्रतिनिधित्व का प्रावधान है। उत्तर प्रदेश में भी दोनों स्तरों पर उनको मतदान का अधिकार नहीं है।MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

गुजरात में ब्लॉक पंचायत में केवल विधानसभा के सदस्यों को अधिकार है, जबकि जिला पंचायतों में विधानसभा एवं संसद सदस्य दोनों को मतदान का अधिकार नहीं है। MPA 16 Free Assignment In Hindi

नौकरशाही की भूमिका-पंचायती राज संस्थाओं तथा शहरी स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली निर्वाचित सदस्यों के मध्य समन्वय एवं सहयोग की दृष्टि से कार्यात्मक संबंधों की सरलता पर निर्भर करती है। तथा अव्यवस्थित प्रवृत्तियों की ओर ध्यान केन्द्रित करती है।

राज्य अधिनियमों ने नौकरशाही के माध्यम से राज्य सरकार को नियंत्रित करने, पर्यवेक्षण करने, भंग करने की शक्तियां एवं प्रस्तावों को समाप्त करने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए हैं।

नौकरशाही अधिकतर राज्यों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की बजाय अच्छी स्थिति में है। आंध्र प्रदेश के मामले में मंडल परिषदों और जिला परिषदों पर नियंत्रण का अधिकार पंचायती राज आयुक्त को दिया गया है।

इसके अतिरिक्त जिलाधीश जिला प्रशासन के प्रमुख के रूप में जिले में विकास कार्यों का समन्वय करता रहेगा। 1996 में मध्य प्रदेश सरकार ने जिला सरकारों की स्थापना करके प्रशासनिक संरचना तथा पंचायती राज संस्थाओं की संरचना में परिवर्तन कर दिया।

यह बदलाव पंचायतों को अधिक शक्तिशाली एवं जनोन्मुख बनाने के लिए किया गया। मध्य प्रदेश में जिला सरकारों का गठन विकेन्द्रीकरण प्रक्रिया तथा सरकार को ज्यादा जिम्मेदार एवं लोकतांत्रिक बनाने के अनुरूप है। MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

जिला सरकारों को सभी जिला स्तरीय विकास योजनाओं एवं कार्यों तथा योजनाओं की समीक्षा, उनका पर्यवेक्षण एवं जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। MPA 16 Free Assignment In Hindi

पंजाब में नौकरशाही को इन संस्थाओं के नियंत्रण और पर्यवेक्षण की वास्तविक शक्तियां प्रदान की गई हैं, जिससे जन शासन के विपरीत अधिकारी शासन हो गया है।

जिला ग्रामीण विकास अभिकरण की भूमिका-जब विकेन्द्रीकरण की नई व्यवस्था संचालित हुई, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (DRDA) का एक स्वतंत्र अस्तित्व था- जिला स्तर पर हैध स्थिति को दूर करने के लिए केनं सरकार ने1996 में जिला ग्रामीण विकास अभिकरण को पंचायती राज संस्थाओं के नियंत्रण में लाने की अनुशंसा की आंध्र प्रदेश में जिला ग्रामीण विकास अभिकरण का ग्राम विकास का अपना अलग कार्यक्रम है।

जो जिला परिषद की कार्यवाही योजना से अलग है। केरल में जिला ग्रामीण विकास अभिकरणा को जिला पंचायत के साथ मिला दिया गया है। MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा कर्नाटक ने भी जिला ग्रामीण विकास अभिकरण को जिला परिषद में मिला दिया है जबकि राजस्थान, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, हरियाणा आदि राज्यों में जिला ग्रामीण विकास अभिकरण अभी भी स्वतंत्रतापूर्वक कार्य कर रहा है।

जिला योजना समिति-74वें संविधान संशोधन अधिनियम के अनुच्छेद 243 जैड(डी) के तहत जिला योजना समिति को संवैधानिक स्थिति प्रदान की गई है। जिला योजना समिति पंचायतों और नगरपालिकाओं द्वारा निर्मित योजनाओं को संघटित करके संपूर्ण जिले हेतु प्रारूप विकास योजना के लिए अधिकृत करती है।

जहां तक जिला योजना समिति के गठन का प्रश्न है, सर्वेक्षणों से पता चलता है कि अनेक राज्यों में जिला योजना समिति का गठन नहीं किया गया है,MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

जबकि हरियाणा और उड़ीसा जैसे कुछ राज्यों में यह गठन की प्रक्रिया में है कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडू, उत्तर प्रदेश तथा पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में जिला योजना समिति का गठन पहले ही कर लिया गया है।

जहां तक जिला योजना समिति के कार्यों और शक्तियों का सवाल है, यहां भी अंतर और द्वैधता दिखाई देती है। अनुच्छेद 243 जैड (2) जिला योजना समिति के कार्यों के निर्धारण के लिए राज्य विधानसभा को अधिकृत करता है।

अधिकतर राज्यों द्वारा सम्बन्धित पंचायत अधिनियमों में किन्हीं विशेष कार्यों का निर्धारण नहीं किया गया है। कुछ राज्यों में जिला योजना समिति की विशेष भूमिका तथा कार्यों का उल्लेख किया गया है।

विकेन्द्रित विकास के सामाजिक-आर्थिक तथा राजनीतिक-प्रशासनिक घटकों को सशक्त करने के उपायों के संदर्भ में अर्थपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।

इन घटकों को सुदृढ़ करने के लिए नौकरशाहों और गैर-अधिकारियों में परस्पर विरोधी कार्यों के मध्य शक्तियों और कार्यों के संबंध में स्पष्टता होनी चाहिए।

इन दोनों को न केवल अपनी शक्तियों और कार्यों की अपितु एक-दूसरे की समस्याओं और जिम्मेदारियों की भी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

उनके मध्य अच्छे संबंधों के लिए आपसी तालमेल और सम्मान आवश्यक है। उन्हें आपस में एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा नहीं अपितु पूरक दृष्टि रखनी चाहिए। MPA 16 Free Assignment In Hindi

स्थानीय स्तर की योजना को मजबूत करने के लिए इनमें कुछ महत्त्वपूर्ण उपाय निम्नलिखित हैं

(1) जिला योजना समिति में अनेक क्षेत्रों, जैसे-अर्थशास्त्र, मानव संसाधन विकास, तकनीकी, कृषि, स्वास्थ्य, अभियांत्रिकी तथा प्रबंधन विशेषज्ञ होने चाहिए तथा तकनीकी सहयोग करना उनका अनिवार्य कार्य होना चाहिए।

(2) जिला योजना समिति का अध्यक्ष जिला परिषद अथवा नगरपालिका के निर्वाचित सदस्यों में से होना चाहिए।

(3) प्राथमिक दृष्टि से जिला योजना समिति को केवल योजना निर्माण का कार्य दिया जाना चाहिए, क्योंकि योजना एक कठिन प्रक्रिया है तथा इसके लिए व्यापक एवं गंभीर प्रयासों की जरूरत होती है।

योजना समिति को प्राथमिक रूप से पंचायतों तथा नगरपालिकाओं को उनकी योजना के निरूपण में निर्देशन एवं सहयोग प्रदान करना चाहिए।

(4) जिला योजना समिति को संपूर्ण विकास की नीतियां प्राथमिकताएं कार्यक्रम तथा कार्यान्वयन प्रक्रिया तैयार करनी चाहिए ताकि क्षेत्र, उपलब्ध प्राकृतिक में मानवीय एवं अन्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा सके।MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

(5) जिला योजना समिति जिले के लिए निर्मित योजना को बनाने के निर्णय हेतु अधिकृत होनी चाहिए तथा इस सूचनार्थ सरकार को प्रेषित करना चाहिए। MPA 16 Free Assignment In Hindi

(6) पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समस्त वित्तीय विवरण पंचायत कार्यालय के बाहर प्रदर्शित किए जाने चाहिए और सभी सदस्यों को वितरित किए जाने चाहिए।

इसके लिए लेखा परीक्षा पारदर्शिता भी आवश्यक है। इसके पश्चात अतरिम रिपोर्ट पंचायत और ग्राम सभा को वित्तीय समिति तथा नगरपालिका और वार्ड सभा के समक्ष प्रस्तुत की जानी चाहिए।

(7) सामाजिक लेखा परीक्षा के संबंध में इनकी आवश्यकता प्रश्न उठाने की उचित प्रक्रिया, कार्यवाही का अभिलेखन, यदि आवश्यकता हो तो सदस्यों द्वारा अनुपालन एवं की गई कार्यवाही के संबंध में लोगों को अवगत करवाने में है।MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

(8) यदि संशोधन हेतु कार्यवाही न की गई हो तो मध्यस्थता के लिए उचित प्रक्रिया होनी चाहिए।

(9) स्थानीय अध्ययनों से ज्ञात होता है कि अनेक मामलों में लोगों की शिकायतों के बावजूद पंचायतों द्वारा कार्यवाही नहीं की जाती, तो इस प्रकार के मामले न्यायाधिकरण को भेजे जाने चाहिए।

(10) जिला और खण्ड स्तर पर वरिष्ठ नागरिकों में से जनता की देखभाल के लिए समितियों की स्थापना की जानी चाहिए। इसमें लोकपाल की भूमिका एक सलाहकार के रूप में निभानी चाहिए।

(11) स्थानीय निकायों की कार्य प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में सूचना का अधिकार अधिनियम एक सराहनीय प्रयास है MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

(12) जिला ग्रामीण विकास अभिकरण को जिला परिषद के साथ संयोजित कर देना चाहिए। जिला ग्रामीण विकास अभिकरण को जिला परिषद के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए।

यह भी ध्यान देने की जरूरत है कि जिला ग्रामीण विकास अभिकरण कार्यक्रमों को लागू करने की प्रक्रिया में स्वयं अभिकरण न बन जाएं, अपितु उन्हें कार्यान्वयन व अन्य अभिकरणों को देखना चाहिए।

प्रश्न 5. ’74वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम 1992, के पश्चात्, नगरपालिकायें आधारभूत स्तर पर स्थानीय स्वशासन की प्रभावशाली संस्थाओं के रूप में कार्य कर रही हैं।’ टिप्पणी कीजिए।

उत्तर- 74वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के बाद भारत में शहरी स्वशासन को तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है-नगर निगम, नगरपालिकाएँ और नगर पंचायतें।

शहरी क्षेत्रों के लिए उनके आकार को ध्यान में रखे बिना नागरिक सेवाओं और सुविधाओं, जैसे-जल आपूर्ति, कूड़ा-कचरा निकास, सड़कों का निर्माण और रखरखाव की व्यवस्था के लिए स्थानीय सरकार की आवश्यकता होती है। प्रायः नगर निगम, नगर परिषद और नगर समिति क्षेत्र के आधार के अनुसार ये सेवाएं प्रदान करती हैं।

नगरपालिकाओं में पार्षदों की दो श्रेणियाँ अर्थात प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित और मनोनीत होते हैं। निर्वाचित पार्षदों की संख्या नगर-निगम, नगर परिषद या नगरपालिका या राज्य क्षेत्र की जनसंख्या के आकार के अनुसार भिन्न होती है MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

मनोनीत सदस्यों के मामले में राज्य के कानून को ऐसे प्रतिनिधियों के मनोनयन की शर्ते और प्रक्रियाओं को विनिर्दिष्ट करना आवश्यक होता है। MPA 16 Free Assignment In Hindi

नागरिक सेवाओं के प्रबंध के लिए प्रभावशाली संगठनात्मक संरचना, समुचित वित्त और दक्ष कार्मिकों की आवश्यकता होती है।

भारत में नगर प्रशासन के रूप में नगर निगम स्थानीय प्राधिकरणों में सर्वश्रेष्ठ स्थान रखता है। प्रायः नगर निगम की स्थापना विशेष कानून के अंतर्गत की जाती है, जिसे राज्य विधानमंडल पारित करता है।

संत्र शासित प्रदेशों में संसद द्वारा पारित कानून के द्वारा इसकी स्थापना की जाती है। राज्य में ऐसे कानून किसी विशेष निगम अथवा सभी निगों के लिए बनाए जा सकते हैं।

आमतौर पर नगर निगम अन्य स्थानीय शासन के निकायों से अधिक स्वायत्त होता है। इसका निर्वाचवर्ष के अंतराल पर होना आवश्यक है तथा साथ ही साथ इसके सदस्यों में से मेयर या महापौर का भी चुनाव किया जाता है। MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

देश में प्रत्येक राज्य ने नगरपालिकाओं के कार्य ढाँचा संसाधन और नागरिक प्रशासन में उनकी भूमिका विनिर्दिष्ट करते हुए उनके गठन के लिए कानून बनाए हैं।

जिन शहरी क्षेत्रों की जनसंख्या 30000 से अधिक 23.00000 तक है उनका शासन नगर परिषद नाम का निर्वाचित नगर निकाय करता है। 3 लाख की किसी भी नगरपालिका क्षेत्र को क्षेत्र के शासन में लोगों की सही सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए वार्ड समिति बनानी होती है। _MPA 16 Free Assignment In Hindi

इसके अंतर्गत वे क्षेत्र आते हैं जो संक्रमण के दौर से गुजर रहे हैं और जिनकी जनसंख्या 50,000 से कम है तथा जो नगरपालिका या नगर निगम द्वारा शासित होते हैं।

यह प्राय: नगरपालिका की सबसे छोटी इकाई होती है। शहरों में सुचारु रूप से सरकार चलाने के लिए इसे तीन श्रेणीबद्ध निगमों में बाँटा गया है, जो अपने-अपने स्तर पर इसे संचालित करते हुए शासन चलाती हैं।

74वें संविधान संशोधन के द्वारा लागू किए गए मुख्य सुधार-केन्द्रीय सरकार द्वारा समय समय पर शहरी निकायों में सुधार लाने के लिए नियुक्त आयोगों एवं कमेटियों की सिफारिशों और सुझावों के परिणामस्वरूप संविधान (74वाँ संशोधन) एक्ट 1992 लागू किया गया।

पहले राज्य सरकारों को अपने स्थानीय निकायों को अपनी इच्छानुसार प्रबंध करने की स्वतंत्रता थी। इस संशोधन के परिणामस्वरूप शहरी स्वशासन संस्थाओं की स्थापना, सशक्तीकरण और कार्यप्रणाली के लिए वैधानिक प्रावधानों की व्यवस्था की गई। इस एक्ट के मुख्य प्रावधानों को दो मुख्य वर्गों में विभाजित किया जा सकता है-

(1.) अनिवार्य तथा MPA 16 Solved Free Hindi Assignment
(2.) ऐच्छिक।

अनिवार्य प्रावधानों में से दो प्रावधान, जो सभी राज्यों के लिए आवश्यक हैं, वे निम्नलिखित हैं

(1.) छोटे और बहुत बड़े शहरी क्षेत्रों में क्रमशः नगर पंचायतों, नगर परिषदों और नगर निकायों का गठन करना।

(2.) शहरी स्थानीय निकायों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आरक्षित करना। MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

(3.) महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित कराना।

(4.) पंचायती राज संस्थाओं में चुनाव करवाने हेतु गठित (73वाँ संशोधन) राज्य चुनाव आयोग शहरी स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के भी चुनाव करवाएगा।

(5.) पंचायती राज संस्थाओं के वित्तीय मामलों को देखने के लिए गठित राज्य वित्त आयोग, स्थानीय शहरी स्वशासन निकायों के वित्तीय मामलों को भी देखेगा।

( 6.) शहरी स्थानीय स्वशासन निकायों का कार्यकाल पाँच वर्ष निचिश्त किया जाता है और जल्दी ही भंग हो जाने की स्थिति में नए चुनाव छह महीने के भीतर करवाने होते हैं। कुछ ऐच्छिक प्रावधान जो राज्यों पर बाध्यकारी नहीं हैं,

परन्तु जिनको राज्यों द्वारा लागू करने की अपेक्षा की जाती है, वे निम्नलिखित हैं

(1.) इन निकायों हेतु संघ तथा राज्य विधायिका के सदस्यों को मताधिकार प्रदान करना।

(2.) पिछड़ी जातियों को आरक्षण प्रदान करना।

(3.) करों, शुल्कों, राहदारी (मार्ग शुल्क) और फीस आदि के सम्बन्ध में वित्तीय शक्तियाँ प्रदान करना।

(4.) नगर स्वशासन की संस्थाओं को स्वायत्तता प्रदान करना तथा इस एक्ट के द्वारा संविधान में जोड़ी गई 12वीं अनुसूची में दर्ज कुछ अथवा सभी कार्यों के संपादन अथवा आर्थिक विकास के लिए योजना निर्माण हेतु शक्तियों का हस्तान्तरण करना। MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

74वें संशोधन के अनुसार अब सभी राज्यों में नगर निगमों और सुगर स्वशासन की संस्थाओं को निष्पक्ष रूप से एक ही प्रकार से नियंत्रित किया जाता है। लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि स्थानीय स्वशासन अभी तक राज्य सूची का एक विषय है।

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भाग -॥

प्रश्न 6. विकेन्द्रित विकास के प्रभाव की चर्चा कीजिए

उत्तर-73वें एवं 74वें संविधान संशोधन अधिनियमों से भारत में शासन को लोकतांत्रिक संरचना में प्रमुख बदलाव हो रहे हैं। ये अधिनियम पंचायती राज संस्थाओं और नगरपालिका संस्थाओं को अनिवार्य बनाने के लिए विकेन्द्रीकरण के माध्यम से लोकतंत्र को सशक्त बनाने और विकास को तीव्र करने की ओर ऐतिहासिक दृष्टि से राजनीतिक आंदोलन का चरम बिंदु थे।

इन अधिनियमों का लक्ष्य स्वशासन की संस्थाओं के रूप में स्थानीय संस्थाओं की संरचना करना था।

वर्तमान में विकेन्द्रीकरण की प्रक्रिया ने ग्रामीण और शहरी प्रबंधन के लिए महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने का ग्रामीण और शहरी स्थानीय संस्थाओं को एक अवसर प्रदान किया है। इन अधिनियमों ने ग्रामीण और शहरी शासन स्थापित करने के लिए एक विस्तृत संरचना प्रदान की है। MPA 16 Free Assignment In Hindi

इसके अतिरिक्त विकेन्द्रित विकास का सभी स्तरों अर्थात राजनीतिक, प्रशासनिक, क्रियात्मक और आर्थिक आयामों पर प्रभाव पड़ा है।MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

राजनीतिक विकेन्द्रीकरण – राजनीतिक विकेन्द्रीकरण के तहत इन अधिनियमों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी स्थानीय संस्थाओं तथा निर्वाचित प्रतिनिधियों को राजनीतिक और संवैधानिक स्थान प्रदान किया गया है।

इन अधिनियमों ने स्थानीय संस्थाओं को अधिकारों के साथ-साथ बुनियादी स्तरों पर सामाजिक गतिशील प्रक्रिया प्रारंभ करने के अवसर प्रदान किए हैं।

इन्होंने जिला, ब्लॉक और ग्राम तीनों स्तरों पर विकेन्द्रीकरण की संरचना प्रदान की है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए एकसमान तीन स्तरीय संरचना और प्रत्येक स्तर के लिए एकसमान पाँच वर्ष की अवधि भी प्रदान की है। इस प्रकार विकेन्द्रित विकास का यह बहुत ही सकारात्मक प्रभाव है। \

चुनाव- ग्राम पंचायत के प्रधान का प्रत्यक्ष चुनाव का बहुत ही सकारात्मक प्रभाव दिखाई दिया है। आमतौर पर देखा गया है कि ऐसा प्रधान शक्तिशाली कार्यकारी प्रमुख तो होता ही है, साथ ही जनता के प्रति स्पष्ट रूप से उत्तरदायी भी होता है।MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

प्रधान अर्थात ग्राम पंचायतों के सरपंच के सीधे चुनावों से लोगों में न केवल उसके कार्यों के प्रति पूर्ण सजगता में वृद्धि हुई है, अपितु ग्राम पंचायत के कार्य निष्पादन के प्रति भी वृद्धि होती है।

आरक्षण – विकेन्द्रीकरण के प्रभावों का विश्लेषण करने वाला एक अन्य क्षेत्र है पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकायों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों और महिलाओं की भागीदारी।

स्थानीय सरकार के सभी तीनों स्तरों में स्थानीय परिषदों के लिए निर्वाचित 30 लाख लोगों में 10 लाख महिलाओं सहित बड़ी मात्रा में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लोग हैं।

आरक्षणों ने पिछड़े वर्गों को अधिक स्पष्ट दृष्टि प्रदान की तथा स्थानीय विषयों पर अपना प्रभाव जमाने का अवसर प्रदान किया। ऐसे अनेक उदाहरण हैं,MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

जहां महिलाओं ने वित्तीय संसाधनों को सुव्यवस्थित करने और उच्च स्तर पर नौकरशाही एवं राजनीतिज्ञों को प्रभावित करने के लिए सीमित स्थानीय विकास का लाभ प्राप्त करने का प्रबंध किया है।

महिलाओं के लिए आरक्षण का सर्वश्रेष्ठ सकारात्मक प्रभाव है महिलाओं द्वारा शिक्षा के मूल्य को समझना। शिक्षा के अभाव के कारण पंचायत/नगरपालिका के नए सदस्यों को अनेक बाधाओं को झेलना पड़ा।

इसके अलावा पंचायतों और नरगपालिकाओं के सार्वजनिक क्षेत्र में भाग लेने से महिलाओं की स्थिति उनके परिवार में सशक्त हुई है।

कर्नाटक राज्य के अध्ययन से पता चलता है कि महिलाओं ने स्थानीय विकास की प्राथमिकताएं व्यवस्थित करने के लिए आरक्षण का लाभ उठाते हुए ग्राम पंचायतों में काफी उन्नति की है।

अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए पदों के आरक्षण न उन्हें प्रतिनिधित्व का एक निर्धारित स्तर और नेतृत्व प्रदान किया है।

इस प्रकार आरक्षण ने इन संस्थाओं में महिलाओं और कमजोर क्यों की भागीदारी अनिवार्य होने के कारण स्थानीय स्तर पर भागीदारी प्रक्रिया को विस्तृत बनाया है। MPA 16 Free Assignment In Hindi

ग्राम सभा की भूमिका-वें संविधान संशोधन अधिनियम से पूर्व लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण की संपूर्ण व्यवस्था की आधारशिला ग्राम सभा में सेवारत नहीं थी। संशोधन के पश्चात भी यह अपेक्षित सीमा तक सक्रिय नहीं थी।

स्थानीय स्तर पर इस संस्था के महत्त्व को देखते हुए सरकार ने वर्ष 1999-2000 को ग्राम सभा वर्ष के रूप में घोषित किया। पंजाब, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश तथा केरल को छोड़कर अन्य प्रदेशों में इस संस्था को मात्र बातचीत की संस्था बनाकर रख दिया है। MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

मध्य प्रदेश ने ग्राम सभा को सशक्त बनाने के लिए पंच एवं सरपंच को वापस बुलाने का अधिकार भी इस संस्था के हाथ में सौंपा है।

अधिकांश राज्यों में ग्राम सभा को ग्रामीण विकास संबंधित कार्यक्रमों को क्रियान्वित करने में सहायता प्रदान करना, अनेक गरीबी हटाओ कार्यक्रमों के अंतर्गत लाभार्थियों को चुनना, गांव में एकता व सौहार्द का वातावरण बनाना तथा ग्राम पंचायत द्वारा पिछले वर्ष का लेखा-जोखा तथा आने वाले वर्ष के कार्यक्रम आदि के अनुमोदन का अधिकार दिया है।

चूंकि ग्राम सभा को कोई विशेष शक्ति व अधिकार नहीं है, इसलिए आम लोग इसमें जाने से हिचकिचाते हैं,

लेकिन जब-जब ग्राम सभा की बैठक में गरीब परिवारों के लिए इंदिरा आवास योजना के तहत मकान वितरित करने अथवा अनेक ग्रामीण विकास योजनाओं के अंतर्गत लाभार्थियों के चुनने का कार्यक्रम रहता है, तब-तब ग्राम सभा की बैठकों में लोगों की भागीदारी बढ़ जाती है। MPA 16 Free Assignment In Hindi

वार्ड समितियों की भूमिका – वार्ड समितियों का प्रावधान लोगों और उनके चयनित सदस्यों के मध्य समीपता बनाए रखने के लिए किया गया था। वार्ड समितियां केवल 8 राज्यों में बनाई गई हैं।

इन राज्यों में से केवल एक राज्य में ही सभी शहरी स्थानीय संस्थाओं में वार्ड समितियां बनाई गई हैं। केरल और पश्चिम बंगाल को छोड़कर किसी भी राज्य ने समितियों की स्थापना में उत्साह नहीं दिखाया है।

वार्ड समिति ग्रीष्म ऋतु में जल की कमी से उत्पन्न समस्याओं के समाधान के लिए वर्षा जल संग्रहण संरचनाए बनाने के लिए स्थापित की गई है।

वार्ड समितियां सड़कों पर कचरा एकत्रित न होने देने के लिए घरों से कचरा एकत्रित करने के लिए श्रमिकों की नियुक्त करती है। इन सभी के सहयोग से अधिक विकेन्द्रीकरण, जिम्मेदारी, पारदर्शिता और लोगों की भागीदारी को बढ़ाया है। यह विकेन्द्रीकरण का सराहनीय एवं सकारात्मक प्रयास है।

जिम्मेदारी/उत्तरदायित्व – नागरिकों के दिमाग में विश्वास उत्पन्न करना स्थानीय संस्थाओं का प्रथम उत्तरदायित्व है। विकास परियोजनाओं विशेषकर धन प्राप्ति और उसके व्यय से संबंनिल्लत सूचनाएं समिति कार्यालयों के बाहर किसी बोर्ड पर नागरिकों की जानकारी के लिए प्रदर्शित करने जैसे प्रावधान स्थानीय संस्थाओं की जिम्मेदारी निर्धारित करते हैं।MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

विकास परियोजनाओं से संबंधित दस्तावेजों की फोटो कॉपी कम शुल्क पर कराने से जिम्मेदारी और पारदर्शिता निर्धारित होती है। विकेन्द्रीकरण का यह बहुत ही सकारात्मक प्रभाव है।

संभावना के समीप भविष्य में स्थानीय संस्थाएं स्वच्छ कार्य के नैतिक मूल्यों, कानूनी शासन के लोकतांत्रिक मूल्यों, भागीदारी, संवेदनशीलता और पारदर्शिता को अपनाएंगी तथा कुशलतापूर्वक सेवाएं प्रदान करने के व्यावसायिक मूल्यों को लागू करेंगी।

क्रियात्मक विकेन्द्रीकरण – इसका तात्पर्य स्थानीय स्तरों पर विशेष विषयों कार्यों का स्थानांतरण करना है। 11वीं अनुसूची (29 विषय) और 12वीं अनुसूची (18 विषय) पंचायतों और नगरपालिकाओं को स्थानांतरित किए जाने वाले विषयों का निर्धारण करती है। _

कार्यों का हस्तांतरण-समस्त राज्यों में 29 और 18 विषयों के तहत हस्तांतरण किए जाने वाले कार्य अभी तक पूर्ण रूप से हस्तारित नहीं किए गए हैं। क्रियात्मक दृष्टि से मूलभूत आवश्यकताओं के तहत आने वाले कार्यों जैसे प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन, सिंचाई आदि भी हस्तांतरित नहीं किए गए हैं।

कुछ राज्यों का कार्य निष्पादन अन्य राज्यों से अच्छा है जबकि कुछ राज्यों को तो अभी ये कार्य आरंभ करने वित्तीय विकेन्द्रीकरण-वित्तीय विकेन्द्रीकरण के तहत स्थानीय संस्थाओं को अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने और स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजना निर्माण में वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करने के लिए कर लगान, धन एकत्रित करने और व्यय करने के अधिकार प्रदान किए गए हैं।

कोषों/धन का हस्तांतरण-कार्यों के हस्तांतरण की तरह ही ज्यादातर राज्यों में वित्तीय हस्तांतरण का कार्य नहीं हुआ है। वित्तीय हस्तांतरण में सीमित ही प्रगति हुई है, MPA 16 Free Assignment In Hindi

क्योंकि संसाधनों का निर्गत राज्य और केन्द्र सरकार की निर्धनता रोधी योजनाओं के कार्यान्वयन निर्देशों द्वारा सुनिश्चित किया जाता है। MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

इसलिए पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों को वित्तीय स्वायत्तता बहुत कम राज्यों में प्रदान की गई है। इसके बावजूद विकेन्द्रीकरण का प्रभाव स्थानीय संस्थाओं की वित्तीय स्थिति पर देखा जा सकता है।

राज्य वित्त आयोग की स्थापना और अधिनियम में प्रभावी स्थानीय कर लागू करने के प्रावधान ने स्थानीय संस्थाओं की वित्तीय स्थिति को सुधारा है। ग्राम पंचायत की वित्तीय संपत्ति, जैसे-मछली पालन, तालाब, चरागाह व अन्य वस्तुओं की नीलामी करने जैसे प्रावधानों ने भी स्थानीय संस्थाओं की वित्तीय स्थिति को सुधारा है।

प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण-प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण के अंतर्गत योजना निर्माण और कार्यान्वयन जिम्मेदारियों को स्थानीय संस्थाओं को सौंपना सम्मिलित है। MPA 16 Free Assignment In Hindi

जिला योजना समितियां-संवैधानिक अनुच्छेद 243 जेड (डी)के प्रावधानों के अनुसार योजना संस्थाओं को पहली बार संवैधानित स्थिति प्रदान की गई है।

नई व्यवस्था ने संस्था निर्माण कदमों को बढ़ावा दिया है ताकि उस योजना निर्माण के लिए जिम्मेदारी को विभाजित किया जा सके। यह पंचायत और नगरपालिका प्रणाली से बाहर एक सशक्त संस्था के रूप में उभरी है,

जिसे मध्य प्रदेश में जिला योजना समिति को जिला सरकार का नाम दिया गया है। इस प्रक्रिया के तहत विकास योजना के निर्माण, कार्यान्वयन और रखरखाव की सभी अवस्थाओं में स्थानीय संस्थाओं के माध्यम से नागरिकों को जागरूक किया जाता है। MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

नौकरशाही की भूमिका-विकेन्द्रीकरण की नई योजना में राज्य अधिनियमों ने नौकरशाही के माध्यम से राज्य सरकारों को नियंत्रण, पर्यवेक्षण, रद्द करने के अधिकार तथा समाप्ति प्रस्ताव लागू करने का पूर्ण अवसर प्रदान किया है।

स्थानीय सरकारों में नौकरशाही विशेषकर ग्राम पंचायतों में सचिव लगातार निर्वाचित प्रतिनिधियों पर पूर्ण प्रभाव का उपयोग करते हैं। MPA 16 Free Assignment In Hindi

नियमित स्थानीय चुनावों के प्रावधान, सार्वजनिक जीवन में महिलाओं, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को लाने के लिए स्वीकारात्मक उपायों तथा ग्राम सभाओं के कार्यों का निरीक्षण और जिम्मेदारी को सशक्त करने के लिए प्रावधानों ने राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए स्थानीय लोकतंत्र की जड़ें मजबूत की हैं।

प्रश्न 10. निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न पर लगभग 250 शब्दों में संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

(क) जन भागीदारी के तौर-तरीके

उत्तर-शासन में जनता की भागीदारी के संबंध में काफी असमंजस बना हुआ है। इसलिए नागरिकता के विकास को स्थानीय कार्यसूची में सम्मिलित करने की आवश्यकता है। जन भागीदारी को एक स्तर आगे बढ़कर परियोजना के स्तर से नीति के स्तर पर पहुंचना होता है,

जो लोगों को राजनीतिक सशक्तीकरण की ओर ले जाता है। यहां भागीदारी ग्रामीण मूल्यांकन का उदाहरण दिया जा सकता है, MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

जिनका प्रयोग इस समय आपदा कम करने विश्व बैंक द्वारा प्रारंभ की गई निर्धनता कम करने की नीति के प्रबोधन के लिए भागीदारी गरीबी आकलनों में हो रहा है और यह इस आलोचना के बाद की स्थिति है कि सहायता की शर्तों के साथ शामिल किया जा रहा है और वास्तविक आवश्यकताओं से उसका संबंध नहीं है।

भागीदारी विकास और नागरिकता के संबंध की अवधारणा कुछ सीमा तक अभिकरण नीति व्यवहारों और संस्थागत नियमों की एक कड़ी के मध्य परस्पर क्रियाओं के संबंध में की जा सकती है। _

इस प्रकार की विस्तृत अवधारणा तो भागीदारी को विशेष कार्यक्रमों में आसन्न भागीदारी से भी आगे बढ़कर वास्तविक और निरंतर प्रक्रिया की ओर ले जाती है,

जिसके माध्यम से लोग अपने अधिकारों को समाज के शक्तिशाली सदस्यों के रूप में बढ़ावा देते हैं और प्रशासन को नागरिक केन्द्रित आधार प्रदान करते हैं।

इस संबंध में भागीदारी नीति में उन उपायों का प्रस्ताव किया जाता है, जिनसे लोग जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने अधिकार प्राप्त करने योग्य बनें और यह अच्छी शिक्षा, राजनीतिक संवाद, सूचना का अधिकार आदि के द्वारा होगा। वेबस्टर और एंगबर्ग पीटरसन के अनुसार राजनीतिक स्थान के निम्नलिखित तीन विश्लेषणात्मक घटक हैं MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

(1.) राजनीतिक आख्यान, जिनमें निर्धनता और निर्धनता कम करने के विशेष मुद्दे होते हैं।

(2.) गरीबों के सामाजिक और राजनीतिक व्यवहार, जो निर्णय करने की प्रक्रिया, कार्यसूची, नीति और कार्यक्रम के कार्यान्वयन को प्रभावित करने का माध्यम हो सकते MPA 16 Free Assignment In Hindi

(3.) संस्थागत सूची, जिसके माध्यम से निर्धन व्यक्ति नीति-निर्माण और कार्यान्वयन तक पहुंच बना सकते हैं और उस पर नियंत्रण कर सकते हैं।

इस प्रकार भागीदारी को नागरिकता का उप-लक्ष्य मानने पर, नागरिक तो शासन की प्रक्रिया के बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक अंग ही दिखाई देते हैं,

इसलिए नागरिकता को कर्तव्यों और दायित्वों के रूप में फिर से परिभाषित किए जाने की जरूरत है, जिसके लिए नागरिकों को राष्ट्र-राज्यों में अपनी संप्रभुता को फिर से उजागर करना होगा और सरकार को प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए जनहित में कार्य करना होगा।

लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण तो भागीदारी शासन की कुंजी है। स्थानीय स्तर पर भागीदारी को संस्था का रूप देने के लिए नियमित चुनावों, परिषद में सुनवाई और शायद भागीदारी बजट निर्माण को माध्यम बनाया जाता है। _

संविधान संशोधन अधिनियम की मान्यता है कि लोग वार्ड, नगरपालिका, जिला तथा महानगर क्षेत्रीय स्तर पर भागीदार बनें। इस प्रकार के संभावित लाक्ष्य को केवल विद्यमान नगरपालिका अधिनियम में संविधान संशोधन अधिनियम को शामिल करके ही प्राप्त किया जा सकता है।

राज्य स्तर पर वार्ड समितियां और ग्रामीण स्तर पर ग्राम सभाएं ही शहरी शासन का तंत्र होती हैं। वार्ड समितियों की स्थापना इस प्रकार से की जाती है कि उससे प्रशासन को लोगों के समीप लाया जा सके। ग्राम सभा का अर्थ ग्रामीण समुदाय को स्थानीय स्तर पर एक प्रकार के प्रत्यक्ष लोकतंत्र में शामिल करना है।

प्रशासन में जन भागीदारी की अन्य संस्थाएं हैं-न्याय पंचायतें और लोक अदालतें, जो शासन संबंधी मुद्दों पर लोगों की शिक्षा और तीव्र न्याय के लिए पारंपरिक कानूनी संस्थाओं के पूरक के रूप में गठित की गई हैं।

शहरी आधारिक सेवा कार्यक्रम की शुरुआत केन्द्र सरकार ने यूनीसेफ की मदद से की थी। इन परियोजनाओं में कुछ चयनित शहरों की मलिन बस्तियों को ही शामिल किया गया था।

उसके पश्चात समुदाय को केवल परियोजना के कार्यान्वयन और काम की देखभाल करना ही नहीं, बल्कि परियोजना की डिजाइन तैयार करने में भी लगाया गया था।

इन समस्त प्रयासों के बावजूद सामुदायिक भागीदारी 1970 के दशक तक एक राज्य प्रायोजित गतिविधि ही बनी रही। विकास संबंधी कार्यनीति के एक आयाम के रूप में सामुदायिक भागीदारी 1980 के दशक में प्रयोग में आई. क्योंकि सार्वजनिक अभिकरण अपेक्षित स्तर की आधारिस सेवाएं प्रदान करने में बिल्कुल नाकाम रहे।

आधारिक संरचनागत परियोजनाओं में सबसे प्रवर्तनकारी सामुदायिक भागीदारी मोहल्ला तथा मलिन बस्ती नेटवर्किंग योजना है, जिसे 1990 के दशक में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में केन्द्र और राज्य सरकार की समुचित आर्थिक सहायता से आरंभ किया गया।

इस प्रकार तौर-तरीकों के संदर्भ में भ्रम को दूर करने और इस संबंध में कानूनी प्रावधान उपलब्ध कराने के लिए सामुदायिक भागीदारी को संस्था का रूप देने का प्रयास आवश्यक है। MPA 16 Free Assignment In Hindi

इसके कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण है। जैसे सिंचाई परियोजनाओं में जल उपयोक्ता संघ , जल विभाजक प्रबंध में जल विभाजक संघ , वन क्षेत्रों में समितियां, प्राथमिक शिक्षा में , अति लघु ऋण में एस.एच.जी., शहरी क्षेत्रों में पड़ोसी उपयोक्ता समूह अथवा आवास कल्याणकारी संघ आदि, जो इन क्षेत्रों में कार्यरत हैं तथा उन्हें अनुभव भी प्राप्त है।MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

इस प्रकार के निकायों को शायद समितियों के माध्यम से, पंचायत व्यवस्था के अंतर्गत लाना होगा। सांसदों और विधायकों को दी जाने वाली विकास निधि की अवधारणा, एक और विसंगति है, जिसे पंचायती राज के संदर्भ में समाप्त करना होगा।

(ख) सतत् विकास और शासन

उत्तर-सतत विकास और शासन के अंतर्संबंध-राष्ट्रीय मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार मानव विकास हेतु शासन का संबंध ऐसी समस्त प्रक्रियाओं के प्रबंधन से है, जो किसी भी समाज में पर्यावरण को परिभाषित करती हैं,

जिससे एक ओर लोगों को अपने शक्ति स्तर में वृद्धि करने हेतु शक्ति प्राप्त होती है और दूसरी ओर उन्हें अपनी शक्ति का पहचाने और उपलब्ध विकल्पों की सीमा विस्तार करने के अवसर मिलते हैं।

शासन की राज्यों से गुजारिश है कि वे अनेक मनोनीत निकायों के माध्यम से अपनी शक्ति का प्रयोग करें और एक ऐसे समतामूलक, सामाजिक दृष्टि से दक्ष, भेदभाव रहित और सहभागीय दृष्टिकोण से कथित उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु प्रयास करें, जिसमें विस्तृत स्तर पर नागरिकों को सम्मिलित किया जा सके।

सतत शासन हेतु शासन में विकास की कार्यनीति में आर्थिक और पर्यावरणीय सरोकारों का एक एकीकृत दृष्टिकोण सम्मिलित होना चाहिए, जिसमें केवल जनता को दिए जाने वाले जीवन स्तर का ही नहीं बल्कि ‘सामाजिक साम्य’ को लक्ष्य मानकर एक समान वितरण का भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

शासन को जनता के विकास के अधिकारों की भी रक्षा करनी चाहिए और साथ ही पर्यावरण के सरोकारों को प्राथमिकता प्रदान करनी चाहिए।MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

इस उद्देश्य की प्राप्ति हेतु लोकतंत्र, स्वायत्तता, निष्पक्षता, अंतर्निर्भरता, जिम्मेदारी और जवाबदेही जरूरी है। कोई भी सरकार समाज की भलाई के लिए अपनी नीतियां और कार्यक्रम बनाए, उससे हले उसे निम्नलिखित गुणों का समावेश करना चाहिए

(1.) लोकतांत्रिक सरकार के पास अनेक तंत्र और संस्थाएं होती हैं, जो जनता की व्यवस्था में भागीदारी हेतु कुछ मौलिक अधिकार प्रदान करती हैं।

( 2.) विकास के विकल्पों का निर्धारण नागरिकों और सरकार को मिलकर थोड़ी-बहुत स्वायत्तता के आधार पर करना चाहिए।

(3.) स्थानीय संसाधनों को समतामूलक तरीके से बनाए रखने और परस्पर बांटने की जरूरत है।

(4.) वैश्वीकरण के बढ़ते स्तर के साथ राष्ट्रों में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, विकास परियोजनाओं के लिए मदद करने में अंतर्निर्भरता होनी चाहिए।

( 5.) प्रत्येक नागरिक की यह जिम्मेदारी है कि वह पर्यावरण का संरक्षण और बचाव करे और साथ ही जनता के हितों को भी हानि न पहुंचाए।MPA 16 Solved Free Hindi Assignment

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